नई दिल्ली। दलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबलों का इतिहास कई शानदार और यादगार बल्लेबाजी प्रदर्शनों से भरा हुआ है। इस प्रतिष्ठित घरेलू टूर्नामेंट के खिताबी मुकाबलों में कई सलामी बल्लेबाजों ने ऐसी पारियां खेली हैं, जिन्हें आज भी क्रिकेट प्रशंसक याद करते हैं। दलीप ट्रॉफी फाइनल में किसी ओपनर द्वारा बनाए गए सबसे बड़े स्कोर की बात करें तो रमन लांबा का नाम सबसे ऊपर आता है। उन्होंने 1987 के फाइनल में नॉर्थ जोन की ओर से खेलते हुए वेस्ट जोन के खिलाफ 320 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी। उनका यह तिहरा शतक आज भी फाइनल में किसी सलामी बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है।
दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी से भी बड़ी पारी की उम्मीद थी। ईस्ट जोन की ओर से ओपनिंग करने उतरे वैभव ने पहली पारी में आक्रामक अंदाज जरूर दिखाया, लेकिन दूसरी पारी में उनका बल्ला ज्यादा देर नहीं चला। पहली पारी में उन्होंने 37 गेंदों पर 44 रन बनाए। उनकी पारी में 5 चौके और 1 छक्का शामिल रहा। उन्होंने मोहम्मद सिराज की गेंद पर छक्का लगाकर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी की झलक दिखाई।
हालांकि दूसरी पारी में वैभव सूर्यवंशी केवल 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। ऐसे में जिस बड़ी पारी की उम्मीद उनसे की जा रही थी, वह पूरी नहीं हो सकी। फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में पहली पारी के बाद उनसे दूसरी पारी में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन वह अपनी टीम के लिए बड़ी पारी नहीं खेल पाए।
रमन लांबा का 320 रन का रिकॉर्ड अब भी कायम
दलीप ट्रॉफी फाइनल में ओपनर के तौर पर सबसे बड़ी पारी खेलने का रिकॉर्ड रमन लांबा के नाम है। 1987 में नॉर्थ जोन और वेस्ट जोन के बीच खेले गए फाइनल में लांबा ने 320 रन की अविश्वसनीय पारी खेली थी। उनकी इस पारी की खासियत यह थी कि उन्होंने सिर्फ शतक या दोहरा शतक नहीं लगाया, बल्कि तिहरा शतक जड़कर फाइनल के इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई।
आज भी दलीप ट्रॉफी के फाइनल में किसी सलामी बल्लेबाज का 300 से ज्यादा रन बनाना एक दुर्लभ उपलब्धि है। लांबा की 320 रन की पारी इस सूची में नंबर-1 पर बनी हुई है और उनके आसपास भी पहुंचना किसी बल्लेबाज के लिए बड़ी चुनौती है।
यशस्वी जायसवाल की 265 रन की तूफानी पारी
इस सूची में दूसरा स्थान युवा भारतीय बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल का है। उन्होंने 2022 के दलीप ट्रॉफी फाइनल में वेस्ट जोन की ओर से खेलते हुए साउथ जोन के खिलाफ 265 रन की शानदार पारी खेली थी। जायसवाल ने अपनी बल्लेबाजी से विपक्षी गेंदबाजों पर जबरदस्त दबाव बनाया और उनकी यह पारी टीम की खिताबी जीत की नींव रखने वाली पारियों में शामिल रही।
265 रन का स्कोर यह बताता है कि दलीप ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट के फाइनल में भी युवा बल्लेबाज किस तरह दबाव के बीच लंबी और प्रभावशाली पारी खेल सकते हैं। जायसवाल की इस पारी ने उन्हें दलीप ट्रॉफी के फाइनल इतिहास में सबसे सफल ओपनरों की सूची में शामिल कर दिया।
अंशुमान गायकवाड़ भी सूची में शामिल
तीसरे नंबर पर अंशुमान गायकवाड़ का नाम आता है। 1987 के उसी यादगार फाइनल मुकाबले में वेस्ट जोन के लिए ओपनिंग करते हुए गायकवाड़ ने 216 रन की शानदार पारी खेली थी। एक ही फाइनल में 320 और 216 रन की दो बड़ी पारियों का सामने आना दलीप ट्रॉफी के इतिहास में उस मुकाबले की खासियत को दर्शाता है।
गायकवाड़ की 216 रन की पारी को भी दलीप ट्रॉफी फाइनल की बेहतरीन सलामी पारियों में गिना जाता है। इस सूची में उनका तीसरे स्थान पर होना बताता है कि फाइनल में बड़ी पारी खेलने वाले ओपनरों की सूची में पुराने दौर के बल्लेबाजों का कितना दबदबा रहा है।
दलीप ट्रॉफी 2026 में वैभव का शानदार सफर
फाइनल में भले ही वैभव सूर्यवंशी उम्मीद के मुताबिक बड़ी पारी नहीं खेल सके, लेकिन पूरे दलीप ट्रॉफी 2026 में उनका प्रदर्शन शानदार रहा। युवा बल्लेबाज ने नॉकआउट मुकाबलों की आठ पारियों में कुल 706 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से एक शतक और पांच अर्धशतक निकले।
आठ पारियों में 706 रन बनाना किसी भी बल्लेबाज के लिए बड़ी उपलब्धि है। खासकर एक युवा खिलाड़ी के लिए यह प्रदर्शन बताता है कि वैभव में लंबी पारी खेलने और लगातार रन बनाने की क्षमता मौजूद है। फाइनल में उनका प्रदर्शन भले ही उनके टूर्नामेंट के शानदार सफर के अनुरूप नहीं रहा, लेकिन नॉकआउट चरण में लगातार रन बनाकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का मजबूत परिचय दिया।
फाइनल में बड़ी पारी का अलग ही महत्व
दलीप ट्रॉफी का फाइनल घरेलू क्रिकेट के सबसे महत्वपूर्ण मुकाबलों में से एक माना जाता है। ऐसे मुकाबलों में बल्लेबाजों पर प्रदर्शन का दबाव भी अधिक होता है। यही वजह है कि फाइनल में बनाए गए बड़े स्कोर का महत्व और बढ़ जाता है। रमन लांबा, यशस्वी जायसवाल और अंशुमान गायकवाड़ की पारियां इसी दबाव के बीच आईं और उन्होंने इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया।
फिलहाल फाइनल में ओपनर द्वारा सबसे ज्यादा रन बनाने वालों की सूची में रमन लांबा 320 रन के साथ पहले स्थान पर हैं। यशस्वी जायसवाल 265 रन के साथ दूसरे और अंशुमान गायकवाड़ 216 रन के साथ तीसरे स्थान पर हैं। वैभव सूर्यवंशी इस सूची में शामिल होने से चूक गए, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में 706 रन बनाकर उन्होंने यह जरूर दिखा दिया कि आने वाले समय में उनके पास बड़े रिकॉर्ड बनाने की पूरी क्षमता है।
युवा वैभव के लिए दलीप ट्रॉफी 2026 का सफर भले ही फाइनल में अपेक्षा के अनुसार समाप्त नहीं हुआ, लेकिन नॉकआउट चरण में उनका प्रदर्शन उनके करियर के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है। अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें इस युवा बल्लेबाज के आगामी मुकाबलों पर रहेंगी, जहां उनसे इसी निरंतरता को बरकरार रखते हुए और भी बड़ी पारियों की उम्मीद की जाएगी।
