By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: NFS को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद, अखिलेश यादव ने लगाया आरक्षण खत्म करने की कोशिश का आरोप
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तर प्रदेश > NFS को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद, अखिलेश यादव ने लगाया आरक्षण खत्म करने की कोशिश का आरोप
उत्तर प्रदेशफीचर्डराजनीति

NFS को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद, अखिलेश यादव ने लगाया आरक्षण खत्म करने की कोशिश का आरोप

The Hill India News
Last updated: May 20, 2026 9:48 am
The Hill India News
Published: May 20, 2026
Share
SHARE

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर नौकरी में आरक्षण के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि “एनएफएस” यानी “नॉट फाउंड सूटेबल” के नाम पर आरक्षित वर्ग के लोगों को नौकरियों से दूर रखा जा रहा है और यह संविधान में मिले आरक्षण अधिकारों को कमजोर करने की एक सोची-समझी रणनीति है। अखिलेश यादव ने कहा कि सीधे तौर पर आरक्षण खत्म करना संभव नहीं है, इसलिए दूसरे रास्तों से इसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

अखिलेश यादव ने कहा कि देश में वंचित, पिछड़े, दलित और आदिवासी समाज को धीरे-धीरे यह महसूस कराने का प्रयास किया जा रहा है कि संविधान और आरक्षण से भी ज्यादा ताकतवर कुछ “वर्चस्ववादी शक्तियां” हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी में आरक्षण की व्यवस्था को खत्म करने के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं और “एनएफएस” उन्हीं तरीकों में से एक है।

उन्होंने अपने बयान में कहा, “वर्चस्ववादी लोग आरक्षण की खुली डकैती कर रहे हैं। अगर वे संविधान में दिए गए आरक्षण को सीधे खत्म नहीं कर सकते तो उसे दूसरे रास्तों से कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। नौकरी में आरक्षण खत्म करने के लिए ‘नॉट फाउंड सूटेबल’ का जुमला चलाया जा रहा है।”

अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि एक तरफ आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को “योग्य नहीं” बताकर नौकरी से बाहर किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ लैटरल एंट्री जैसी व्यवस्थाओं के जरिए अपने पसंदीदा लोगों को पिछले दरवाजे से सरकारी पदों पर नियुक्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है और संविधान की मूल भावना को कमजोर करने वाला कदम है।

आखिर क्या है एनएफएस?

“एनएफएस” का पूरा नाम “नॉट फाउंड सूटेबल” है, जिसका हिंदी में अर्थ होता है “उपयुक्त नहीं पाया गया।” यह शब्द मुख्य रूप से विश्वविद्यालयों, सरकारी शिक्षण संस्थानों और कुछ सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में इस्तेमाल किया जाता है। जब किसी पद के लिए इंटरव्यू और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयन समिति को लगता है कि उम्मीदवार निर्धारित मानकों के अनुसार योग्य नहीं है, तब उस उम्मीदवार को “नॉट फाउंड सूटेबल” घोषित कर दिया जाता है।

ऐसी स्थिति में उस पद को भरने के बजाय खाली छोड़ दिया जाता है। कई बार आरक्षित वर्ग के पदों पर भी यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। यानी यदि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवार को चयन समिति उपयुक्त नहीं मानती, तो उस सीट को खाली रखा जा सकता है। इसी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

विपक्षी दलों का आरोप है कि कई शिक्षण संस्थानों और सरकारी विभागों में आरक्षित पदों को जानबूझकर “एनएफएस” बताकर खाली रखा जाता है, ताकि आरक्षण का वास्तविक लाभ वंचित वर्ग तक न पहुंच सके। उनका कहना है कि यदि किसी उम्मीदवार में कुछ कमी है तो उसे प्रशिक्षण देकर सक्षम बनाया जा सकता है, लेकिन पदों को लगातार खाली रखना सामाजिक न्याय के खिलाफ है।

इस मुद्दे को कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी पहले उठा चुके हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि देश के कई बड़े शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को जानबूझकर “नॉट फाउंड सूटेबल” घोषित किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय और कई भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में बड़ी संख्या में आरक्षित पद खाली पड़े हुए हैं।

राहुल गांधी ने कहा था कि यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व को सीमित करने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि योग्य उम्मीदवारों को अवसर देने के बजाय तकनीकी कारणों का सहारा लेकर उन्हें बाहर किया जा रहा है।

हालांकि केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी की ओर से पहले भी यह कहा जाता रहा है कि नियुक्तियों में गुणवत्ता और योग्यता के मानकों से समझौता नहीं किया जा सकता। सरकार का तर्क है कि “नॉट फाउंड सूटेबल” कोई नया शब्द नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा रहा है। सरकार के अनुसार चयन पूरी तरह निर्धारित नियमों और मानकों के आधार पर किया जाता है।

लेकिन विपक्ष इस तर्क से संतुष्ट नहीं है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दल लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि “एनएफएस” का इस्तेमाल आरक्षण को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि आरक्षित पद लंबे समय तक खाली रखे जाएंगे तो इससे सामाजिक समानता और प्रतिनिधित्व की भावना प्रभावित होगी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और ज्यादा गरमा सकता है, क्योंकि आरक्षण और सामाजिक न्याय भारतीय राजनीति के सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल हैं। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है, जबकि सरकार अपनी भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और नियम आधारित बता रही है। अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

You Might Also Like

उत्तराखंड में अपर सचिव और दारोगा के बीच नोकझोंक, वीडियो वायरल होते ही पुलिसकर्मी लाइन हाजिर
Paris Olympics 2024: पेरिस ओलंपिक में मेडल जीताकर लौटे कोच के घर पर, बुलडोजर चलने का खतरा
New Delhi: BSNL के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ, सीबीआई ने घूसखोरी के आरोप में दर्ज किया मामला
Uttarakhand: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक राधेश्याम को दी श्रद्धांजलि
नई दिल्ली : विश्व को भारत से अपेक्षाएं हैं, पिछले छह सालों में रक्षा निर्यात में सात गुना वृद्धि दर्ज की गई है – राजनाथ सिंह
TAGGED:Akhilesh YadavJob ReservationNFSOBC reservationPolitical ControversyRahul GandhireservationSCST Reservation
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडफीचर्ड

ऋषिकेश–डोईवाला हाईवे पर 3000 से अधिक पेड़ों के प्रस्तावित कटान का विरोध तेज, कांग्रेस और सामाजिक संगठनों ने सात मोड़ पर किया प्रदर्शन

The Hill India News
The Hill India News
July 12, 2026
J&K में सियासी भूचाल: उमर अब्दुल्ला का बड़ा दावा- ‘NC विधायक को तोड़ने के लिए मिला ₹30 करोड़ और मंत्री पद का ऑफर’, BJP का पलटवार
देहरादून में ‘लोक संवर्धन पर्व’ का शंखनाद: उत्तराखंड बना केंद्र का पहला साझीदार, सीएम धामी और किरेन रिजिजू ने बढ़ाया शिल्पकारों का मान
सहसपुर में बोले सीएम धामी- सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटेगी जनता, अब खुद उनके द्वार पहुंचेगी सरकार
जमानत मिलते ही हैवान बना POCSO का आरोपी: तेलंगाना में पत्नी, दो मासूम बच्चों और पीड़िता समेत 6 लोगों की बेरहमी से हत्या, दहला रंगा रेड्डी
भवाली नरेश पांडे कांड में नया मोड़: मूल पीड़िता को ही पुलिस ने बनाया आरोपी, अदालत ने रिमांड अर्जी खारिज कर दी जमानत
ऑकलैंड में पीएम मोदी का भव्य स्वागत, भारत-न्यूजीलैंड FTA को बताया ऐतिहासिक मील का पत्थर
मौसम का यू-टर्न: झमाझम बारिश के बाद अब बदलने वाला है मिजाज, जानिए आपके राज्य में कैसी है मॉनसून की स्थिति
सुप्रीम कोर्ट में हाई वोल्टेज ड्रामा: याचिकाकर्ता ने खुद को बताया ‘सॉवरेन’, जजों को कहा ‘न्यायिक सेवक’; हवा में कागज़ उछालने पर पुलिस ने किया गिरफ्तार
देहरादून की सड़कों पर रेंगते ट्रैफिक से मिलेगी मुक्ति: डीएम डॉ. आशीष चौहान सख्त, जाम और पार्किंग के लिए बनेगा ‘माइक्रो लेवल प्लान’
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?