
हरियाणा के फरीदाबाद से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने जहां इंसानियत को शर्मसार किया है, वहीं बेजुबान जानवरों की वफादारी ने सबका दिल जीत लिया है। बल्लभगढ़ की कबूलपुर कॉलोनी में रहने वाली 45 वर्षीय अनीता देवी की हत्या का मामला किसी पुलिसिया जांच या तकनीकी सुराग से नहीं, बल्कि दो आवारा कुत्तों की सूझबूझ और वफादारी से सुलझा।
अनीता देवी बीते 15 अप्रैल से अचानक लापता हो गई थीं। परिवार वालों ने उन्हें हर जगह तलाशा, रिश्तेदारों से संपर्क किया, लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगा। दिन बीतते गए और परिवार की चिंता बढ़ती गई। इस बीच, इलाके में रहने वाले दो आवारा कुत्ते ‘शेरू’ और ‘रॉकी’, जिन्हें अनीता रोज अपने हाथों से खाना खिलाती थीं, असामान्य व्यवहार करने लगे। वे उदास और बेचैन दिखाई देते थे, मानो उन्हें कुछ अनहोनी का आभास हो।
18 अप्रैल को जब अनीता के परिजन मोहला गांव के पास एक नाले के आसपास उनकी तलाश कर रहे थे, तभी अचानक शेरू और रॉकी तेजी से झाड़ियों की ओर दौड़ पड़े और जोर-जोर से भौंकने लगे। शुरुआत में परिवार ने इसे सामान्य प्रतिक्रिया समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन कुत्तों की लगातार हरकतों ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया। जब परिवार के सदस्य उनके पीछे गए, तो वहां अनीता की साड़ी का एक हिस्सा मिला, जिससे शक गहरा गया।
इसके बाद जो हुआ, उसने सभी को स्तब्ध कर दिया। शेरू अचानक नाले में कूद गया, जो जलकुंभी से भरा हुआ था। उसकी इस हरकत से पानी के भीतर छिपा अनीता देवी का शव नजर आने लगा। यह दृश्य देखकर परिवार के होश उड़ गए और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को बाहर निकाला और जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को जो जानकारी मिली, वह बेहद चौंकाने वाली थी। अनीता की हत्या किसी अजनबी ने नहीं, बल्कि उनके ही पड़ोस में रहने वाले पिता-पुत्र ने मिलकर की थी। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी परमजीत 15 अप्रैल को गैस सिलेंडर देने के बहाने अनीता के घर पहुंचा। इसके बाद उसने बिजली बिल जमा कराने का बहाना बनाकर उन्हें अपने साथ बाइक पर बैठा लिया।
रास्ते में आरोपी ने अनीता की बेरहमी से हत्या कर दी। बाद में अपने पिता जगमिंदर डागर के साथ मिलकर शव को नाले में फेंक दिया और उसे जलकुंभी से ढक दिया, ताकि किसी को शक न हो। लेकिन कातिलों की यह चाल ज्यादा समय तक नहीं चल सकी और बेजुबान कुत्तों की वफादारी ने सच को उजागर कर दिया।
पुलिस प्रवक्ता यशपाल सिंह ने बताया कि इस मामले में आरोपी पिता जगमिंदर डागर को गिरफ्तार कर लिया गया है और अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। हालांकि, मुख्य आरोपी परमजीत अभी भी फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस का मानना है कि परमजीत की गिरफ्तारी के बाद ही हत्या के पीछे के असली मकसद का खुलासा हो सकेगा।
यह घटना एक ओर जहां अपराध की भयावहता को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर यह भी साबित करती है कि इंसानों से ज्यादा वफादारी कभी-कभी जानवर निभा जाते हैं। ‘शेरू’ और ‘रॉकी’ की इस बहादुरी और वफादारी की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। लोग इन बेजुबान जानवरों को सलाम कर रहे हैं, जिन्होंने अपनी मालकिन के लिए ‘नमक का हक’ अदा करते हुए इंसाफ दिलाने में अहम भूमिका निभाई।



