
मिडिल ईस्ट में करीब 40 दिनों से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर के ऐलान ने वैश्विक बाजारों में राहत की लहर दौड़ा दी है। इस सकारात्मक माहौल का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला, जहां बुधवार को बाजार खुलते ही जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। निवेशकों के बीच उत्साह इतना अधिक रहा कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने प्री-ओपन सेशन में ही मजबूत शुरुआत के संकेत दे दिए थे।
बाजार खुलने के बाद शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 2600 अंकों से अधिक की छलांग लगाकर 77,000 के पार पहुंच गया। वहीं, निफ्टी भी करीब 800 अंकों की तेजी के साथ 23,900 के स्तर को पार करता नजर आया। सुबह 9:20 बजे के आसपास सेंसेक्स 2,686 अंकों की तेजी के साथ 77,313 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 23,921 के स्तर पर ट्रेड करता दिखा। यह उछाल दर्शाता है कि निवेशकों ने सीजफायर को एक बड़े सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है।
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अस्थायी युद्धविराम है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दो सप्ताह के लिए हमले रोकने के ऐलान ने बाजार में स्थिरता की उम्मीद बढ़ा दी है। इसके साथ ही होर्मूज जलडमरूमध्य के खुलने की खबर ने भी निवेशकों के भरोसे को मजबूती दी है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, और इसके खुलने से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता कम हुई है।
तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट भी बाजार के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। खबरों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में करीब 13 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई, जबकि WTI क्रूड भी 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड करता दिखा। तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा भारत जैसे आयातक देशों को मिलता है, जिससे महंगाई पर दबाव कम होता है और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
गिफ्ट निफ्टी में भी सुबह 8 बजे के आसपास करीब 3 फीसदी या 700 अंकों से अधिक की तेजी देखने को मिली, जिसने भारतीय बाजार के लिए मजबूत शुरुआत के संकेत दिए थे। एशियाई बाजारों में भी इसी तरह का सकारात्मक रुख देखने को मिला, जो इस बात का संकेत है कि सीजफायर का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक राहत की स्थिति है।
रुपये में भी मजबूती देखने को मिली है। शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 50 पैसे मजबूत होकर 92.56 के स्तर पर पहुंच गया। यह मजबूती विदेशी निवेशकों के बढ़ते भरोसे और तेल की कीमतों में गिरावट का परिणाम मानी जा रही है। जब तेल सस्ता होता है, तो भारत का आयात बिल कम होता है, जिससे रुपये को सपोर्ट मिलता है।
इसके अलावा, निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति बैठक के फैसलों पर भी बनी हुई है। बाजार को उम्मीद है कि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। स्थिर ब्याज दरों की उम्मीद भी बाजार में सकारात्मक माहौल बनाने में मदद कर रही है। अगर RBI दरों में बदलाव नहीं करता, तो यह संकेत होगा कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर ध्यान दे रहा है, जो निवेशकों के लिए एक अच्छा संकेत है।
अमेरिकी शेयर बाजार में इस खबर का मिला-जुला असर देखने को मिला। जहां कुछ सेक्टर्स में तेजी आई, वहीं कुछ में हल्की गिरावट भी दर्ज की गई। हालांकि, कुल मिलाकर वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता कम होने के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह सीजफायर आगे चलकर स्थायी शांति समझौते में बदलता है, तो वैश्विक बाजारों में और मजबूती देखने को मिल सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस तेजी के पीछे शॉर्ट कवरिंग भी एक बड़ा कारण हो सकता है। पिछले कुछ हफ्तों से बाजार में गिरावट का माहौल था, जिसके चलते कई निवेशकों ने शॉर्ट पोजिशन ले रखी थी। जैसे ही सकारात्मक खबर आई, उन्होंने तेजी से अपनी पोजिशन कवर की, जिससे बाजार में और तेजी आ गई।
कुल मिलाकर, आज का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद सकारात्मक रहा। सीजफायर, तेल की कीमतों में गिरावट, रुपये की मजबूती और RBI की नीति को लेकर उम्मीदों ने मिलकर बाजार को नई ऊर्जा दी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह तेजी बरकरार रहती है या बाजार में फिर से उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। फिलहाल, निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान है और बाजार में हरियाली छाई हुई है।



