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“गरीब वादियों के लिए आधी रात तक अदालत लगाने को तैयार हूँ”: सुप्रीम कोर्ट के CJI सूर्यकांत की बड़ी टिप्पणी

“मैं यहां सबसे छोटे और सबसे गरीब पक्षकार के लिए हूं”—प्रधान न्यायाधीश का स्पष्ट संदेश

नई दिल्ली, 28 नवंबर: भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता गरीब वादियों के लिए न्याय सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वह गरीब और कमजोर वर्ग के पक्षकारों की सुनवाई के लिए आधी रात तक अदालत में बैठने को तैयार हैं।

सीजेआई यह टिप्पणी उस समय कर रहे थे, जब उन्होंने एक व्यक्ति तिलक सिंह डांगी द्वारा केंद्र सरकार और अन्य के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। इस सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची भी पीठ में शामिल थे।

“मेरा समय बर्बाद करने वाले केस नहीं”—CJI

सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने अदालत के समय का दुरुपयोग करने वाले मामलों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट कहा—

“मेरी अदालत में कोई भी अनावश्यक या न्यायालय का समय बर्बाद करने वाला मुकदमा नहीं है। ऐसे मामले अमीर वादी ही लड़ते हैं।”

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का काम ‘वास्तविक न्याय’ देना है, न कि अदालत के मंच का गलत उपयोग करने वालों को बढ़ावा देना।

सबसे कमजोर वर्ग के लिए समर्पण

प्रधान न्यायाधीश ने भावनात्मक शब्दों में अपनी भूमिका और प्रतिबद्धता बताते हुए कहा—

“मैं यहां सबसे छोटे, सबसे गरीब पक्षकार के लिए हूं। अगर जरूरत पड़ी तो मैं उनके लिए मध्य रात्रि तक यहां बैठूंगा।”

उनके इस बयान को न्यायपालिका की पहुंच, संवेदनशीलता और जनसरोकारों को प्राथमिकता देने की दिशा में एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

याचिका खारिज, पर संदेश बड़ा

जिस याचिका पर सुनवाई हो रही थी, उसे अदालत ने आधारहीन और अव्यावहारिक बताते हुए खारिज कर दिया। हालांकि, इस दौरान सीजेआई का जोर न्यायपालिका के मूल उद्देश्य पर था — आम, कमजोर और गरीब लोगों को न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करना।

प्रक्रिया का दुरुपयोग रोकने पर भी जोर

सीजेआई सूर्यकांत लंबे समय से ‘फिजूल मुकदमों’ के खिलाफ सख्त रुख अपनाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अदालत का कीमती समय उन लोगों का है जिन्हें वास्तव में न्याय की ज़रूरत है, और इसे “मनोरंजन या निजी एजेंडा” के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

देर रात सुनवाई की परंपरा

सुप्रीम कोर्ट में पहले भी कई मामलों में देर रात सुनवाई की गई है—

  • राजनीतिक संकटों पर तत्काल निर्णय
  • जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े मामले
  • फांसी की सजा के अंतिम क्षणों में दायर याचिकाएँ

सीजेआई सूर्यकांत का बयान इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह दर्शाता है कि गरीबों को न्याय उनकी प्राथमिकता के केंद्र में है।

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