सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन समारदुंग सुरंग में हुआ भीषण हादसा पूरे देश को झकझोर देने वाला साबित हुआ है। सोमवार दोपहर अचानक हुए भूस्खलन (लैंडस्लाइड) ने सुरंग का प्रवेश मार्ग बंद कर दिया, जिससे अंदर काम कर रहे कई मजदूर फंस गए। हादसे के कुछ ही समय बाद सुरंग के भीतर मीथेन गैस का रिसाव शुरू हो गया, जिसने राहत और बचाव अभियान को बेहद कठिन और जोखिमभरा बना दिया। अब तक 8 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 12 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। आशंका जताई जा रही है कि अभी भी कई मजदूर सुरंग के भीतर फंसे हो सकते हैं। हालांकि उनकी संख्या को लेकर प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।
यह दुर्घटना सोमवार दोपहर लगभग 3 बजकर 9 मिनट पर उस समय हुई, जब तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना के तहत निर्माणाधीन समारदुंग सुरंग में मजदूर नियमित कार्य कर रहे थे। अचानक हुए भूस्खलन से सुरंग का मुख्य रास्ता पूरी तरह बंद हो गया और अंदर मौजूद मजदूर बाहर निकलने का रास्ता नहीं ढूंढ़ सके। इसके बाद मीथेन गैस का रिसाव शुरू होने से हालात और भी गंभीर हो गए। गैस की अधिक मात्रा के कारण सुरंग के भीतर ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित हुआ, जिससे मजदूरों और बचावकर्मियों दोनों के लिए अंदर जाना बेहद खतरनाक हो गया।
घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू कराया। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), सिक्किम पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की कई टीमें मौके पर पहुंचीं। शुरुआती प्रयासों में अग्निशमन विभाग और पुलिसकर्मियों ने बिना विशेष गैस सुरक्षा उपकरणों के सुरंग के भीतर प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। बाद में विशेष सुरक्षा उपकरणों से लैस एनडीआरएफ की टीमों ने अभियान को आगे बढ़ाया।
बचाव अभियान के दौरान कई रेस्क्यू कर्मियों की तबीयत भी बिगड़ गई। सुरंग के भीतर जहरीली गैस की मौजूदगी के कारण कुछ जवान चक्कर खाकर बेहोश हो गए, जिन्हें तुरंत बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बावजूद राहत दल लगातार जोखिम उठाकर अंदर फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। खराब मौसम और लगातार हो रही बारिश ने भी राहत कार्य को प्रभावित किया है, जिससे मशीनों और भारी उपकरणों के संचालन में कठिनाई आ रही है।
जिला प्रशासन के अनुसार अब तक 12 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। वहीं 8 मजदूरों के शव बरामद किए गए हैं। मृतकों के शवों को सिंगतम जिला अस्पताल, एसटीएनएम अस्पताल गंगटोक तथा नामची जिला अस्पताल भेजा गया है, जहां उनकी पहचान और अन्य कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि सुरंग के भीतर फंसे अन्य मजदूरों तक जल्द से जल्द पहुंचने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे से ठीक पहले सुरंग के भीतर तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी थी। आवाज सुनते ही कुछ मजदूर तुरंत बाहर की ओर भागने में सफल रहे, लेकिन कई मजदूर अंदर ही फंस गए। हालांकि प्रशासन ने अभी तक इस विस्फोट जैसी आवाज के वास्तविक कारण की पुष्टि नहीं की है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूस्खलन, गैस का दबाव या चट्टानों के टूटने से ऐसी आवाज उत्पन्न हो सकती है। हादसे के वास्तविक कारणों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
यह सुरंग NHPC की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका निर्माण पटेल इंजीनियरिंग कंपनी द्वारा कराया जा रहा है। यह परियोजना सिक्किम की प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल है, लेकिन इस हादसे ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सुरंग निर्माण के दौरान गैस रिसाव, भूस्खलन और वेंटिलेशन जैसी संभावित चुनौतियों के लिए पहले से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था और आधुनिक निगरानी प्रणाली होना बेहद आवश्यक है।
सिक्किम के मुख्यमंत्री लगातार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत एवं बचाव कार्य में किसी भी प्रकार की कमी न रहने पाए और सभी आवश्यक संसाधनों का तत्काल उपयोग किया जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया है कि प्रभावित मजदूरों और उनके परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही हादसे की विस्तृत जांच कर जिम्मेदारियों का भी निर्धारण किया जाएगा।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA) भी पूरे अभियान की लगातार निगरानी कर रहा है। विशेषज्ञ टीमों को सुरंग के भीतर गैस के स्तर की लगातार जांच करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बचावकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। गैस की मात्रा कम होने के बाद ही सुरंग के अंदर गहराई तक पहुंचना संभव हो पाएगा।
इस हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में चल रही बड़ी निर्माण परियोजनाओं के दौरान सुरक्षा उपायों में किसी भी प्रकार की लापरवाही भारी पड़ सकती है। फिलहाल पूरे देश की नजरें सिक्किम के इस रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं। राहत दल समय के साथ संघर्ष करते हुए सुरंग में फंसे बाकी मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। हर गुजरते घंटे के साथ उम्मीद और चिंता दोनों बढ़ती जा रही हैं। देशभर के लोग फंसे मजदूरों के सुरक्षित बाहर आने की प्रार्थना कर रहे हैं, जबकि प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि अंतिम व्यक्ति को सुरक्षित निकालने तक बचाव अभियान लगातार जारी रहेगा।
