देहरादून: उत्तराखंड में मानसून ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया है। पिछले 24 घंटे के दौरान हुई मूसलाधार बारिश ने पूरे प्रदेश में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। मौसम विभाग द्वारा जारी रेड अलर्ट के बीच कई जिलों में भूस्खलन, सड़क दुर्घटनाएं, बिजली गिरने, पेड़ गिरने और जलभराव जैसी घटनाओं ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में अलग-अलग हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। कई स्थानों पर मकानों, दुकानों, गौशालाओं और सड़कों को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
सबसे दर्दनाक हादसा टिहरी गढ़वाल जिले में सामने आया, जहां प्रतापनगर-लंबगांव मोटर मार्ग पर खोलगढ़ के पास एक कार अनियंत्रित होकर लगभग 200 मीटर गहरी खाई में गिर गई। दुर्घटना में वाहन चालक 38 वर्षीय होशियार सिंह पंवार की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद स्थानीय लोगों और प्रशासन की टीम ने राहत कार्य शुरू किया, लेकिन चालक को बचाया नहीं जा सका।
पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र में भी बारिश के दौरान बड़ा हादसा हुआ। जंगल में बकरियां चरा रहे 52 वर्षीय व्यक्ति की वज्रपात की चपेट में आने से मौत हो गई। वहीं नैनीताल जिले के हल्द्वानी ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में एक अज्ञात वाहन की टक्कर से सड़क किनारे पैदल चल रहे व्यक्ति की जान चली गई। इन घटनाओं ने लगातार खराब हो रहे मौसम के बीच लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की आवश्यकता का संकेत दिया है।
बारिश के कारण कई अन्य दुर्घटनाएं भी सामने आईं। ऋषिकेश-कीर्तिनगर मोटर मार्ग पर पावकी देवी क्षेत्र में चलती कार पर अचानक एक विशाल पेड़ गिर पड़ा। हादसे में मेरठ निवासी एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसी तरह चंपावत जिले के टनकपुर क्षेत्र में एक कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। रुद्रप्रयाग जिले के संकरोड़ी-खाकरा पीपली मार्ग पर एक पिकअप वाहन गहरी खाई में गिर गया, जिससे दो महिलाओं समेत तीन लोग घायल हो गए। दुर्घटना में वाहन के साथ जा रही एक भैंस की भी मौत हो गई। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
लगातार हो रही बारिश ने पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाओं को भी बढ़ा दिया है। चमोली जिले के नारायणबगड़ बाजार में भारी बारिश के चलते पानी और मलबा छह से सात दुकानों में घुस गया, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। स्थानीय प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग की टीमें मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने और बाजार को सामान्य करने में जुटी रहीं। इसी जिले के कहकुंड क्षेत्र में एक गौशाला के ऊपर विशाल बोल्डर गिर गया, जिससे वहां मौजूद पशुओं के दबने की सूचना मिली। राहत दलों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और बचाव कार्य शुरू किया।
पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र में भी बारिश के कारण बड़ा खतरा पैदा हो गया। एक आवासीय भवन के पीछे से विशाल चट्टान टूटकर सीधे घर के अंदर आ गिरी। हालांकि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन मकान को काफी नुकसान पहुंचा। प्रशासन ने प्रभावित परिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है।
देहरादून जिले में संतला देवी मंदिर के समीप नदी के बीच बने एक टापू पर सात लोग अचानक बढ़े जलस्तर के कारण फंस गए। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, अग्निशमन विभाग, 108 एंबुलेंस सेवा और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह रेस्क्यू अभियान कई घंटों तक चला और सफलतापूर्वक पूरा किया गया। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के आसपास जाने से बचने की अपील भी की है।
उत्तरकाशी जिले के हर्षिल क्षेत्र में भागीरथी नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी कटाव का खतरा बढ़ गया है। कटाव रोकने के लिए प्रशासन द्वारा युद्धस्तर पर सुरक्षात्मक कार्य किए जा रहे हैं। वायरक्रेट, बोल्डर पैकिंग और पीसीसी जैसी तकनीकों का उपयोग कर नदी के किनारों को मजबूत किया जा रहा है। प्रशासन ने पहले से ही संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में जनहानि न हो।
पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई। सबसे अधिक 130 मिलीमीटर बारिश उधम सिंह नगर जिले के किच्छा में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा देहरादून के मालदेवता में 103.5 मिलीमीटर, बागेश्वर के कपकोट में 97 मिलीमीटर, पिथौरागढ़ के बंगापानी में 92 मिलीमीटर, टिहरी के नरेंद्रनगर में 82.5 मिलीमीटर, रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ में 77 मिलीमीटर, नैनीताल के खनस्यू में 72 मिलीमीटर तथा चंपावत के टनकपुर में 63 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों और गदेरों का जलस्तर तेजी से बढ़ा हुआ है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
मौसम विभाग ने प्रदेश के लिए एक रेड अलर्ट, नौ ऑरेंज अलर्ट और छह येलो अलर्ट जारी किए हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ समय तक कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश जारी रह सकती है। प्रशासन ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस, आपदा प्रबंधन विभाग और राहत एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
भारी बारिश का असर चारधाम यात्रा पर भी देखने को मिला। ऋषिकेश-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-134) पालीगाड़ के पास मलबा आने से बाधित हो गया, जिसके कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़क को दोबारा खोलने के लिए मशीनों की मदद से तेजी से मलबा हटाया जा रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि ऋषिकेश-बदरीनाथ, ऋषिकेश-गंगोत्री, ऋषिकेश-केदारनाथ, जोशीमठ-मलारी-नीति सहित अधिकांश प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात सामान्य बना हुआ है।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार प्रदेशभर में पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, लोक निर्माण विभाग, बिजली विभाग और जिला प्रशासन की टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। जहां भी नुकसान की सूचना मिल रही है, वहां तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा रहा है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करें, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, नदी-नालों और तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रहें तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन या आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें। लगातार हो रही बारिश को देखते हुए आने वाले दिनों में भी सतर्कता बरतना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
