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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जाल में ऋषिकेश का बुजुर्ग: जज और इंस्पेक्टर बन हड़पे 69 लाख रुपये, उत्तराखंड STF ने रुद्रपुर में मार गिराया साइबर ठगों का किला
उत्तराखंडफीचर्ड

‘डिजिटल अरेस्ट’ के जाल में ऋषिकेश का बुजुर्ग: जज और इंस्पेक्टर बन हड़पे 69 लाख रुपये, उत्तराखंड STF ने रुद्रपुर में मार गिराया साइबर ठगों का किला

The Hill India News
Last updated: April 4, 2026 2:05 am
The Hill India News
Published: April 4, 2026
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सांकेतिक तस्वीर
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देहरादून/ऋषिकेश। उत्तराखंड में साइबर अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे आम आदमी के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों के मनोवैज्ञानिक डर का फायदा उठाकर उनकी जीवनभर की पूंजी पर हाथ साफ कर रहे हैं। ताजा मामला ऋषिकेश का है, जहाँ ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) के जरिए एक बुजुर्ग को शिकार बनाकर उनसे 69 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम ठग ली गई। हालांकि, इस मामले में उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की साइबर क्राइम यूनिट ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए गिरोह के एक सक्रिय सदस्य को रुद्रपुर से गिरफ्तार कर लिया है।

Contents
खौफ की वो व्हाट्सएप कॉल: कैसे बुना गया जाल?संपत्ति वेरिफिकेशन के नाम पर 69 लाख की चपतSTF की तफ्तीश और रुद्रपुर से गिरफ्तारीफर्जी रसीदें और डार्क वेब का कनेक्शनक्या होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’? एक्सपर्ट्स की राय

खौफ की वो व्हाट्सएप कॉल: कैसे बुना गया जाल?

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक अनजान व्हाट्सएप कॉल से हुई। ठगों ने पीड़ित बुजुर्ग को अपना परिचय दिल्ली के ‘दरियागंज पुलिस स्टेशन’ के इंस्पेक्टर के रूप में दिया। अपराधी इतने शातिर थे कि उन्होंने न केवल पुलिस अधिकारी, बल्कि खुद को न्यायालय का न्यायाधीश (Judge) बताकर भी पीड़ित से बात की।

अपराधियों ने बुजुर्ग को डराया कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग कर एक अवैध सिम कार्ड लिया गया है, जिसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तीय लेनदेन में हुआ है। पीड़ित को विश्वास दिलाने के लिए ठगों ने फर्जी वारंट और अदालती दस्तावेज भी दिखाए। उत्तराखंड डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी के इस मामले में पीड़ित को फोन पर ही वीडियो कॉल के जरिए घंटों तक एक कमरे में रहने को मजबूर किया गया, जिसे तकनीकी भाषा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है।

संपत्ति वेरिफिकेशन के नाम पर 69 लाख की चपत

बुजुर्ग को इस कदर भयभीत कर दिया गया कि उन्हें लगा कि वे जेल जाने वाले हैं। ठगों ने उन्हें ‘सम्मानजनक’ रास्ता दिखाते हुए कहा कि यदि वे अपनी संपत्ति का वेरिफिकेशन करवाते हैं और जमानत राशि व एनओसी (NOC) के लिए सरकारी फीस जमा करते हैं, तो उन्हें इस केस से बरी किया जा सकता है।

घबराहट में पीड़ित ने ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में टुकड़ों में कुल 69 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब पैसे खत्म हो गए और ठगों की मांग बढ़ती रही, तब जाकर बुजुर्ग को ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने तुरंत देहरादून स्थित साइबर क्राइम थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई।

STF की तफ्तीश और रुद्रपुर से गिरफ्तारी

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के निर्देश पर गठित टीम ने जब तकनीकी जांच और बैंक खातों के ट्रेल को खंगाला, तो इसके तार उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर से जुड़े पाए गए। जांच में सामने आया कि आरोपी भगवत सरन ने अपने साथियों के साथ मिलकर लालकुआं (नैनीताल) स्थित एक बैंक में ‘टेलीकॉम दुकान’ के नाम पर फर्जी तरीके से खाता खोला था।

एसटीएफ की साइबर टीम ने दबिश देकर भगवत सरन को रुद्रपुर से गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि जिस खाते का इस्तेमाल इस ठगी के लिए किया गया था, उस पर नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर पहले से ही 30 शिकायतें दर्ज थीं। यानी यह आरोपी देशभर के लोगों को अपना निशाना बना रहा था। ऋषिकेश के बुजुर्ग से लूटी गई राशि में से 6 लाख रुपये सीधे इसी आरोपी के खाते में क्रेडिट हुए थे।

फर्जी रसीदें और डार्क वेब का कनेक्शन

गिरफ्तार आरोपी के पास से पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं। पूछताछ में पता चला कि ये ठग न्यायालय के फर्जी जमानत पत्र और फीस जमा करने की रसीदें खुद ही तैयार करते थे, ताकि पीड़ित को सब कुछ असली लगे। एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि:

“साइबर अपराधी अब सीधे लोगों के मनोविज्ञान पर हमला कर रहे हैं। वे पुलिस और न्यायपालिका का नाम लेकर एक आभासी डर पैदा करते हैं। इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और हम डिजिटल साक्ष्यों के जरिए मुख्य सरगनाओं तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं।”

क्या होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’? एक्सपर्ट्स की राय

उत्तराखंड डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी जैसे मामले अब राज्य में पैर पसार रहे हैं। इसमें अपराधी पीड़ित को वीडियो कॉल (Skype या WhatsApp) पर बने रहने के लिए मजबूर करते हैं और उसे धमकाते हैं कि वह फोन नहीं काट सकता। वे खुद को सरकारी एजेंसी (CBI, ED या Police) का अधिकारी बताते हैं।

सावधानी ही बचाव है:

  • कोई भी पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती।

  • सरकारी एजेंसियां कभी भी व्हाट्सएप पर जमानत राशि या जुर्माना जमा करने की मांग नहीं करतीं।

  • यदि कोई आपको डराने की कोशिश करे, तो तुरंत अपने परिजनों को सूचित करें और 1930 पर कॉल करें।

फिलहाल, गिरफ्तार आरोपी भगवत सरन को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। एसटीएफ अब उन खातों की गहन जांच कर रही है, जहाँ बाकी की रकम भेजी गई है। पुलिस को संदेह है कि इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय स्तर पर जुड़े हो सकते हैं और आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।

प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर विश्वास न करें और अपनी निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। उत्तराखंड डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी के खिलाफ यह कार्रवाई अपराधियों के लिए एक सख्त संदेश है, लेकिन जनता की जागरूकता ही इस युद्ध में सबसे बड़ा हथियार है।

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