
नई दिल्ली | 31 दिसंबर, 2025: राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर के इलाकों में आपकी रसोई तक पहुँचने वाला सामान असली है या नहीं? यह सवाल एक बार फिर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने खड़ा कर दिया है। साल 2025 के अंतिम दिन, दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो वर्षों से नामी-गिरामी कंपनियों के ‘नकली अवतार’ बाजार में उतार रहा था। दिल्ली पुलिस ने पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर में एक बड़े ऑपरेशन के दौरान चार जालसाजों को गिरफ्तार कर इस ‘पैरेलल इकोनॉमी’ को तगड़ा झटका दिया है।
खुफिया सूचना और क्राइम ब्रांच का ‘ऑपरेशन क्लीन’
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को पिछले काफी समय से इनपुट मिल रहे थे कि दिल्ली के थोक बाजारों और रिहायशी इलाकों में कुछ ऐसे गिरोह सक्रिय हैं, जो नामी ब्रांड्स (FMCG Brands) के हूबहू दिखने वाले नकली उत्पाद खपा रहे हैं। पुलिस उपायुक्त (क्राइम) विक्रम सिंह ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष टीम का गठन किया।
बुधवार की दोपहर, जब पूरी दिल्ली नए साल के जश्न की तैयारी में डूबी थी, क्राइम ब्रांच की टीम ने उत्तम नगर में एक गोदाम पर छापा मारा। यहाँ पुलिस ने नितिन कुमार (38), रजत सिंघल (38), सुरेंद्र गुर्जर (45) और मुजाहिद (38) को उस वक्त दबोचा, जब वे नकली उत्पादों की एक बड़ी खेप को बाजार में भेजने की तैयारी कर रहे थे।
कौन हैं ये ‘नकली दुनिया’ के सौदागर?
गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों की भूमिका इस सिंडिकेट में बेहद अहम थी:
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नितिन कुमार: इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड माना जा रहा है, जो उत्पादन इकाइयों की निगरानी करता था।
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रजत सिंघल: लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन का एक्सपर्ट, जो यह सुनिश्चित करता था कि माल पुलिस की नजरों से बचकर दुकानों तक पहुँचे।
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सुरेंद्र गुर्जर: भंडारण और स्टॉक मैनेजमेंट का जिम्मा इसी पर था। इसने घनी आबादी वाले इलाकों में गुप्त गोदाम किराए पर ले रखे थे।
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मुजाहिद: ग्राफिक और प्रिंटिंग की समझ रखने वाला मुजाहिद नकली लेबल और पैकिंग को इतना असली बनाता था कि साधारण आंखों से फर्क करना नामुमकिन था।
गिरोह का मोडस ऑपेरंडी: कैसे बनता था ‘नकली’ सामान?
पुलिस की प्राथमिक जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। यह गिरोह केवल लेबल नहीं बदलता था, बल्कि उत्पादों को तैयार करने के लिए सबसे घटिया सामग्री का इस्तेमाल करता था।
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खाद्य उत्पादों में मिलावट: घी, मसाले, चाय पत्ती और सॉस जैसे उत्पादों में औद्योगिक रंगों और हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता था।
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घरेलू सामान (Cosmetics and Cleaning): डिटर्जेंट पाउडर, साबुन और हैंडवॉश जैसे सामानों में एसिड और खतरनाक केमिकल मिलाए जाते थे, जो त्वचा और स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं।
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पैकेजिंग का खेल: मुजाहिद और उसकी टीम हाई-टेक प्रिंटिंग मशीनों के जरिए कंपनियों के ‘होलोग्राम’ और ‘बारकोड’ तक की नकल कर लेते थे।
कंपनियों को करोड़ों का घाटा, जनता की सेहत पर वार
यह रैकेट केवल एक आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है। नामी ब्रांड्स के नाम पर लोग इन उत्पादों को महंगे दामों पर खरीदते थे, जबकि असल में वे ‘धीमा जहर’ घर ला रहे थे।
आर्थिक प्रभाव: विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस तरह के नकली उत्पादों के कारण वास्तविक कंपनियों को सालाना करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है। साथ ही, सरकार को मिलने वाले जीएसटी (GST) की भी भारी चोरी की जाती है क्योंकि यह सारा कारोबार ‘कच्चे पर्चों’ और नकद में होता था।
पुलिस की बड़ी बरामदगी और जांच का दायरा
उत्तम नगर के गोदाम और अन्य ठिकानों से पुलिस ने निम्नलिखित सामग्री बरामद की है:
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हजारों की संख्या में विभिन्न कंपनियों के नकली रैपर और खाली डब्बे।
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भारी मात्रा में तैयार मिलावटी घी और मसाले।
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पैकेजिंग और सीलिंग मशीनें।
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नकली होलोग्राम बनाने वाली प्लेट्स।
डीसीपी विक्रम सिंह ने बताया कि इन आरोपियों के मोबाइल फोन और डायरियों से कई रिटेल दुकानदारों और थोक विक्रेताओं के नाम सामने आए हैं। पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जहाँ ये सामान सप्लाई किया जाता था। संभावना है कि आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में बड़ी छापेमारी हो सकती है।
उपभोक्ताओं के लिए ‘अलर्ट’: असली और नकली की पहचान कैसे करें?
इस भंडाफोड़ के बाद दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसी भी उत्पाद को खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें:
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बारकोड और क्यूआर कोड: असली कंपनियों के बारकोड को स्कैन करने पर उत्पाद की पूरी जानकारी मिलती है। नकली उत्पादों के कोड अक्सर काम नहीं करते।
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पैकेजिंग की गुणवत्ता: असली ब्रांड की पैकेजिंग की फिनिशिंग और स्पेलिंग चेक करें। अक्सर नकली सामान पर छोटे-मोटे स्पेलिंग एरर (जैसे ‘Colgate’ की जगह ‘Colgat’) होते हैं।
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कीमत का अंतर: अगर कोई नामी ब्रांड का सामान एमआरपी से बहुत ज्यादा छूट पर मिल रहा है, तो सावधान हो जाएं।
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अधिकृत विक्रेता: हमेशा विश्वसनीय और अधिकृत दुकानों से ही सामान खरीदें।
सख्त कार्रवाई की जरूरत
दिल्ली-एनसीआर में इस तरह के रैकेट का फलना-फूलना सुरक्षा तंत्र के लिए एक चुनौती है। हालांकि क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई से अपराधियों में डर पैदा होगा, लेकिन जरूरत है कि कॉपीराइट और मिलावटखोरी के कानूनों को और सख्त बनाया जाए ताकि ऐसे अपराधियों को कड़ी सजा मिल सके।
नए साल की पूर्व संध्या पर दिल्ली पुलिस का यह सफल ऑपरेशन राजधानी के नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है। अब पुलिस की नजर उन ‘बड़ी मछलियों’ पर है जो पर्दे के पीछे रहकर इस पूरे काले कारोबार को फाइनेंस कर रही थीं।
डेटा बॉक्स: दिल्ली में मिलावटखोरी के खिलाफ कार्रवाई (2025)
| श्रेणी | कुल मामले | गिरफ्तारियां |
| नकली खाद्य उत्पाद | 45+ | 120 |
| नकली प्रसाधन सामग्री | 30+ | 85 |
| नकली ऑटो पार्ट्स | 15+ | 40 |



