
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध की विभीषिका ने पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है। इस वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत अपनी आर्थिक सुरक्षा और नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च-स्तरीय बैठक हुई। करीब ढाई घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में प्रधानमंत्री ने युद्ध के कारण पैदा हुए वैश्विक हालातों और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित खतरों की गहन समीक्षा की।
संकट काल में सरकार की सजगता: ढाई घंटे का गहन मंथन
28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से यह प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई CCS की दूसरी बैठक है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है। बैठक के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि सरकार युद्ध के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
प्रधानमंत्री ने लिखा, “सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक की अध्यक्षता की। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनज़र विभिन्न मंत्रालयों द्वारा उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की गई। ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, विमानन और लॉजिस्टिक्स जैसे अहम क्षेत्रों पर विशेष चर्चा हुई।“
महंगाई पर लगाम और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती
सरकार का मुख्य फोकस इस बात पर है कि युद्ध की वजह से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन बाधित होने का असर भारत के आम आदमी की जेब पर न पड़े। बैठक में निम्नलिखित रणनीतिक बिंदुओं पर सहमति बनी:
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ऊर्जा सुरक्षा: आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने LPG और LNG की आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही ईंधन शुल्क में कटौती और बिजली क्षेत्र की मजबूती पर भी विचार किया गया ताकि उद्योगों और आम जनता पर बोझ न बढ़े।
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कालाबाजारी पर प्रहार: प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया है कि युद्ध की आड़ में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाने वाले जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।
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कंट्रोल रूम की स्थापना: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बेहतर समन्वय के लिए विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, जो रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर 24 घंटे निगरानी रखेंगे।
अन्नदाता की सुरक्षा: उर्वरक और कृषि पर विशेष ध्यान
भारत एक कृषि प्रधान देश है और पश्चिम एशिया से आने वाले कच्चे माल का असर उर्वरक उत्पादन पर पड़ता है। बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और अन्य अधिकारियों के साथ चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने खरीफ और रबी सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता का जायजा लिया।
यूरिया का घरेलू उत्पादन बढ़ाने और DAP/NPKS की निर्बाध आपूर्ति के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ कूटनीतिक समन्वय तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि युद्ध की आंच भारतीय किसान के खेतों तक नहीं पहुंचनी चाहिए।
लॉजिस्टिक्स और विमानन क्षेत्र की चुनौतियां
युद्ध के कारण हवाई मार्ग और समुद्री रास्ते (शिपिंग रूट्स) प्रभावित हो रहे हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने का खतरा है। विमानन मंत्रालय और जहाज़रानी विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे वैकल्पिक मार्गों और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर काम करें ताकि भारत का व्यापार और निर्यात प्रभावित न हो। MSME क्षेत्र, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, उसे इस वैश्विक संकट से बचाने के लिए विशेष वित्तीय उपायों पर भी चर्चा की गई।
अफवाहों के खिलाफ जंग और जन-संवाद
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में एक बेहद महत्वपूर्ण बिंदु पर जोर दिया—‘सूचना की प्रामाणिकता’। युद्ध के समय में गलत सूचनाएं और अफवाहें देश के भीतर असुरक्षा का माहौल पैदा कर सकती हैं। पीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता तक समय पर और सटीक जानकारी पहुंचाई जाए ताकि किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों को फैलने से रोका जा सके।
इससे पहले अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री ने नागरिकों से एकजुट होने का आह्वान किया था और इस संकट पर ‘स्वार्थ-पूर्ति वाली राजनीति’ करने वालों से बचने की सलाह दी थी।
बैठक में दिग्गजों की मौजूदगी
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में मोदी कैबिनेट के लगभग सभी प्रमुख स्तंभ मौजूद रहे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने-अपने विभागों का फीडबैक साझा किया। इनके अलावा पीयूष गोयल, शिवराज सिंह चौहान, जे.पी. नड्डा, अश्विनी वैष्णव और हरदीप सिंह पुरी जैसे वरिष्ठ मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया।
प्रशासनिक मोर्चे पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास और कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने रणनीतिक डेटा और आर्थिक सुरक्षा के खाके पेश किए।
भारत की ‘वेट एंड वॉच’ नीति
पश्चिम एशिया का यह संघर्ष यदि लंबा खिंचता है, तो भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। PM मोदी CCS बैठक पश्चिम एशिया संघर्ष की यह समीक्षा स्पष्ट करती है कि भारत केवल मूकदर्शक नहीं है, बल्कि अपनी आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक हितों को सुरक्षित करने के लिए ढाल तैयार कर चुका है। सरकार का यह सक्रिय दृष्टिकोण वैश्विक संकट के बीच देशवासियों को एक भरोसे का संदेश देता है।



