
पटना, 26 नवंबर। बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में गठित नई एनडीए सरकार ने कार्यभार संभालते ही प्रशासनिक स्तर पर तेज सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है। इसी क्रम में मंगलवार शाम भवन निर्माण विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को उनका सरकारी आवास—10, सर्कुलर रोड—खाली करने का औपचारिक नोटिस जारी कर दिया। विभाग ने उन्हें अब 39, हार्डिंग रोड स्थित सरकारी बंगला आवंटित किया है, जो आने वाले समय में उनका नया आधिकारिक आवास होगा।
सरकार का यह कदम केवल राजनीतिक बदलाव से प्रेरित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसकी जड़ें राज्य की एक महत्वपूर्ण न्यायिक व्यवस्था से जुड़ी हैं, जिसने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास देने की परंपरा पर अंकुश लगाया था।
भवन निर्माण विभाग का आदेश: “39, हार्डिंग रोड आवंटित”
भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि
“नेता प्रतिपक्ष, बिहार विधान परिषद के लिए पटना के केंद्रीय पूल का आवास संख्या 39, हार्डिंग रोड आवंटित किया जाता है।”
इस आदेश के बाद यह लगभग तय हो गया है कि लालू प्रसाद–राबड़ी देवी परिवार को अब वर्षों से उनका राजनीतिक और सामाजिक केंद्र बने 10 सर्कुलर रोड का बंगला खाली करना होगा। यह वही आवास है, जहां से बिहार राजनीति की कई अहम रणनीतियाँ तय होती रही हैं और जहां से आरजेडी की दशकों की सक्रिय राजनीति संचालित होती रही है।
2017 से शुरू हुआ था विवाद, जो अब 2025 में बना बड़ा फैसला
राबड़ी देवी को आवास खाली करने की स्थिति सिर्फ नई सरकार के आने से नहीं बनी, बल्कि इसकी पृष्ठभूमि वर्ष 2017 की उस कानूनी लड़ाई में छिपी है, जिसने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों की विशेष सुविधाओं पर गहरा असर डाला था।
यह लड़ाई किसी और की नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव की अदालत में दाखिल याचिका से शुरू हुई थी—जो अब जाकर उनकी अपनी मां तक को प्रभावित कर रही है।
साल 2017: तेजस्वी बनाम बिहार भवन निर्माण विभाग
2017 में जब महागठबंधन सरकार गिरने के बाद नीतीश कुमार ने फिर एनडीए का दामन थामा, तब तेजस्वी यादव को उपमुख्यमंत्री पद से हटना पड़ा। इसके बाद उन्हें उनका आवंटित सरकारी आवास—5, देशरत्न मार्ग—खाली करने का नोटिस जारी हुआ।
तेजस्वी यादव इस आवास में व्यापक मरम्मत और विकास कार्य करा चुके थे, साथ ही विपक्ष के नेता के तौर पर भी इसी प्रतिष्ठित बंगले में रहना चाहते थे। लेकिन भवन निर्माण विभाग के फैसले के खिलाफ उन्होंने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की और सरकारी आवास हटाने की कार्रवाई को चुनौती दी।
यहीं से शुरू होता है वह न्यायिक अध्याय, जिसने अब राबड़ी देवी के आवास विवाद का रूप ले लिया है।
हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पूर्व मुख्यमंत्रियों की आजीवन सुविधाएँ खत्म
तेजस्वी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने न सिर्फ उनकी मांग खारिज की, बल्कि उससे भी बड़ा, अधिक व्यापक प्रभाव वाला निर्णय दिया।
अदालत ने कहा कि—
- पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला,
- सुरक्षा स्टाफ,
- घरेलू सहायकों,
- और अन्य सरकारी सुविधाओं का अधिकार नहीं होगा।
कोर्ट ने साफ कर दिया कि संविधान के तहत “पूर्व मुख्यमंत्री” का दर्जा कोई संवैधानिक पद नहीं है, इसलिए उन्हें विशेष सरकारी लाभ नहीं दिए जा सकते।
यह फैसला उस समय तो एक प्रशासनिक सुधार की तरह देखा गया, लेकिन इसके वास्तविक प्रभाव 2025 में सामने आने लगे हैं। अगर तेजस्वी 2017 में अदालत नहीं गए होते, तो राबड़ी देवी पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते 10 सर्कुलर रोड के बंगले में रह सकती थीं।
अदालत के फैसले ने यह सुविधा समाप्त कर दी—जिसका सीधा परिणाम अब 2025 में दिख रहा है।
नीतीश सरकार की प्रशासनिक सक्रियता का संकेत
नई एनडीए सरकार शपथ ग्रहण के कुछ ही दिनों बाद लगातार महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय ले रही है। उन्हें आवास खाली करने का नोटिस जारी करना सरकार की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें सरकारी संसाधनों का पुनर्वितरण और वैधानिक प्रावधानों का सख्त पालन प्रमुख एजेंडा के रूप में उभरकर सामने आया है।
जब भी सरकारें बदलती हैं, आवास पुनर्विनियोजन की प्रक्रिया सामान्य मानी जाती है, लेकिन राबड़ी देवी जैसे दिग्गज नेता के आवास परिवर्तन का आदेश राजनीतिक रूप से स्वाभाविक रूप से ध्यान खींचने वाला है।
लालू-राबड़ी परिवार की राजनीति पर पड़ सकता है असर
10, सर्कुलर रोड सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि आरजेडी के लिए एक राजनीतिक केंद्र रहा है।
यह वह स्थान है—
जहां वरिष्ठ नेता बैठकें करते रहे,
जहां सैकड़ों कार्यकर्ता रोज पहुंचते थे,
जहां चुनावी रणनीतियाँ बनती थीं,
और जहां से लालू प्रसाद यादव ने वर्षों तक राजनीति को संचालित किया।
हार्डिंग रोड के नए आवास में शिफ्ट होने के बाद राजनीतिक गतिविधियों के स्वरूप और प्रभाव में परिवर्तनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि आरजेडी ने अभी तक इस नोटिस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
राजनीतिक हलचल तय, कानूनी स्थिति स्पष्ट
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का विषय बनेगा—
- क्या सरकार जल्दबाज़ी में फैसले ले रही है?
- क्या यह न्यायिक आदेश का अनुपालन भर है?
- या फिर राजनीतिक परिवर्तन का प्रशासनिक असर?
लेकिन कानूनी स्थिति स्पष्ट है—
2017 का कोर्ट आदेश पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन आवास नहीं देता, इसलिए राबड़ी देवी को अपना पुराना आवास खाली करना ही होगा।
2017 के निर्णय की छाया में 2025 का फैसला
राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड खाली करने का नोटिस एक साधारण प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि उस न्यायिक प्रक्रिया का तार्किक परिणाम है जो 2017 में शुरू हुई थी।
विडंबना यह है कि न्यायिक फैसले को चुनौती देने की जिस प्रक्रिया की शुरुआत तेजस्वी यादव ने अपनी सुविधा के लिए की थी, वही फैसला अब उनके परिवार पर लागू हो रहा है।
नई नीतीश सरकार के लिए यह कदम एक मजबूत प्रशासनिक संदेश है—जबकि आरजेडी के लिए यह एक प्रतीकात्मक राजनीतिक झटका।



