
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) और वहां की हुकूमत का ‘बहिष्कार’ वाला पुराना पैंतरा एक बार फिर औंधे मुंह गिर गया है। हफ्तों तक टालमटोल और गीदड़भभकी देने के बाद आखिरकार पाकिस्तान ने सरेंडर कर दिया है। सोमवार शाम को हुई एक अहम बैठक के बाद पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि वह ICC T20 विश्व कप 2026 में हिस्सा लेगा और भारत के खिलाफ होने वाले महामुकाबले सहित किसी भी मैच का बहिष्कार नहीं करेगा।
शहबाज शरीफ और मोहसिन नकवी की मुलाकात में लगा ‘फुल स्टॉप’
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नकवी पिछले कई दिनों से यह राग अलाप रहे थे कि टीम के विश्व कप जाने का फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ करेंगे। सोमवार शाम जैसे ही प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपनी विदेश यात्रा से लौटे, मोहसिन नकवी उनसे मिलने पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, काफी देर तक चले विचार-विमर्श के बाद यह तय हुआ कि पाकिस्तान के पास टूर्नामेंट में खेलने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। बैठक के बाद नकवी ने मीडिया को स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान की टीम तय कार्यक्रम के अनुसार विश्व कप के लिए उड़ान भरेगी।
15 फरवरी को कोलंबो में महामुकाबला: टला संकट का बादल
क्रिकेट जगत की नजरें विशेष रूप से 15 फरवरी पर टिकी हैं, जब श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में भारत और पाकिस्तान की टीमें आमने-सामने होंगी।
इससे पहले पाकिस्तानी मीडिया में यह खबरें जोर-शोर से चल रही थीं कि पीसीबी टूर्नामेंट का हिस्सा तो बनेगा, लेकिन भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार कर सकता है। इस खबर ने विश्व भर के क्रिकेट प्रेमियों और ब्रॉडकास्टर्स के बीच खलबली मचा दी थी। हालांकि, अब पाकिस्तान के ताजा फैसले के बाद इस हाई-वोल्टेज मैच पर मंडरा रहे अनिश्चितता के बादल छंट गए हैं।
ICC का ‘हंटर’ और पाकिस्तान की बेबसी
जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान का यह हृदय परिवर्तन किसी खेल भावना की वजह से नहीं, बल्कि आईसीसी (ICC) के सख्त एक्शन के डर से हुआ है।
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बैन का खतरा: जैसे ही पाकिस्तान द्वारा मैच बहिष्कार की खबरें उड़ीं, आईसीसी ने स्पष्ट संकेत दे दिए थे कि बिना किसी ठोस कारण के किसी मैच को छोड़ना टूर्नामेंट के कमर्शियल एग्रीमेंट का उल्लंघन माना जाएगा।
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आर्थिक दंड: आईसीसी ऐसे मामलों में न केवल भारी जुर्माना लगा सकती है, बल्कि संबंधित बोर्ड पर प्रतिबंध (Ban) भी लगा सकती है। पहले से ही आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे पीसीबी के लिए आईसीसी से मिलने वाले फंड का रुकना ‘आत्मघाती’ साबित होता, इसीलिए उसे लाइन पर आना पड़ा।
पुरानी आदत: खेल को राजनीति में घसीटना
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने क्रिकेट के मंच पर नाटक किया हो। एशिया कप हो या विश्व कप, हर बार पीसीबी ‘हाइब्रिड मॉडल’ या ‘बहिष्कार’ की धमकी देता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की आर्थिक ताकत और आईसीसी के वैश्विक नियमों के सामने पाकिस्तान की हर जिद अधूरी रह जाती है।
फैंस में भारी उत्साह
पाकिस्तान के इस यू-टर्न के बाद कोलंबो में होने वाले मैच के टिकटों की मांग आसमान छूने लगी है। क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि मैदान के बाहर चाहे जो भी राजनीति हो, मैदान के अंदर 15 फरवरी को होने वाली जंग में भारत का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।
पाकिस्तान का ड्रामा भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर उसकी साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि 15 फरवरी को जब मैदान पर दोनों टीमें उतरेंगी, तो टीम इंडिया अपनी लय बरकरार रखती है या नहीं।



