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नैनीताल में ‘आदमखोर’ का खौफ: 15 दिनों में दूसरी महिला को बनाया निवाला, धारी क्षेत्र में दहशत के बीच ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

The Hill India News
Last updated: January 11, 2026 1:03 pm
The Hill India News
Published: January 11, 2026
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प्रतीकात्मक फोटो
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नैनीताल। देवभूमि उत्तराखंड के शांत पर्वतीय अंचल नैनीताल में इन दिनों वन्यजीवों और मानव के बीच संघर्ष चरम पर है। जिले के भीमताल और धारी ब्लॉक के गांवों में नैनीताल गुलदार का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोग अब अपने ही घरों और खेतों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पिछले 15 दिनों के भीतर गुलदार ने हमले की तीन बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया है, जिसमें दो महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी है। ताजा घटना ने पूरे क्षेत्र में मातम और आक्रोश पैदा कर दिया है।

Contents
घास लेने गई महिला पर घात लगाकर हमला2 किलोमीटर दूर मिला क्षत-विक्षत शव15 दिन, 3 हमले और 2 मौतें: खौफ के साये में भीमताल-धारीग्रामीणों का भारी हंगामा, वन विभाग के खिलाफ नारेबाजीक्या है मानव-वन्यजीव संघर्ष की वजह? (विशेषज्ञों की राय)प्रशासन और वन विभाग की आगामी रणनीतिसुरक्षा के इंतजाम या महज आश्वासन?

घास लेने गई महिला पर घात लगाकर हमला

शनिवार की सुबह धारी क्षेत्र के खुटियाखाल (गैरखांड) गांव में उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब 30 वर्षीय गंगा देवी पत्नी जीवन चंद्र पर गुलदार ने जानलेवा हमला कर दिया। परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गंगा देवी अन्य महिलाओं के साथ सुबह के वक्त मवेशियों के लिए चारा (घास) लेने पास के जंगल की ओर गई थीं।

झाड़ियों में घात लगाकर बैठे गुलदार ने अचानक गंगा देवी पर हमला किया और उन्हें घसीटते हुए जंगल की गहरी खाइयों की ओर ले गया। साथ गई महिलाओं के शोर मचाने पर जब तक ग्रामीण एकत्र हुए, तब तक गुलदार महिला को काफी दूर ले जा चुका था। सूचना मिलते ही ग्रामीण और राजस्व पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और खोजबीन शुरू की।

2 किलोमीटर दूर मिला क्षत-विक्षत शव

घंटों की तलाश के बाद गांव से लगभग 2 किलोमीटर दूर जंगल के भीतर गंगा देवी का शव बरामद हुआ। शव की हालत देखकर ग्रामीणों का कलेजा कांप उठा। घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और छोटे बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया है।

धारी के उपजिलाधिकारी (SDM) अंशुल भट्ट ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मृतका के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रशासन की ओर से नियमानुसार मुआवजे की कार्रवाई की जा रही है।


15 दिन, 3 हमले और 2 मौतें: खौफ के साये में भीमताल-धारी

नैनीताल के इस पहाड़ी बेल्ट में भीमताल वन्यजीव हमला अब एक दुखद दिनचर्या बनता जा रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति भयावह है:

  1. पहली घटना: 15 दिन पहले एक महिला पर हमला हुआ, जिसमें वह बाल-बाल बचीं।

  2. दूसरी घटना: कुछ ही दिन पूर्व एक अन्य महिला गुलदार का शिकार बनी।

  3. तीसरी घटना: आज गंगा देवी की मौत ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हालांकि, वन विभाग का दावा है कि उन्होंने हाल ही में पहाड़पानी क्षेत्र से एक गुलदार को रेस्क्यू कर रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर भेजा था। लेकिन, ताजा हमले से यह स्पष्ट हो गया है कि क्षेत्र में एक से अधिक गुलदार सक्रिय हैं या फिर आदमखोर की समस्या अभी सुलझी नहीं है।

ग्रामीणों का भारी हंगामा, वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी

गंगा देवी की मौत की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों का धैर्य जवाब दे गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग केवल पिंजरा लगाने की खानापूर्ति करता है, जबकि ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस गश्त (Patrolling) नहीं की जा रही है।

स्थानीय निवासियों का कहना है, “हम अपने बच्चों को स्कूल भेजने और खुद खेतों में जाने से डर रहे हैं। क्या प्रशासन हमारी मौतों का इंतज़ार कर रहा है? जब तक इस आदमखोर को पकड़ा या मारा नहीं जाता, हमारा विरोध जारी रहेगा।”


क्या है मानव-वन्यजीव संघर्ष की वजह? (विशेषज्ञों की राय)

उत्तराखंड के इस हिस्से में उत्तराखंड गुलदार हमला बढ़ने के पीछे पर्यावरण विशेषज्ञ कई कारण मानते हैं:

  • प्राकृतिक आवास में कमी: जंगलों के बीच बढ़ते अतिक्रमण और निर्माण कार्यों के कारण वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं।

  • भोजन का अभाव: वनों में जंगली सुअर और काकड़ जैसे जानवरों की कमी होने के कारण गुलदार पालतू मवेशियों और इंसानों को निशाना बना रहे हैं।

  • सर्दियों का मौसम: ठंड के दिनों में गुलदार अक्सर धूप और आसान शिकार की तलाश में निचले इलाकों और बस्तियों के करीब आ जाते हैं।

प्रशासन और वन विभाग की आगामी रणनीति

बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ाने का निर्णय लिया है। मुख्य वन संरक्षक (Kumaon) के निर्देशों पर प्रभावित क्षेत्र में अतिरिक्त पिंजरे लगाए जा रहे हैं और हाई-डेफिनिशन कैमरा ट्रैप्स के जरिए गुलदार की मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। एसडीएम अंशुल भट्ट ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे और प्रभावित परिवार को आर्थिक सहायता जल्द मुहैया कराई जाएगी।


सुरक्षा के इंतजाम या महज आश्वासन?

नैनीताल जिले का धारी क्षेत्र दहशत के ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ हर आहट पर लोग सहम जाते हैं। 15 दिनों में दो महिलाओं की जान जाना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है। अब गेंद सरकार और वन विभाग के पाले में है कि वे कैसे इस आदमखोर गुलदार के आतंक से जनता को निजात दिलाते हैं।

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