
नई दिल्ली: नेशनल हेराल्ड केस में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व—सोनिया गांधी और राहुल गांधी—के खिलाफ नई FIR दर्ज की है। यह FIR गंभीर आर्थिक अपराध, आपराधिक साजिश और कंपनियों के माध्यम से फंडिंग की विसंगतियों से जुड़े आरोपों पर आधारित है। FIR में गांधी परिवार के अलावा छह अन्य व्यक्तियों और तीन कंपनियों को भी आरोपी बनाया गया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है, और पहले से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव चरम पर है। नई FIR से राजनीतिक हलचल और भी तेज़ हो गई है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया है, जबकि सरकारी एजेंसियाँ इसे “कानून के मुताबिक अनिवार्य कदम” बता रही हैं।
FIR कैसे दर्ज हुई? ED की शिकायत से उठा पूरा मामला
अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट दिल्ली पुलिस के साथ साझा की थी।
इसके बाद, 3 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने PMLA की धारा 66(2) के तहत FIR दर्ज की।
इस धारा के तहत ED किसी भी एजेंसी को यह अनिवार्य रूप से सूचित कर सकती है कि संबंधित मामले में अनुसूचित अपराध दर्ज किया जाना जरूरी है।
कानूनी प्रक्रिया के तहत दिल्ली पुलिस को यह FIR दर्ज करने के लिए बाध्य होना पड़ा।
सूत्रों के अनुसार, ED की रिपोर्ट में कई ऐसे बिंदु सामने आए जिनसे कथित वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होती है। रिपोर्ट के आधार पर EOW ने यह FIR दर्ज की, जिसमें धनशोधन, आपराधिक साजिश, विश्वासघात, धोखाधड़ी और कंपनियों का दुरुपयोग जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।
FIR में कौन-कौन आरोपी? बड़े नामों की लंबी सूची
इस FIR में कुल 8 व्यक्तियों और 3 कंपनियों को आरोपी बनाया गया है।
सबसे प्रमुख नाम—
- सोनिया गांधी
- राहुल गांधी
- सैम पित्रोदा (इंडियन ओवरसीज कांग्रेस प्रमुख)
- और 3 अन्य व्यक्ति (जिनमें कंपनी प्रबंधक और निदेशक शामिल)
कंपनियों की सूची:
- AJL (Associated Journals Ltd.)
- Young Indian
- Dotex Merchandise Pvt Ltd (कोलकाता आधारित)
यह पहली बार नहीं है जब नेशनल हेराल्ड मामले में ये नाम चर्चा में आए हों, लेकिन FIR के जरिए मामले का दायरा अब सीधे आपराधिक मुकदमेबाजी तक पहुँच गया है।
क्या है पूरा आरोप? 1 करोड़ से शुरू होकर 2,000 करोड़ की संपत्ति तक पहुंचने की साजिश
मामले की जड़ें उस वित्तीय लेन-देन में हैं जिसे ED “संरचित धोखाधड़ी” बता रही है।
मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:
- कोलकाता स्थित Dotex Merchandise Pvt Ltd को एक कथित शेल कंपनी बताया गया है।
- आरोप है कि Dotex ने Young Indian को ₹1 करोड़ की राशि दी।
- यह फंड Young Indian के बैंक खातों में भेजा गया, जहां से इसका उपयोग कांग्रेस पार्टी को ₹50 लाख की राशि भुगतान करने में किया गया।
- इस ₹50 लाख के भुगतान के आधार पर Young Indian ने Associated Journals Ltd (AJL) के लगभग सभी शेयरों का अधिग्रहण कर लिया।
- AJL के पास देशभर में करीब ₹2,000 करोड़ से अधिक की संपत्ति होने का अनुमान है—जिस पर Young Indian को नियंत्रण मिल गया।
ED और अब EOW का कहना है कि यह “आर्थिक छल”, “कॉर्पोरेट संरचना का दुरुपयोग” और “राजनीतिक लाभ के लिए संपत्ति कब्ज़ा करने की साजिश” का मामला है।
Young Indian कैसे बना AJL का मालिक?
FIR के अनुसार:
- कांग्रेस ने AJL को दिए गए ₹90 करोड़ के कर्ज को उगाही योग्य नहीं बताया और उसे Young Indian को मात्र ₹50 लाख में ट्रांसफर कर दिया।
- Young Indian ने इस कर्ज के अधिकार अपने हाथ में लेकर AJL को कहा कि वह बदले में अपने 99% शेयर उसे दे।
- AJL ने ऐसा किया, और इस तरह उसकी लगभग पूरी संपत्ति Young Indian के नियंत्रण में आ गई।
जांच एजेंसियों का दावा है कि यह एक “पूर्व-नियोजित योजना” थी, जिसमें Sonia Gandhi और Rahul Gandhi की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
कांग्रेस का पलटवार: “राजनीतिक बदले की कार्रवाई, 2024 की गूंज अब भी जारी”
FIR सामने आते ही कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं का कहना है कि—
- यह कार्रवाई चुनावी हार का बदला है
- सरकार विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है
- प्रधानमंत्री कार्यालय से निर्देशित राजनीति है
- यह मामला वर्षों पुराना है, लेकिन इसे अब उठाकर राजनीतिक लाभ लिया जा रहा है
कांग्रेस प्रवक्ताओं का दावा है कि Young Indian एक गैर-लाभकारी कंपनी है, और उसकी आय का उद्देश्य “राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत को संरक्षित करना” है। शेल कंपनी या धोखाधड़ी के आरोपों को पार्टी ने सख्ती से खारिज किया है।
भाजपा का जवाब: “कानून अपना काम कर रहा है, कांग्रेस घोटाले में फँसी”
भाजपा नेताओं ने इस FIR को “कानूनी प्रक्रिया का स्वाभाविक परिणाम” बताया।
उनका कहना है—
- कांग्रेस ने वर्षों तक आर्थिक संरचनाओं का दुरुपयोग कर देश को गुमराह किया
- यह कोई राजनीतिक प्रतिशोध नहीं, बल्कि ED की विस्तृत जांच का परिणाम है
- यदि कांग्रेस निर्दोष है, तो उसे कोर्ट में खुद को साबित करना चाहिए
भाजपा ने यह भी कहा कि मामला अदालत में तय होगा, न कि टीवी डिबेट या प्रेस कॉन्फ्रेंस में।
आगे क्या? EOW की जांच तेज़, गिरफ्तारियाँ संभव
जांच से जुड़े शीर्ष सूत्रों का कहना है कि—
- EOW अब संबंधित कंपनियों के बैंक लेन-देन की फॉरेंसिक जांच कर रही है
- Dotex के निदेशकों से पूछताछ तेज़ हो सकती है
- Young Indian की फंडिंग के स्रोत, बोर्ड मीटिंग्स और निर्णय प्रक्रिया की जांच होगी
- यदि दस्तावेज़ीय साक्ष्य मजबूत मिले, तो कुछ आरोपी व्यक्तियों से पूछताछ और संभावित गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं
कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला लंबा चलेगा, और इसमें कई राजनीतिक मोड़ आने बाकी हैं।
निष्कर्ष: नेशनल हेराल्ड केस का नया अध्याय—राजनीतिक संग्राम और तेज़ होगा
नई FIR ने नेशनल हेराल्ड मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। सत्ता पक्ष इसे “सबसे बड़ा राजनीतिक–आर्थिक घोटाला” बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे “संविधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग” कह रहा है। संसद सत्र की दहलीज़ पर दर्ज यह FIR आने वाले दिनों में
- सियासी बयानबाज़ी
- सड़क से संसद तक टकराव
- और कानूनी लड़ाई को और तीखा करेगी।
कह सकते हैं कि नेशनल हेराल्ड केस का यह अध्याय अभी लंबा चलने वाला है— और इसके राजनीतिक प्रभाव 2024 चुनाव के बाद भी कम नहीं होने वाले।



