
देहरादून: उत्तराखंड की देवभूमि अब केवल आध्यात्मिक शांति का केंद्र ही नहीं, बल्कि वैश्विक सिनेमा और साहित्य का एक बड़ा मंच बनने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री आवास में आज एक महत्वपूर्ण शिष्टाचार भेंट के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष, विख्यात गीतकार व कवि प्रसून जोशी ने राज्य के भविष्य के सांस्कृतिक और फिल्मी रोडमैप पर गहन विचार-विमर्श किया।
साहित्य और सिनेमा के संगम पर सराहना
बैठक की शुरुआत में मुख्यमंत्री श्री धामी ने श्री प्रसून जोशी का गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने भारतीय सिनेमा, साहित्य और कला के क्षेत्र में प्रसून जोशी के अतुलनीय योगदान की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रसून जोशी जी जैसे व्यक्तित्व, जिन्होंने अपनी लेखनी से भारतीय संस्कृति की जड़ों को सींचा है, उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय हैं। इस दौरान दोनों दिग्गजों ने कला, साहित्य और सिनेमा के वर्तमान परिदृश्य और उत्तराखंड के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर सार्थक चर्चा की।
उत्तराखंड: फिल्मकारों की पहली पसंद बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बात पर जोर दिया कि उत्तराखंड में फिल्म निर्माण की अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार उत्तराखंड को देश के सबसे फिल्म-अनुकूल (Film-Friendly) राज्य के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यहाँ की नैसर्गिक सुंदरता, हिमालयी परिदृश्य और शांत वातावरण फिल्मकारों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त है।”
मुख्यमंत्री ने अवगत कराया कि राज्य सरकार द्वारा फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए नई फिल्म नीति के तहत कई नीतिगत सुधार किए गए हैं। इसमें सिंगल विंडो क्लीयरेंस, शूटिंग के लिए सब्सिडी और स्थानीय कलाकारों को अवसर प्रदान करने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
सांस्कृतिक विरासत और लोक कला का संरक्षण
इस मुलाकात का एक मुख्य बिंदु उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत रहा। प्रसून जोशी, जो स्वयं पहाड़ों की मिट्टी से जुड़े हुए हैं, ने उत्तराखंड के लोक संगीत और लोक कला को संरक्षित करने और उन्हें आधुनिक सिनेमा के माध्यम से दुनिया के सामने पेश करने की आवश्यकता पर बल दिया।
“उत्तराखंड की संस्कृति में वह गहराई है जो विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना सकती है। यहाँ के संगीत में जो माधुर्य और लोक कथाओं में जो दर्शन है, उसे फिल्म और साहित्य के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाना हमारा सामूहिक दायित्व है।” – प्रसून जोशी
भविष्य की योजनाएं और सहयोग की अपेक्षा
मुख्यमंत्री धामी ने प्रसून जोशी से अपेक्षा की कि वे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में और एक प्रख्यात कलाकार के नाते उत्तराखंड में सिनेमा और साहित्य की गतिविधियों के विस्तार में अपना मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करें। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में राज्य में बड़े फिल्म उत्सव (Film Festivals), साहित्य सम्मेलन और कला कार्यशालाओं का आयोजन नियमित रूप से किया जाए।
फिल्म सिटी और बुनियादी ढांचे पर ध्यान
चर्चा के दौरान यह भी निकलकर आया कि राज्य सरकार केवल शूटिंग स्थलों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि यहाँ पोस्ट-प्रोडक्शन और फिल्म निर्माण से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी मजबूत कर रही है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राज्य के युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।
देवभूमि से बॉलीवुड तक का सफर
आज की यह मुलाकात उत्तराखंड के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास के लिए एक शुभ संकेत है। एक ओर जहाँ पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत है, वहीं दूसरी ओर प्रसून जोशी जैसे रचनात्मक विजन वाले व्यक्तित्व का साथ मिलना उत्तराखंड को ‘फिल्म हब’ बनाने के सपने को साकार करने की ओर बड़ा कदम है।



