देहरादून। उत्तराखंड में पर्यटन और स्वरोजगार से जुड़ी होम-स्टे योजना एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। देहरादून में होम-स्टे पंजीकरण के नाम पर कथित रूप से दो लाख रुपये की रिश्वत मांगने का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ने जिला पर्यटन अधिकारी और पर्यटन विभाग के एक कर्मचारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
पार्टी के अनुसार, देहरादून के मालसी निवासी मोहम्मद रईस ने “किंग क्वीन” नाम से होम-स्टे पंजीकरण कराने के लिए विभाग द्वारा निर्धारित सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली थीं। इसके बावजूद उनका पंजीकरण लंबे समय तक लंबित रखा गया। आरोप है कि इसी दौरान उनसे पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले दो लाख रुपये की रिश्वत की मांग की गई।
राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ने इस पूरे मामले को सार्वजनिक करते हुए देहरादून में एक प्रेस वार्ता आयोजित की। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि जिला पर्यटन अधिकारी बृजेंद्र पांडे और पर्यटन विभाग के कर्मचारी फिरोज़ ख़ान ने कथित रूप से रिश्वत की मांग की। पार्टी ने दावा किया कि इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर भी दर्ज कराई गई है, जिसकी शिकायत संख्या CMHL-062026-2-1057857 बताई गई है।
पार्टी का कहना है कि मोहम्मद रईस को पहले यह बताया गया कि उनके होम-स्टे के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई है और मामला निपटाने के लिए “ऊपर तक” अधिकारियों को पैसा देना पड़ता है। आरोप है कि रिश्वत की राशि मोबाइल फोन के कैलकुलेटर पर दो लाख रुपये लिखकर दिखाई गई। इसके बाद विभाग के कर्मचारी फिरोज़ ख़ान कथित तौर पर निरीक्षण के नाम पर उनके आवास पहुंचे और रिश्वत की मांग दोहराई।
राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी का दावा है कि पीड़ित ने मजबूरी में अलग-अलग किश्तों में कुल लगभग एक लाख नब्बे हजार रुपये दिए। आरोप यह भी है कि शेष दस हजार रुपये देने के लिए भी लगातार दबाव बनाया जाता रहा। पार्टी के अनुसार, पूरी राशि मिलने के बाद ही मोहम्मद रईस को होम-स्टे से संबंधित रजिस्टर और पंजीकरण दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
मोहम्मद रईस ने यह भी आरोप लगाया है कि जब उन्होंने अपनी दी गई राशि वापस मांगने की कोशिश की तो उन्हें धमकियां दी गईं। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम से जुड़े वीडियो और ऑडियो साक्ष्य उनके पास सुरक्षित हैं। उन्होंने दावा किया कि आवश्यकता पड़ने पर ये सभी साक्ष्य जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
प्रेस वार्ता के दौरान राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रसाद सेमवाल ने कहा कि यदि किसी सामान्य नागरिक को अपना वैध कार्य कराने के लिए लाखों रुपये की रिश्वत देने के लिए मजबूर होना पड़े तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यदि पीड़ित के पास वास्तव में वीडियो और ऑडियो साक्ष्य मौजूद हैं, तो सरकार को तत्काल स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उनकी आय से अधिक संपत्ति की भी जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना था कि भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता और दोषियों को कानून के अनुसार दंड मिलना चाहिए।
वहीं राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल ने कहा कि उत्तराखंड सरकार लगातार पर्यटन और होम-स्टे योजनाओं को स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बताती रही है। ऐसे में यदि विभागीय स्तर पर भ्रष्टाचार या आर्थिक शोषण जैसी शिकायतें सामने आती हैं तो इससे न केवल सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि आम लोगों का सरकार पर विश्वास भी कमजोर होता है। उन्होंने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और पीड़ित को न्याय दिलाने की मांग की।
पीड़ित मोहम्मद रईस ने भी प्रेस वार्ता में अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्होंने सभी नियमों का पालन करते हुए होम-स्टे पंजीकरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े। उनका आरोप है कि पंजीकरण कराने के बदले उनसे दो लाख रुपये मांगे गए और परिस्थितियों के दबाव में उन्हें लगभग एक लाख नब्बे हजार रुपये अलग-अलग किश्तों में देने पड़े। उन्होंने दोहराया कि उनके पास पूरे घटनाक्रम के वीडियो और ऑडियो साक्ष्य मौजूद हैं और वह चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो ताकि भविष्य में किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।
राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं करती है तो पार्टी राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। पार्टी का कहना है कि वह इस मुद्दे को जनहित और भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान के रूप में उठाएगी।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में होम-स्टे योजना को पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यदि इस योजना से जुड़े अधिकारियों पर रिश्वतखोरी जैसे आरोप लगते हैं तो इससे योजना की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, फिलहाल ये सभी आरोप शिकायतकर्ता और राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी की ओर से लगाए गए हैं। संबंधित अधिकारियों या पर्यटन विभाग की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब इस पूरे प्रकरण पर सरकार, पर्यटन विभाग और जांच एजेंसियों की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि शिकायत में प्रस्तुत किए गए कथित वीडियो और ऑडियो साक्ष्यों की जांच होती है, तो उससे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं निष्पक्ष जांच के बाद ही यह तय हो पाएगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार हुआ है।
