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बनभूलपुरा अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, 17 सितंबर पर टिकी नजरें; भारी पुलिस बल के बीच बढ़ा इंतजार

The Hill India News
Last updated: September 9, 2026 11:39 am
The Hill India News
Published: September 9, 2026
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नई दिल्ली/हल्द्वानी। हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे भूमि पर कथित अतिक्रमण से जुड़े बहुचर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई है। इस मामले को लेकर आज अदालत में सुनवाई प्रस्तावित थी, जिस पर बड़ी संख्या में लोगों की नजरें टिकी हुई थीं। मामले का सीधा असर क्षेत्र के हजारों प्रभावित परिवारों पर पड़ सकता है। सुनवाई टलने के बाद अब इस मामले के 17 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में लिस्ट होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम तारीख और सुनवाई को लेकर अदालत की सूची का इंतजार रहेगा।

Contents
सुनवाई से पहले बनभूलपुरा में हाई अलर्टएसएसपी ने खुद संभाली सुरक्षा की कमानहजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा है मामलामुख्यमंत्री धामी ने सपा-कांग्रेस पर साधा निशानाअब 17 सितंबर पर टिकी नजरें

सुनवाई टलने से जहां प्रभावित पक्षों को फिलहाल कुछ और समय मिल गया है, वहीं मामले में अंतिम दिशा को लेकर इंतजार भी बढ़ गया है। दूसरी ओर, सुनवाई से पहले बनभूलपुरा में नैनीताल पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया था। क्षेत्र के संवेदनशील इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी और अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष निर्देश दिए गए थे।

सुनवाई से पहले बनभूलपुरा में हाई अलर्ट

सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई की संभावना को देखते हुए नैनीताल पुलिस पहले से ही अलर्ट मोड पर थी। बनभूलपुरा क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस अधिकारियों और जवानों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया था, ताकि किसी भी परिस्थिति में कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।

एसपी क्राइम डॉ. जगदीश चंद्र की अध्यक्षता में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। पुलिस की ओर से क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था भी की गई थी। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली गतिविधियों और सूचनाओं पर भी नजर रखी जा रही थी।

पुलिस ने लोगों से शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की थी। साथ ही क्षेत्र की छतों पर पत्थर, ईंट या किसी भी तरह का मलबा जमा करने को लेकर भी चेतावनी जारी की गई थी। पुलिस का कहना था कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले प्रयास के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एसएसपी ने खुद संभाली सुरक्षा की कमान

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को देखते हुए नैनीताल के एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी के नेतृत्व में पुलिस पूरी स्थिति पर नजर रख रही थी। अधिकारियों ने क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और संवेदनशील स्थानों पर तैनात पुलिसकर्मियों को आवश्यक निर्देश दिए।

पुलिस की तैयारियों से साफ था कि प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पहले से पूरी तरह तैयार था। हालांकि अब सुनवाई टल जाने के बाद पुलिस और प्रशासन ने फिलहाल राहत की सांस ली है। इसके बावजूद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क बना हुआ है।

हजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा है मामला

बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण का विवाद लंबे समय से न्यायालय में चल रहा है। इस मामले में हजारों परिवारों का भविष्य जुड़ा हुआ है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट की प्रत्येक सुनवाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर प्रशासन की ओर से भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। मार्च महीने से पुनर्वास संबंधी तैयारियों में तेजी आने की बात कही गई है। प्रशासन की ओर से करीब 30 हेक्टेयर भूमि पर 4,300 से अधिक प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ देने की तैयारी की जा रही है।

इसी दिशा में जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से क्षेत्र में कैंप लगाने की योजना भी बनाई गई है। इन कैंपों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को पुनर्वास और सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी तथा आवश्यक प्रक्रिया में सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी है।

मुख्यमंत्री धामी ने सपा-कांग्रेस पर साधा निशाना

वहीं, इस मामले को लेकर उत्तराखंड की राजनीति भी गरमा गई है। हल्द्वानी में भाजपा की प्रदेश विस्तारित कार्यसमिति में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बनभूलपुरा में रेलवे भूमि पर हुए कथित अतिक्रमण को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधा।

मुख्यमंत्री धामी ने आरोप लगाया कि इन दोनों दलों ने अपने वोट बैंक की राजनीति के लिए अतिक्रमण को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए लंबे समय तक ऐसे मामलों को नजरअंदाज किया गया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।

हालांकि, मुख्यमंत्री के आरोपों पर विपक्ष की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। बनभूलपुरा अतिक्रमण मामले को लेकर राजनीतिक दल पहले भी एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई से पहले एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।

अब 17 सितंबर पर टिकी नजरें

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में आज प्रस्तावित सुनवाई टल गई है और अब संभावित रूप से 17 सितंबर को मामले की सुनवाई सूचीबद्ध होने की चर्चा है। अंतिम स्थिति अदालत की सूची से स्पष्ट होगी। इस बीच प्रभावित परिवारों, प्रशासन और राजनीतिक दलों की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

एक तरफ हजारों परिवार अपने भविष्य और पुनर्वास को लेकर अदालत के रुख का इंतजार कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन कानून-व्यवस्था और पुनर्वास की तैयारियों को लेकर सक्रिय है। पुलिस भी संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

सुनवाई टलने से फिलहाल बनभूलपुरा में तत्काल तनाव की आशंका कम हुई है, लेकिन मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में पुलिस और प्रशासन की तैयारियों के साथ-साथ पुनर्वास की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी। वहीं सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में मामले को लेकर क्या दिशा सामने आती है, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी। 17 सितंबर को होने वाली संभावित सुनवाई अब बनभूलपुरा के हजारों प्रभावित परिवारों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

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