
नई दिल्ली/बारामती: महाराष्ट्र की राजनीति के एक युग का दुखद अंत करते हुए उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बारामती में विमान दुर्घटना में निधन हो गया है। इस हृदयविदारक घटना पर पूरे देश में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार से फोन पर बात की और उनके भतीजे अजित पवार के असामयिक निधन पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
प्रधानमंत्री ने इस कठिन समय में पवार परिवार के प्रति अपनी एकजुटता प्रकट की और दिवंगत नेता के प्रशासनिक व सामाजिक योगदान को याद किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने शरद पवार से साझा किया दुख
अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने शरद पवार से लंबी बातचीत की और इस हादसे को राज्य के साथ-साथ देश के लिए एक बड़ी क्षति बताया। पीएम मोदी ने न केवल एक राजनेता के रूप में, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी इस अपूरणीय क्षति पर दुख व्यक्त किया। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर, पीएम का यह फोन कॉल भारतीय राजनीति की गरिमा और व्यक्तिगत संबंधों की गहराई को दर्शाता है।
“अजित दादा का गरीबों के प्रति समर्पण उल्लेखनीय था”: पीएम मोदी
इससे पहले प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक पोस्ट साझा कर अजित पवार के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उन्हें एक परिश्रमी और जमीन से जुड़ा नेता बताया। प्रधानमंत्री ने कहा:
“अजित पवार एक सच्चे जननेता थे जिनका जमीनी स्तर पर गहरा जुड़ाव था। महाराष्ट्र की जनता की सेवा में वह हमेशा समर्पित रहे और एक कर्मठ नेता के रूप में उनका व्यापक सम्मान था। प्रशासनिक मामलों की उनकी समझ तथा गरीबों व वंचितों को सशक्त बनाने के प्रति उनका अटूट समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा।”
प्रधानमंत्री ने आगे लिखा कि वह इस असामयिक मृत्यु से बेहद दुखी और स्तब्ध हैं। उन्होंने ‘ओम शांति’ के साथ अपनी संवेदनाएं समाप्त कीं।
बारामती बना छावनी: उमड़ा दिग्गजों का सैलाब
अजित पवार (66) के निधन की खबर ने महाराष्ट्र के साथ-साथ दिल्ली के सत्ता गलियारों को भी हिला दिया है। बुधवार सुबह 8:45 बजे हुए इस बारामती विमान दुर्घटना के बाद बारामती एयरपोर्ट पर नेताओं का तांता लग गया है।
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राज्य के दिग्गज: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और राज्यपाल रमेश बैस तत्काल बारामती पहुंच चुके हैं।
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विपक्षी एकता: आपसी कड़वाहट को भुलाकर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे (ठाकरे ब्रदर्स) भी शरद पवार और उनके परिवार को ढांढस बंधाने बारामती पहुंच गए हैं।
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दिल्ली से रवानगी: खबर है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी बुधवार देर शाम तक बारामती पहुंच सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने बारामती और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया है।
हादसे की गंभीरता और प्रशासनिक कार्रवाई
यह हादसा उस समय हुआ जब अजित पवार का चार्टर विमान बारामती में लैंड कर रहा था। इस दुर्घटना में पांच लोगों की जान चली गई, जिससे विमानन सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं। अजित पवार के साथ उनके विश्वसनीय सुरक्षाकर्मी और क्रू मेंबर भी काल के गाल में समा गए।
पीएम मोदी के शोक संदेश के बाद केंद्र सरकार ने भी इस मामले में त्वरित रिपोर्ट मांगी है। नागर विमानन मंत्रालय की टीमें पहले से ही घटनास्थल पर जांच में जुट गई हैं ताकि हादसे के तकनीकी कारणों का पता लगाया जा सके।
महाराष्ट्र ने खोया अपना ‘प्रशासनिक स्तंभ’
अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति में ‘प्रशासन का मास्टर’ माना जाता था। फाइलों पर उनकी पकड़ और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता के विपक्षी भी मुरीद थे। प्रधानमंत्री मोदी का उन्हें ‘जननेता’ कहना उनके उसी प्रभाव को रेखांकित करता है जो उन्होंने दशकों की मेहनत से महाराष्ट्र के हर जिले में बनाया था।
शोक संदेशों का तांता
प्रधानमंत्री के अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी समेत विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अजित पवार के निधन पर शोक व्यक्त किया है। सभी ने उनके निधन को भारतीय राजनीति के एक सक्रिय अध्याय का अंत बताया है।
देवभूमि से लेकर दिल्ली तक सन्नाटा
अजित पवार का जाना महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा शून्य छोड़ गया है, जिसे निकट भविष्य में भरना संभव नहीं होगा। प्रधानमंत्री मोदी की शरद पवार से बातचीत और उनका भावुक संदेश यह बताता है कि अजित पवार का व्यक्तित्व दलगत राजनीति से कहीं ऊंचा था। पूरा देश आज ‘दादा’ को नम आंखों से विदाई दे रहा है।



