By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: लिपुलेख से चीन-भारत व्यापार पर नेपाल की आपत्ति, भारत ने कड़ा जवाब दिया
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > फीचर्ड > लिपुलेख से चीन-भारत व्यापार पर नेपाल की आपत्ति, भारत ने कड़ा जवाब दिया
फीचर्डविदेश

लिपुलेख से चीन-भारत व्यापार पर नेपाल की आपत्ति, भारत ने कड़ा जवाब दिया

The Hill India News
Last updated: August 21, 2025 2:03 am
The Hill India News
Published: August 21, 2025
Share
SHARE

नई दिल्ली। भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे के ज़रिए सीमा व्यापार फिर से शुरू करने पर सहमति बनने के बाद नेपाल ने इस पर कड़ा एतराज़ जताया है। नेपाल ने बुधवार को कहा कि लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी क्षेत्र उसका अविभाज्य हिस्सा है और इन्हें आधिकारिक मानचित्र में भी शामिल किया गया है। नेपाल के इस दावे पर भारत ने सख्त प्रतिक्रिया दी है और इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है।

Contents
भारत का आधिकारिक जवाबनेपाल की आपत्ति क्यों?भारत-नेपाल सीमा विवाद की पृष्ठभूमिचीन की भूमिका और सामरिक महत्वआगे क्या?

भारत का आधिकारिक जवाब

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि लिपुलेख दर्रे के ज़रिए भारत और चीन के बीच व्यापार कोई नई बात नहीं है। यह सीमा व्यापार 1954 से शुरू हुआ था और दशकों तक बिना किसी रुकावट के जारी रहा। हाल के वर्षों में कोरोना महामारी और अन्य कारणों से इसमें बाधा आई थी, लेकिन अब दोनों देशों ने इसे फिर से शुरू करने का फैसला किया है।
जायसवाल ने नेपाल के दावे को “न तो उचित और न ही ऐतिहासिक तथ्यों तथा साक्ष्यों पर आधारित” बताया। उन्होंने साफ कहा कि भारत अपने संप्रभु अधिकारों और सीमा के मुद्दों पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।

नेपाल की आपत्ति क्यों?

दरअसल, 2020 में नेपाल की संसद ने एक संशोधित राजनीतिक मानचित्र पारित किया था, जिसमें लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी क्षेत्र को शामिल किया गया था। नेपाल का दावा है कि ये इलाके उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
नेपाल सरकार का कहना है कि भारत और चीन का आपसी समझौता उसके संप्रभु अधिकारों का उल्लंघन है और इस पर वह चुप नहीं बैठ सकती। काठमांडू में बुधवार को नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि लिपुलेख नेपाल की सीमा के भीतर है और किसी भी तरह का समझौता नेपाल की सहमति के बिना मान्य नहीं होगा।

भारत-नेपाल सीमा विवाद की पृष्ठभूमि

भारत-नेपाल सीमा विवाद कोई नया नहीं है। 2019 में भारत ने नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में दर्शाया गया था। इसी नक्शे में लिपुलेख और कालापानी को उत्तराखंड का हिस्सा दिखाया गया, जिस पर नेपाल ने आपत्ति जताई थी।
इसके बाद नेपाल ने भी नया मानचित्र जारी कर इन इलाकों पर दावा ठोंका। तब से दोनों देशों के बीच समय-समय पर इस मुद्दे पर तनाव बना रहता है। हालांकि, द्विपक्षीय संबंधों को बचाए रखने के लिए दोनों पक्ष बातचीत की टेबल पर भी बैठते रहे हैं।

चीन की भूमिका और सामरिक महत्व

लिपुलेख दर्रा केवल व्यापारिक नहीं बल्कि सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह मार्ग उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले को तिब्बत के तराई क्षेत्र से जोड़ता है और इसे भारत-चीन-नेपाल त्रिकोणीय जंक्शन के पास माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की आपत्तियाँ केवल ऐतिहासिक विवाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें चीन की अप्रत्यक्ष भूमिका भी हो सकती है। चीन और नेपाल के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक साझेदारी बढ़ी है और भारत नहीं चाहता कि इस क्षेत्र में तीसरे पक्ष का दखल बढ़े।

आगे क्या?

भारत और चीन के बीच इस समझौते के बाद अब नेपाल की प्रतिक्रिया ने फिर से विवाद को हवा दे दी है। हालांकि भारत ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया है कि नेपाल के साथ संबंध उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और दोनों देशों के बीच “रोटी-बेटी के रिश्ते” हैं।
लेकिन साथ ही भारत ने साफ कर दिया है कि सीमा और संप्रभुता से जुड़े मामलों पर वह किसी भी दबाव या दावा को स्वीकार नहीं करेगा।

लिपुलेख दर्रे को लेकर भारत, नेपाल और चीन के बीच यह त्रिकोणीय विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। जहाँ भारत अपने ऐतिहासिक और कानूनी अधिकार का दावा करता है, वहीं नेपाल इसे अपने मानचित्र में दिखाकर संप्रभुता का सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कूटनीति की मेज पर यह विवाद किस तरह सुलझता है, क्योंकि फिलहाल दोनों देशों के रिश्तों में एक नई तल्खी देखने को मिल रही है।

You Might Also Like

भारतीय नौसेना कि इन पांच महिला अधिकारियों ने रचा इतिहास
उत्तराखंड में संस्कृत संरक्षण की ऐतिहासिक पहल: सीएम धामी ने 13 जिलों में 13 ‘आदर्श संस्कृत ग्राम’ किए शुभारंभ
जीते-जी अपनी ही तेहरवीं कर रहा शिवपुरी का बुजुर्ग, अपनों की बेरुखी ने तोड़ दिया दिल
हरिद्वार में ‘जादू’ से नोट छापने का झांसा देकर विधवा से ठगे 9.30 लाख; मेरठ के तीन जालसाजों पर मुकदमा दर्ज
मैथ्स में सिर्फ 51 नंबर, ISRO की नौकरी छोड़ी और रच दिया इतिहास: जानिए भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ के पीछे पवन कुमार चंदना की प्रेरणादायक कहानी
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्डराजनीति

मांजलपुर उपचुनाव में BJP की शानदार जीत: सतीश पटेल ने 30 हजार से अधिक वोटों से कांग्रेस को हराया, गुजरात में कमल फिर खिला

The Hill India News
The Hill India News
August 3, 2026
ITR Refund का इंतजार खत्म कब होगा? जानिए इनकम टैक्स रिफंड की पूरी प्रक्रिया, कितने दिनों में मिलेगा पैसा और किन वजहों से हो सकती है देरी
पप्पू यादव के भगवा प्रदर्शन पर INDIA गठबंधन में दरार! सपा ने किया किनारा, राम मंदिर मुद्दे पर विपक्ष के अलग-अलग सुर आए सामने
NEET पेपर लीक आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: ‘छात्रों को मिलेगा न्याय, लेकिन अपराधियों को नहीं मिलेगी कोई राहत’; FIR, पुलिस कार्रवाई और जांच पर कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
JPSC परीक्षा विवाद ने पकड़ा तूल: हजारों अभ्यर्थी सड़कों पर, परीक्षा रद्द करने से लेकर CBI जांच तक उठीं बड़ी मांगें
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट गंभीर: क्या बदलेगा विरोध प्रदर्शन का केंद्र? केंद्र सरकार से मांगा जवाब
बृज भूषण शरण सिंह को बड़ी राहत: कोर्ट से बरी होने के बाद बोले— “अगर एक भी आरोप साबित होता तो खुद फांसी पर लटक जाता”
ऐतिहासिक फैसला! राष्ट्रपति मुर्मू ने एंटी-पेपर लीक कानून को दी मंजूरी, अब 2 महीने में जांच, 3 महीने में फैसला और 10 साल तक की जेल
गलत नंबर पर हो गया मोबाइल रिचार्ज? घबराएं नहीं! Airtel और Jio यूजर्स ऐसे वापस पा सकते हैं अपने पैसे, जानिए पूरा प्रोसेस
संसद के ‘भगवा प्रदर्शन’ पर कानूनी शिकंजा: राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज, धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?