By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: देश में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम! तेल कंपनियों पर हर महीने 30 हजार करोड़ रुपये का बोझ, मिडिल ईस्ट तनाव का असर
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > देश में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम! तेल कंपनियों पर हर महीने 30 हजार करोड़ रुपये का बोझ, मिडिल ईस्ट तनाव का असर
देशफीचर्ड

देश में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम! तेल कंपनियों पर हर महीने 30 हजार करोड़ रुपये का बोझ, मिडिल ईस्ट तनाव का असर

The Hill India News
Last updated: May 9, 2026 3:50 am
The Hill India News
Published: May 9, 2026
Share
SHARE

भारत में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें बढ़ सकती हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़े असर ने भारत की सरकारी तेल कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी यानी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में यह आशंका तेज हो गई है कि सरकार और तेल कंपनियां जल्द ही ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला ले सकती हैं।

Contents
हर दिन 700 से 1000 करोड़ रुपये तक का नुकसानमिडिल ईस्ट संकट से बिगड़ी सप्लाईसरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर दी राहतदुनियाभर में बढ़ चुकी हैं ईंधन की कीमतेंभारत में फिलहाल कीमतें स्थिरआम आदमी पर पड़ सकता है सीधा असर

दरअसल, ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। दो महीने पहले तक जो कच्चा तेल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, वह अब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है। इसका सीधा असर उन देशों पर पड़ रहा है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। भारत भी उन्हीं देशों में शामिल है, क्योंकि देश अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है।

हर दिन 700 से 1000 करोड़ रुपये तक का नुकसान

न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों को हर दिन करीब 700 से 1000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। महीने के हिसाब से यह आंकड़ा लगभग 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच रहा है।

सूत्रों के अनुसार अप्रैल महीने में पेट्रोल पर लगभग 18 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल पर 25 रुपये प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी हो रही थी। यानी कंपनियां जितने दाम में ईंधन बेच रही हैं, उससे कहीं ज्यादा कीमत पर उन्हें कच्चा तेल खरीदना पड़ रहा है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए खुदरा कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।

मिडिल ईस्ट संकट से बिगड़ी सप्लाई

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि देश का लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल, 90 प्रतिशत एलपीजी और करीब 65 प्रतिशत प्राकृतिक गैस इसी क्षेत्र से आती है।

इन हालातों के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने देशभर में ईंधन की सप्लाई बनाए रखी। पिछले कई हफ्तों में कहीं भी पेट्रोल या डीज़ल की कमी की स्थिति नहीं बनी। न राशनिंग लागू हुई और न ही आम लोगों को ईंधन खरीदने में किसी तरह की परेशानी हुई। लेकिन इस स्थिरता की भारी कीमत अब तेल कंपनियों को चुकानी पड़ रही है।

सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर दी राहत

केंद्र सरकार ने बढ़ती कीमतों का असर कम करने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी। पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये कर दिया गया, जबकि डीज़ल पर लगने वाली 10 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी को पूरी तरह खत्म कर दिया गया।

सरकार का कहना है कि अगर यह कटौती नहीं की जाती तो तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी बढ़कर 62,500 करोड़ रुपये प्रति माह तक पहुंच सकती थी। हालांकि एक्साइज ड्यूटी कम करने से सरकार को भी हर महीने करीब 14 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बेहद अस्थिर बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश रही है कि आम जनता पर बोझ न बढ़े और पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें स्थिर रहें। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि आने वाले समय में कीमतें इसी स्तर पर बनी रहेंगी या नहीं।

दुनियाभर में बढ़ चुकी हैं ईंधन की कीमतें

भारत में भले ही अभी तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी गई हों, लेकिन दुनिया के कई देशों में ईंधन के दामों में भारी बढ़ोतरी हो चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक स्पेन में पेट्रोल की कीमतें लगभग 34 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। जापान, इटली और इज़रायल में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं जर्मनी में 27 प्रतिशत और यूनाइटेड किंगडम में 22 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ चुकी हैं।

कई देशों ने हालात को देखते हुए ऊर्जा बचत की अपील की है। कुछ देशों में ईंधन की राशनिंग भी लागू की गई है, जबकि कई जगह सरकारों ने राहत पैकेज या ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण लगाने जैसे कदम उठाए हैं।

भारत में फिलहाल कीमतें स्थिर

भारत में फिलहाल पेट्रोल की औसत कीमत लगभग 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल की कीमत करीब 87.67 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है। सरकार और तेल कंपनियों ने अब तक उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने से बचने की कोशिश की है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारत में भी पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ाना लगभग तय हो जाएगा। लगातार बढ़ती अंडर-रिकवरी को लंबे समय तक झेल पाना तेल कंपनियों के लिए आसान नहीं होगा।

आम आदमी पर पड़ सकता है सीधा असर

अगर पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। परिवहन खर्च बढ़ने से खाने-पीने की चीजों समेत रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं। ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने का असर महंगाई पर भी दिखाई देगा।

इसके अलावा एलपीजी, सीएनजी और बिजली उत्पादन की लागत भी बढ़ सकती है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयातित ईंधन पर निर्भर है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती महंगाई को नियंत्रित रखने और तेल कंपनियों के नुकसान के बीच संतुलन बनाने की होगी।

फिलहाल सरकार की कोशिश कीमतों को स्थिर रखने की है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीज़ल महंगा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

You Might Also Like

इंश्योरेंस, बिल्डर या सरकार…फ्लैट में आग लग जाए तो कौन देगा पैसा? जानिए नुकसान की भरपाई के नियम और आपके अधिकार
मौसम अपडेट: दिल्ली में 24 और 25 जून को भयंकर आंधी-तूफान के साथ बारिश की संभावना
गज़ब के लहसुन चोर, एक-दो किलो नहीं पूरे ट्रक का 22 हजार किलो लहसुन बेच डाला
मॉस्को आतंकी हमले की पीएम मोदी ने की निंदा, बोले- “भारत रूस के साथ खड़ा है”
हल्द्वानी टांडा जंगल हत्याकांड: वन विभाग के संविदाकर्मी की कुल्हाड़ी से काटकर निर्मम हत्या, इलाके में सनसनी
TAGGED:Crude OilFuel Price HikeMiddle East tensionsOil Companies
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडफीचर्ड

निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर नैनीताल जिला प्रशासन का बड़ा प्रहार; डीएम का सख्त आदेश- अतिरिक्त शुल्क लौटाएं या एडजस्ट करें, उल्लंघन पर 5 लाख तक जुर्माना

The Hill India News
The Hill India News
June 27, 2026
अंगदान मानव सेवा का सर्वोच्च व पुनीत कार्य, जनभागीदारी से इसे राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन बनाना आवश्यक: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा
फीफा वर्ल्ड कप 2026: डेम्बेले की खौफनाक हैट्रिक से फ्रांस ने नॉर्वे को उड़ाया, सेनेगल ने इराक को 5-0 से रौंदकर जिंदा रखीं उम्मीदें
अलीगढ़ में AIMIM नेता का खौफनाक एलान, BJP नेता नाजिया इलाही की जुबान काटने वाले को 1 लाख का इनाम
रुड़की में मामा की बेटी से लव मैरिज की खौफनाक सजा, सगे मामा ने बीच बाजार भांजे को चाकुओं से गोदकर मार डाला
मध्य भारत को पार कर यूपी-उत्तराखंड की ओर बढ़ा मानसून, मुंबई में भारी आफत का ‘ऑरेंज अलर्ट’, दिल्ली-NCR में भी बदलेगा मौसम
वेनेजुएला में कुछ ही मिनटों में आए दो शक्तिशाली भूकंप, राजधानी काराकास में इमारतें जमींदोज, सुनामी का हाई अलर्ट
हरिद्वार में बड़ा हादसा टला: BHEL क्षेत्र में नर्सिंग छात्राओं से भरी कॉलेज बस का CNG सिलेंडर लीक, मची अफरा-तफरी
डिजिटल गवर्नेंस की ओर देहरादून के बढ़ते कदम: सरकारी दफ्तरों को पूरी तरह ‘पेपरलेस’ बनाने की तैयारी, अफसरों को मिला ई-ऑफिस का व्यावहारिक पाठ
उत्तराखंड में हाई अलर्ट: चारधाम समेत धार्मिक स्थलों को बम से उड़ाने की धमकी, अभेद्य किले में तब्दील हुए केदारनाथ-बदरीनाथ; सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैद
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?