उत्तर प्रदेश: स्मार्ट प्रीपेड मीटर और ट्रांसफार्मर में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई, कई अधिकारियों पर गिरी गाज

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर और ट्रांसफार्मर लगाने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कई अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जबकि कुछ को एडवर्स एंट्री देकर चेतावनी दी गई है।
शक्ति भवन में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान डॉ. गोयल ने डिस्कॉम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। बैठक में प्रबंध निदेशक पंकज कुमार सहित विभिन्न विद्युत वितरण कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। इस दौरान उन्होंने साफ कहा कि उपभोक्ताओं की शिकायतों को नजरअंदाज करना किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सबसे ज्यादा नाराजगी स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों के लंबित रहने पर जताई गई। केस्को (कानपुर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी) के निदेशक (वाणिज्य) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा मिर्जापुर के अधीक्षण अभियंता और अधिशाषी अभियंता को भी एडवर्स एंट्री दी गई है। बलिया के अधीक्षण अभियंता और चौबेपुर के अधिशासी अभियंता को ट्रांसफार्मर खराब होने के मामलों में लापरवाही के चलते प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है।
डॉ. गोयल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का निस्तारण उसी दिन किया जाए, खासकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर से जुड़ी समस्याओं का। उन्होंने कहा कि 1912 हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल हल किया जाए। यदि कोई उपभोक्ता गलत बिल की शिकायत करता है, तो उसे तुरंत सुधारना अनिवार्य होगा।
गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि किसी भी क्षेत्र में अनावश्यक बिजली कटौती न हो और निर्धारित शेड्यूल के अनुसार निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए लाइनों और ट्रांसफार्मरों के नियमित मेंटिनेंस पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
इसके साथ ही, काटे गए प्रीपेड कनेक्शनों को अभियान चलाकर दोबारा चालू कराने का निर्देश दिया गया है। सभी कर्मचारियों को फील्ड में जाकर कार्य करने और प्रतिदिन मॉनिटरिंग करने के लिए कहा गया है। सोलर नेट मीटरिंग से संबंधित लंबित मामलों की सूची बनाकर 15 दिनों के भीतर सभी समस्याओं के समाधान के निर्देश भी दिए गए हैं।
अध्यक्ष ने यह भी कहा कि बिजली विभाग की छवि उपभोक्ता संतुष्टि से ही बनती है। यदि शिकायतों का समय पर समाधान नहीं होगा तो जनता में असंतोष बढ़ेगा, जिसका सीधा असर विभाग की कार्यप्रणाली पर पड़ेगा। इसलिए हर स्तर पर जवाबदेही तय की जा रही है और लापरवाही करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
इस सख्ती से साफ संकेत मिल रहे हैं कि सरकार बिजली व्यवस्था को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। आने वाले समय में उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने के लिए विभाग और अधिक सक्रिय नजर आएगा।



