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केदारघाटी में आस्था का ‘आक्रोश’: अगस्त्यमुनि में डोली के लिए भक्तों ने तोड़ा गोल गेट, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच ठनी

रुद्रप्रयाग/अगस्त्यमुनि। उत्तराखंड की केदारघाटी स्थित अगस्त्यमुनि में गुरुवार को आस्था और सरकारी तंत्र के बीच एक बड़ा टकराव देखने को मिला। लगभग 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद निकली अगस्त्यमुनि महाराज की डोली (दिवारा यात्रा) के खेल मैदान में प्रवेश को लेकर हुए विवाद ने उग्र रूप ले लिया। डोली के प्रवेश मार्ग में बाधा बन रहे ‘गोल गेट’ को आक्रोशित श्रद्धालुओं ने करीब साढ़े तीन घंटे की मशक्कत के बाद ध्वस्त कर दिया। इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ ‘गुंडा एक्ट’ सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की घोषणा की है।

साढ़े तीन घंटे का संघर्ष और पुलिस से नोकझोंक

गुरुवार, 15 जनवरी की सुबह 11 बजे जब अगस्त्यमुनि महाराज की डोली अपने गद्दीस्थल के लिए प्रस्थान कर रही थी, तब माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब डोली के रास्ते में मुख्य खेल मैदान का गोल गेट बाधा बन गया। डोली के ऊंचे नेजा-निशान और छत्र इस छोटे और गोल आकार के गेट से अंदर नहीं जा पा रहे थे।

भक्तों का आरोप है कि प्रशासन ने बार-बार अनुरोध के बावजूद डोली के लिए मार्ग प्रशस्त नहीं किया। आक्रोशित भीड़ और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। दोपहर करीब 12:15 बजे श्रद्धालुओं ने खुद ही गेट तोड़ना शुरू किया और शाम 4 बजे तक गेट को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। इसके बाद हजारों भक्तों के जयकारों के बीच डोली ने खेल मैदान स्थित गद्दीस्थल में प्रवेश किया।


विवाद की जड़: खेल मैदान या स्टेडियम?

यह पूरा मामला केवल एक गेट तोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे खेल मैदान के अस्तित्व की लड़ाई है।

  • प्रशासन का पक्ष: सरकार इस मैदान पर एक आधुनिक स्टेडियम का निर्माण करवा रही है।

  • ग्रामीणों का पक्ष: स्थानीय लोगों का तर्क है कि यह मैदान पौराणिक काल से अगस्त्यमुनि महाराज की संपत्ति है। ग्रामीणों को डर है कि स्टेडियम बनने के बाद यह मैदान बाहरी व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र बन जाएगा और स्थानीय बच्चों व धार्मिक आयोजनों के लिए जगह नहीं बचेगी।

सामाजिक कार्यकर्ता त्रिभुवन चौहान का कहना है कि साल 2004 में भूमि हस्तांतरण के जो दावे किए जा रहे हैं, उनके कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने हठधर्मिता नहीं छोड़ी, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।


डीएम रुद्रप्रयाग का सख्त रुख: ‘गुंडा एक्ट’ में होगी कार्रवाई

इस तोड़फोड़ की घटना से जिला प्रशासन बेहद नाराज है। जिलाधिकारी (DM) प्रतीक जैन ने इसे धार्मिक भावनाओं की आड़ में की गई अराजकता करार दिया है। डीएम ने स्पष्ट कहा, “कुछ लोग इस संवेदनशील मामले को राजनीतिक रंग दे रहे हैं। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना अक्षम्य है। ड्रोन कैमरों के माध्यम से गेट तोड़ने वालों की पहचान की जा रही है और उन पर गुंडा एक्ट समेत कड़ी धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।”

वहीं, एसडीएम (SDM) एसएस सैनी ने कहा कि डोली संचालन समिति को वैकल्पिक मार्ग से जाने का सुझाव दिया गया था, लेकिन कुछ ‘तथाकथित’ तत्वों ने जानबूझकर विवाद को तूल दिया।


15 साल बाद की दिवारा यात्रा और मकर संक्रांति का जाम

बता दें कि यह विवाद बुधवार 14 जनवरी (मकर संक्रांति) से ही शुरू हो गया था। उस दिन भी करीब 5 घंटे तक केदारनाथ हाईवे जाम रहा था, क्योंकि गेट छोटा होने के कारण डोली प्रवेश नहीं कर पाई थी और भक्तों ने हाईवे पर धरना दे दिया था। डोली वापस मंदिर लौट गई थी, लेकिन गुरुवार को मामला और भी गंभीर हो गया।

[Image: Thousands of devotees carrying the doli of Agastyamuni Maharaj in the playground]

क्या आस्था पर भारी पड़ेगा कानून?

फिलहाल अगस्त्यमुनि महाराज की डोली गद्दीस्थल पर विराजमान है और पुजारियों ने भोग लगाकर धार्मिक अनुष्ठान शुरू कर दिए हैं। मैदान मुनि महाराज के जयकारों से गुंजायमान है, लेकिन दूसरी तरफ प्रशासन द्वारा की जा रही कानूनी कार्रवाई ने क्षेत्र में तनाव कम नहीं होने दिया है।

ग्रामीण पिछले एक महीने से इस मैदान में धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि यह “मुनि महाराज की भूमि” है और वे इसे किसी भी कीमत पर स्टेडियम के नाम पर “कठपुतली” नहीं बनने देंगे।

मुख्य बिंदु:

  • घटना: डोली के प्रवेश के लिए भक्तों ने सरकारी गेट तोड़ा।

  • समय: गुरुवार, 15 जनवरी, दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक चला संघर्ष।

  • विवाद: खेल मैदान बनाम प्रस्तावित स्टेडियम निर्माण।

  • प्रशासनिक एक्शन: वीडियो और ड्रोन फुटेज से आरोपियों की पहचान शुरू, मुक़दमे की तैयारी।

रुद्रप्रयाग का यह मामला अब एक जटिल कानूनी और धार्मिक मोड़ पर है। जहां एक तरफ विकास (स्टेडियम) की बात है, वहीं दूसरी तरफ सदियों पुरानी आस्था और स्थानीय हक-हकूक। प्रशासन की अगली कार्रवाई यह तय करेगी कि केदारघाटी में शांति बनी रहेगी या यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा।

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