उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड के विकास को पंख लगाएगा नाबार्ड: ₹65,916 करोड़ के ‘स्टेट फोकस पेपर 2026-27’ का विमोचन, ऋण क्षमता में 20% का उछाल

देहरादून: उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत कर दिया है। मंगलवार को देहरादून में आयोजित ‘स्टेट क्रेडिट सेमिनार’ के दौरान स्टेट फोकस पेपर 2026-27 का आधिकारिक विमोचन किया गया। मुख्य सचिव श्री आनंद बर्धन ने राज्य के लिए कुल ₹65,916 करोड़ की प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता का आकलन पेश किया, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 20.51% की प्रभावशाली वृद्धि दर्शाता है।

ऋण क्षमता का खंडवार विवरण: MSME और कृषि पर जोर

नाबार्ड द्वारा तैयार किए गए इस दस्तावेज में राज्य के विकास के लिए ऋण वितरण की प्राथमिकताएं तय की गई हैं। कुल ₹65,916 करोड़ के अनुमानित ऋण प्रवाह में से प्रमुख हिस्सेदारी इस प्रकार है:

  • एमएसएमई (MSME) क्षेत्र: ₹36,761.17 करोड़ (ग्रामीण उद्योगों और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने हेतु)

  • कृषि क्षेत्र: ₹23,248.82 करोड़ (आधुनिक खेती और बुनियादी ढांचे के लिए)

  • अन्य प्राथमिक क्षेत्र: ₹5,906.27 करोड़ (शिक्षा, आवास और सामाजिक बुनियादी ढांचे हेतु)

मुख्य सचिव की चिंता: CD रेशियो और पलायन पर प्रहार

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने नाबार्ड के प्रयासों की सराहना करते हुए राज्य की आर्थिक चुनौतियों पर भी खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहे पलायन को रोकने और जल संकट को दूर करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि उत्तराखंड का क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) अनुपात अब भी काफी कम है।

मुख्य सचिव ने बैंकिंग क्षेत्र से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं में अपनी भागीदारी बढ़ाएं ताकि आर्थिक विकास का लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुँच सके। उन्होंने विशेष रूप से उत्तराखंड के 29 भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादकों को इन पारंपरिक उत्पादों का वास्तविक आर्थिक लाभ दिलाने के लिए बेहतर बाजार लिंकेज और ऋण सुविधा की आवश्यकता है।

नाबार्ड की नई पहल: ‘पायलट प्रोजेक्ट्स’ से बदलेगी तस्वीर

नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) श्री पंकज यादव ने सेमिनार को संबोधित करते हुए आगामी वित्तीय वर्ष के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:

  1. प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (चम्पावत): चम्पावत जिले में वन पंचायतों के सहयोग से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है, जो समुदाय आधारित आजीविका का मॉडल बनेगा।

  2. महिला सशक्तिकरण (उत्तरकाशी): उत्तरकाशी में महिला किसानों के श्रम को कम करने के लिए आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध कराने की विशेष योजना शुरू की गई है।

  3. डिजिटल क्रांति: Agri Stack और e-KCC के माध्यम से ऋण वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और किसानों के लिए सुलभ बनाया जाएगा।

“वन-अम्मा” की प्रेरणा: संरक्षण से समृद्धि तक

सेमिनार का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण “वन-अम्मा” के नाम से विख्यात श्रीमती भगिरथी देवी का संबोधन रहा। चम्पावत के मनर गाँव की 80 वर्षीया भगिरथी देवी ने अपनी मेहनत से 12 हेक्टेयर बंजर भूमि को घने जंगल में तब्दील कर दिया है। उन्होंने बताया कि कैसे वन संरक्षण ने न केवल पर्यावरण को बचाया बल्कि सूख चुके जलस्रोतों को भी पुनर्जीवित किया। उनकी उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि ग्रामीण विकास के लिए पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण अनिवार्य है।

कृषि अवसंरचना निधि (AIF) में बड़ा निवेश

नाबार्ड के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा कृषि अवसंरचना निधि (AIF) को ₹1 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹2 लाख करोड़ किए जाने का सीधा लाभ उत्तराखंड को मिलेगा। इससे कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट्स और वैल्यू एडिशन केंद्रों की स्थापना में मदद मिलेगी, जिससे किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को गति मिलेगी।

बैंकिंग क्षेत्र के लिए रणनीतिक मार्गदर्शक

यह स्टेट फोकस पेपर 2026-27 जिला स्तर की ऋण योजनाओं (PLP) का समेकित रूप है। यह राज्य के सभी वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों के लिए एक मार्गदर्शक का कार्य करेगा। कार्यक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक, SBI, PNB और राज्य सहकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और ऋण प्रवाह बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।


नाबार्ड का यह ‘स्टेट फोकस पेपर’ केवल एक ऋण दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के सतत और समावेशी विकास का एक खाका है। यदि बैंक और सरकारी विभाग समन्वय के साथ इस ऋण क्षमता का उपयोग करते हैं, तो यह न केवल पलायन रोकेगा बल्कि राज्य को एक नई आर्थिक ऊँचाई पर ले जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button