
रामनगर/नैनीताल: उत्तराखंड की शांत वादियों में इन दिनों पर्यटन की नहीं, बल्कि ‘मदिरा’ की सियासत उफान पर है। नैनीताल जनपद के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में प्रस्तावित विदेशी मदिरा की नई दुकानों को लेकर राज्य सरकार अपनों और विरोधियों, दोनों के निशाने पर आ गई है। जहां एक ओर पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और वरिष्ठ भाजपा सांसद अजय भट्ट ने जनभावनाओं का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर दुकानें निरस्त करने की मांग की है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने इसे राज्य सरकार की दिशाहीन नीति करार दिया है।
सांसद अजय भट्ट की दो टूक: ‘कैंची धाम की मर्यादा और छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि’
नैनीताल-उधम सिंह नगर संसदीय क्षेत्र के सांसद अजय भट्ट ने शासन स्तर पर रातीघाट, मंगोली और बजून क्षेत्रों में शराब की दुकानें खोलने की प्रक्रिया पर कड़ा ऐतराज जताया है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र और दूरभाष पर हुई वार्ता में भट्ट ने स्पष्ट किया कि ये क्षेत्र केवल ग्रामीण बाजार नहीं हैं, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों की सामाजिक और शैक्षिक गतिविधियों का केंद्र हैं।
सांसद भट्ट ने अपने तर्क में तीन प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित किया:
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धार्मिक संवेदनशीलता: प्रस्तावित स्थल विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम (बाबा नीब करौरी महाराज) के समीप हैं। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र के पास शराब की दुकान खोलना जनभावनाओं के विरुद्ध है।
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शैक्षिक वातावरण: इन क्षेत्रों में राजकीय इंटर कॉलेज और विद्यालय संचालित हैं। शराब की दुकानों से छात्रों के भविष्य और शैक्षिक माहौल पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
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महिला सुरक्षा: ग्रामीण बाजारों में महिलाओं की आवाजाही अधिक रहती है, ऐसे में मदिरा की दुकान खुलने से सामाजिक असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है।
रणजीत सिंह रावत का तीखा हमला: ‘शिक्षा पर ताला, शराब पर जोर’
इस विवाद में कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत ने सरकार को घेरते हुए बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। रावत ने सरकार की प्राथमिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तराखंड में विकास का पैमाना ‘शिक्षा’ के बजाय ‘शराब’ बनता जा रहा है।
रणजीत सिंह रावत ने आंकड़ों के हवाले से कहा:
“यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक तरफ प्रदेश में डेढ़ सौ से अधिक सरकारी इंटर कॉलेज बंद हो चुके हैं या बंद होने की कगार पर हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार हर साल सैकड़ों नई शराब की दुकानों का लक्ष्य निर्धारित कर रही है। सरकार को स्कूल खोलने की चिंता नहीं है, लेकिन गली-कूचे में ठेके खोलने की जल्दबाजी है।”
उन्होंने नैनीताल जिले के मालधन और पाटकोट क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले वर्ष भी जनता ने सड़कों पर उतरकर विरोध किया था। तब सरकार ने दुकानें बंद करने का आश्वासन दिया था, लेकिन वादे खोखले साबित हुए। रावत ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर बजट और प्रस्तावों में उल्लेख न होने के बावजूद गुपचुप तरीके से दुकानें खोल दी जाती हैं।
सियासी एकजुटता: जब विपक्षी और सत्ताधारी एक सुर में बोले
उत्तराखंड की राजनीति में यह दुर्लभ नजारा है कि उत्तराखंड शराब नीति विरोध 2026 के मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के नेता एक ही धरातल पर खड़े नजर आ रहे हैं। रणजीत सिंह रावत ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, अरविंद पांडे और अन्य भाजपा जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया, जो अपनी ही सरकार की आबकारी नीति के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
रावत ने कहा कि जब जनमुद्दों की बात आती है, तो दलीय राजनीति से ऊपर उठकर एकजुटता जरूरी है। उन्होंने ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मालधन द्वारा एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी कि यदि इन दुकानों को निरस्त नहीं किया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ता जनआक्रोश
रातीघाट, मंगोली और बजून जैसे क्षेत्रों में स्थानीय महिलाएं और युवा संगठन पहले से ही लामबंद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे देवभूमि की संस्कृति को शराब के नशे में डूबने नहीं देंगे। ग्रामीण बाजारों में शराब की दुकानों का विरोध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का मानना है कि यदि शासन ने अपनी जिद नहीं छोड़ी, तो यह मुद्दा आगामी चुनावों में सरकार के लिए गले की फांस बन सकता है।
आबकारी विभाग और शासन की चुप्पी
फिलहाल, आबकारी विभाग और शासन के उच्च अधिकारियों ने इस विरोध पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि राजस्व लक्ष्य को पूरा करने के दबाव में नई दुकानें प्रस्तावित की गई हैं। लेकिन सांसद अजय भट्ट के हस्तक्षेप के बाद अब गेंद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पाले में है। क्या सरकार अपने ही वरिष्ठ सांसद की सलाह मानकर दुकानें निरस्त करेगी या राजस्व की खातिर जनविरोध को दरकिनार करेगी, यह आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।
उत्तराखंड शराब नीति विरोध 2026 ने राज्य की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ राजस्व का दबाव है, तो दूसरी तरफ कैंची धाम जैसी पवित्र जगहों की मर्यादा और युवाओं का भविष्य। अजय भट्ट और रणजीत सिंह रावत जैसे दिग्गजों का एक सुर में बोलना यह संकेत देता है कि उत्तराखंड की जनता अब ‘शराब बनाम सरोकार’ की लड़ाई लड़ने को तैयार है। देवभूमि की इस ‘मधुशाला पॉलिटिक्स’ का ऊंट किस करवट बैठता है, इस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं।



