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सड़क सुरक्षा: ‘ड्राइविंग एक कौशल है, लेकिन सुरक्षा एक आदत’, IIT गुवाहाटी में पद्मश्री डॉ. बी.के.एस. संजय का प्रेरक संबोधन

गुवाहाटी: सड़क दुर्घटनाएं आज के समय में एक मूक महामारी का रूप ले चुकी हैं, जिसका सबसे अधिक शिकार देश का युवा वर्ग हो रहा है। इसी गंभीर विषय पर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एम्स (AIIMS) गुवाहाटी के अध्यक्ष, सुप्रसिद्ध अस्थि रोग विशेषज्ञ एवं पद्म श्री प्रो. डॉ. बी. के. एस. संजय रहे।

28 जनवरी 2026 को आयोजित इस सत्र में डॉ. संजय ने छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए एक अत्यंत प्रभावशाली मंत्र दिया— “ड्राइविंग एक कौशल है, लेकिन सुरक्षा एक आदत है; आइए हम दोनों में दक्ष बनें।”

सड़क दुर्घटनाओं के बहुआयामी दुष्परिणाम: एक विशेषज्ञ की दृष्टि

अपने व्यापक चिकित्सकीय अनुभव को साझा करते हुए डॉ. बी.के.एस. संजय ने आंकड़ों और वास्तविक मामलों के जरिए सड़क दुर्घटनाओं की भयावहता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि एक हड्डी रोग विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने अनगिनत ऐसे मामले देखे हैं जहाँ क्षण भर की लापरवाही ने होनहार युवाओं के भविष्य को अंधकार में डाल दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटना केवल एक शारीरिक चोट नहीं है, बल्कि इसके दीर्घकालिक मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्परिणाम होते हैं। एक गंभीर दुर्घटना न केवल पीड़ित को अपंग बना सकती है, बल्कि पूरे परिवार को वित्तीय संकट और मानसिक अवसाद की गर्त में धकेल देती है।

सुरक्षा उपकरण: जीवन और मृत्यु के बीच की कड़ी

व्याख्यान के दौरान डॉ. संजय ने जिम्मेदार ड्राइविंग और यातायात नियमों के कड़े पालन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने वैज्ञानिक तथ्यों के साथ बताया कि कैसे हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे साधारण सुरक्षा उपाय किसी दुर्घटना के दौरान ‘लाइफ सेवर’ की भूमिका निभाते हैं।

  • हेलमेट की अनिवार्यता: दोपहिया वाहनों पर हेलमेट न केवल कानूनी बाध्यता है, बल्कि यह मस्तिष्क की गंभीर चोटों (Head Injuries) को 70% तक कम कर सकता है।

  • सीट बेल्ट का महत्व: चार पहिया वाहनों में सीट बेल्ट तेज झटके के दौरान शरीर को स्टयरिंग या डैशबोर्ड से टकराने से बचाती है।

  • नियमों का पालन: रेड लाइट जंप करना या गलत दिशा में वाहन चलाना ‘शॉर्टकट’ नहीं बल्कि मौत को सीधा निमंत्रण है।

संवादात्मक सत्र: युवाओं की भूमिका और नीतिगत बदलाव

कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण संवादात्मक चर्चा सत्र रहा। इसमें IIT गुवाहाटी के छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और दुर्घटना रोकथाम की रणनीतियों पर सवाल पूछे। चर्चा के दौरान डॉ. संजय ने कहा कि सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता केवल सरकारी विज्ञापनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बनना होगा।

छात्रों ने सड़क डिजाइन (Road Engineering), आपातकालीन चिकित्सा सहायता (Golden Hour) और सख्त नीतिगत पहलों पर भी अपने विचार साझा किए। डॉ. संजय ने युवाओं को ‘सड़क सुरक्षा का एंबेसडर’ बनने का आह्वान किया।

IIT निदेशक का संदेश: जीवनशैली में बदलाव की आवश्यकता

इस अवसर पर IIT गुवाहाटी के निदेशक प्रो. देवेंद्र जलिहाल ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने सड़क सुरक्षा को जीवनशैली से जोड़ते हुए छात्रों को एक स्वस्थ और अनुशासित जीवन जीने की सलाह दी। प्रो. जलिहाल ने विशेष रूप से छात्रों से जंक फूड त्यागकर पौष्टिक एवं संतुलित आहार अपनाने की अपील की।

उन्होंने कहा, “सड़क पर सुरक्षा आपकी सजगता पर निर्भर करती है और सजगता एक स्वस्थ शरीर और शांत मस्तिष्क से आती है। हमें अपनी जीवनशैली को नकारात्मकता से हटाकर सकारात्मक और रचनात्मक दिशा में मोड़ना होगा।”

संस्थान और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी

व्याख्यान का व्यावहारिक दृष्टिकोण इतना प्रभावशाली था कि उपस्थित शिक्षकों और कर्मचारियों ने भी इसे अत्यंत सराहनीय बताया। डॉ. संजय ने स्पष्ट किया कि सुरक्षित सड़क व्यवहार की संस्कृति विकसित करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों को एक मंच प्रदान करना चाहिए, जैसा IIT गुवाहाटी ने किया है।

अंत में, प्रो. डॉ. बी.के.एस. संजय ने निदेशक प्रो. देवेंद्र जलिहाल, प्रो. पंकज तिवारी, प्रो. अशोक कुमार मौर्य और अवेयरनेस क्लब के सभी सदस्यों का उनके शानदार समन्वय और आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त किया।

आपकी सुरक्षा आपके हाथ में

IIT गुवाहाटी में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक व्याख्यान नहीं, बल्कि जीवन बचाने का एक अभियान था। जैसा कि डॉ. संजय ने निष्कर्ष निकाला, “सड़क पर की गई छोटी-सी लापरवाही जीवनभर की अपंगता का कारण बन सकती है।” 2026 के इस दौर में, जहाँ गति ही जीवन का पर्याय बन गई है, वहाँ ‘संयम’ और ‘सुरक्षा’ ही हमारे सबसे अच्छे साथी हैं।

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