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उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड में ‘वन नेशन-वन एजुकेशन’ मॉडल लागू, सीएम धामी ने किया अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का ऐतिहासिक शुभारंभ

The Hill India News
Last updated: July 1, 2026 1:58 pm
The Hill India News
Published: July 1, 2026
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देहरादून: समान नागरिक संहिता (UCC) को धरातल पर उतारने के बाद उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक और बेहद साहसिक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में दशकों से चले आ रहे पारंपरिक मदरसा बोर्ड को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर सूबे में ‘वन नेशन-वन एजुकेशन’ (एक देश-एक शिक्षा) की अवधारणा को साकार करने के लिए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (Uttarakhand Minority Education Authority) का औपचारिक शुभारंभ कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक भव्य और उच्च स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस नए शिक्षा मॉडल की नींव रखी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को नए नियमों के तहत मान्यता प्रमाण पत्र भी वितरित किए। इस फैसले को उत्तराखंड के शैक्षणिक ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा और युगांतकारी सुधार माना जा रहा है।

राजनीति नहीं, बच्चों का भविष्य प्राथमिकता: मुख्यमंत्री धामी

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का यह कदम किसी भी राजनीतिक नफा-नुकसान से प्रेरित नहीं है, बल्कि इसका सीधा सरोकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चों के सुनहरे भविष्य से है।

“यह केवल एक नई संस्था की शुरुआत नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के प्रत्येक बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने वाला ऐतिहासिक निर्णय है। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अल्पसंख्यक समाज का बच्चा भी मुख्यधारा की आधुनिक शिक्षा, तकनीक और वैश्विक कौशल से सशक्त हो सके।”

— पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि देवभूमि उत्तराखंड प्राचीन काल से ही ज्ञान, विज्ञान और आध्यात्म की समृद्ध विरासत का केंद्र रही है। ऐसे में पूरे देश के सामने शिक्षा का एक आदर्श और समावेशी मॉडल पेश करना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

आस्था और आधुनिकता का अनूठा संतुलन

अक्सर अल्पसंख्यक शिक्षा सुधारों को लेकर उठने वाली आशंकाओं पर विराम लगाते हुए मुख्यमंत्री ने साफ किया कि उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (Uttarakhand Minority Education Authority) की स्थापना का उद्देश्य किसी भी समुदाय की धार्मिक पहचान, संस्कृति या परंपराओं को ठेस पहुंचाना या उन्हें कमतर करना नहीं है।

सरकार का मूल विजन यह है कि अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चे अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों से मजबूती से जुड़े रहें, लेकिन साथ ही वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी अपनाएं। नई व्यवस्था के तहत इन शिक्षण संस्थानों में अब मजहबी और पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और डिजिटल तकनीक का समावेश अनिवार्य रूप से किया जाएगा।

एनईपी-2020 के अनुरूप ढांचा: एनसीईआरटी पुस्तकें अनिवार्य

यह नया मॉडल पूरी तरह से केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP) के सिद्धांतों पर आधारित है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने खुद अल्पसंख्यक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को एनसीईआरटी (NCERT) की पाठ्यपुस्तकें भेंट कीं।

नई व्यवस्था के तहत, अब अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में केवल डिग्रियों पर ध्यान केंद्रित नहीं किया जाएगा, बल्कि विद्यार्थियों में नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता (Entrepreneurship) और कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।

छह अधिसूचित समुदायों को मिलेंगे समान अवसर

पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों पर निशाना साधते हुए प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि पहले की व्यवस्थाओं में तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के कारण कुछ विशेष वर्गों को ही फायदा मिला, जबकि कई अन्य अल्पसंख्यक समुदाय शैक्षणिक रूप से पिछड़ गए।

नया कानून लागू होने के बाद राज्य के सभी छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों (मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी) के बच्चों को बिना किसी भेदभाव के समान शैक्षणिक अवसर और छात्रवृत्तियां मिल सकेंगी। यह प्राधिकरण अब केवल मान्यता देने वाली एक कागजी संस्था नहीं होगा, बल्कि यह शिक्षकों के आधुनिक प्रशिक्षण, पारदर्शी प्रबंधन और शिक्षण व्यवस्था की गुणवत्ता की निगरानी करने वाली सर्वोच्च नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।

श्रेष्ठ उत्तराखंड और विविधता में एकता का संकल्प

मुख्यमंत्री ने देश की ताकत उसकी विविधता में एकता को बताते हुए कहा कि अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के बावजूद भारतीयता की भावना हम सबको एक सूत्र में पिरोती है। उन्होंने राज्य के सभी धर्मगुरुओं, प्रबुद्ध नागरिकों, शिक्षाविदों और स्वयंसेवी संस्थाओं से अपील की कि वे बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उत्तराखंड को देश का सबसे अग्रणी और साक्षर राज्य बनाने के इस महाभियान में सरकार का कंधा से कंधा मिलाकर सहयोग करें।

समारोह में दिग्गजों की रही मौजूदगी

इस ऐतिहासिक सुधार के साक्षी बनने के लिए उत्तराखंड के कई वरिष्ठ राजनेता और नौकरशाह कार्यक्रम में मौजूद रहे। मंच पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक प्रदीप बत्रा, और विधायक उमेश शर्मा ‘काउ’ ने सरकार के इस कदम की सराहना की।

तकनीकी और प्रशासनिक अमले की तरफ से मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते और उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (Uttarakhand Minority Education Authority) के नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह उपस्थित रहे। इसके अलावा विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के शीर्ष धर्मगुरुओं, विख्यात शिक्षाविदों और प्रदेशभर के शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों ने शिरकत कर इस नई व्यवस्था का स्वागत किया।

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