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देहरादून जिला प्रशासन की पहल: उत्तराखंड का पहला राजकीय मॉडल नशामुक्ति केंद्र 1 नवम्बर से होगा संचालित, एम्स ऋषिकेश से जुड़ा रहेगा ट्रीटमेंट नेटवर्क

The Hill India News
Last updated: October 30, 2025 2:30 am
The Hill India News
Published: October 30, 2025
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देहरादून, 29 अक्टूबर 2025 | नशे की गिरफ्त से युवाओं को बाहर लाने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रेरणा से देहरादून जिला प्रशासन ने उत्तरी भारत का पहला राजकीय मॉडल नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित किया है, जो 1 नवम्बर से रायवाला में संचालन शुरू करेगा। यह केंद्र “एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी” से लैस है और इसमें परामर्श, चिकित्सीय उपचार और पुनर्वास सहायता की सभी सेवाएं एक ही नंबर पर उपलब्ध होंगी।

Contents
एक ही फोन नंबर पर परामर्श से पुनर्वास तक की सेवामॉडल केंद्र बनेगा राष्ट्रीय उदाहरणब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण और स्कूलों में जागरूकताएम्स ऋषिकेश का सहयोग बनेगा सफलता की कुंजी“नशामुक्त दून” — जनसहभागिता से प्रशासन की मुहिमएकीकृत तंत्र के साथ नई सोचबैठक में प्रमुख अधिकारी उपस्थित

इस महत्वाकांक्षी पहल का संचालन ‘सोसायटी प्रमोशन ऑफ यूथ एंड मासेस’ (SPYM) को सौंपा गया है, जिसे जिला प्रशासन ने मात्र दो माह में चयनित किया। केंद्र का भवन जिला प्रशासन द्वारा निर्मित कराया गया है, जबकि चिकित्सा सहयोग के लिए एम्स ऋषिकेश के साथ औपचारिक टाईअप भी किया गया है। इस समझौते के तहत एम्स में 10 बेड विशेष रूप से इस उद्देश्य के लिए आरक्षित किए गए हैं, जहां नशे के आदी व्यक्तियों को परामर्श और चिकित्सीय उपचार दोनों मिलेंगे।


एक ही फोन नंबर पर परामर्श से पुनर्वास तक की सेवा

राजकीय मॉडल नशामुक्ति केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता इसकी एकीकृत संरचना है। जिले का कोई भी व्यक्ति जल्द जारी किए जाने वाले एकल हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके तत्काल सहायता प्राप्त कर सकेगा — चाहे वह नशे की समस्या से जूझ रहा हो या किसी ऐसे व्यक्ति की मदद करना चाहता हो जो नशे की गिरफ्त में है।
कॉल प्राप्त होते ही विशेषज्ञ काउंसलर द्वारा प्रारंभिक परामर्श दिया जाएगा, और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा या पुनर्वास केंद्र से सीधे संपर्क कराया जाएगा। इस व्यवस्था को “वन स्टॉप एडिक्शन सपोर्ट सिस्टम” कहा जा रहा है।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि यह केंद्र केवल उपचार स्थल नहीं, बल्कि “समग्र पुनर्वास मॉडल” है, जिसमें मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक पुनर्स्थापन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा,

“हमारा लक्ष्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को नशे की गिरफ्त से पूरी तरह मुक्त करके समाज में पुनर्स्थापित करना है। इसके लिए चिकित्सक, परामर्शदाता, मनोवैज्ञानिक और स्वयंसेवी संस्थाएँ एक साथ काम करेंगी।”


मॉडल केंद्र बनेगा राष्ट्रीय उदाहरण

देहरादून जिला प्रशासन का यह प्रयास पूरे उत्तर भारत के लिए एक मॉडल साबित हो सकता है। देश में नशा नियंत्रण के कई गैर-सरकारी प्रयास पहले से मौजूद हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर इस तरह की समेकित पहल पहली बार की जा रही है।
जिलाधिकारी बंसल ने कहा कि जिला प्रशासन ने “मॉडल नशामुक्ति केंद्र” को केन्द्र सरकार के नवचेतना मॉडल से भी जोड़ा है, जिसके तहत स्कूलों में नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रमों का वृहद अभियान शुरू किया जाएगा।

उन्होंने कहा,

“नशे की लत केवल व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक चुनौती है। इसका समाधान जनभागीदारी से ही संभव है। हम हर ब्लॉक, हर स्कूल और हर समुदाय तक यह संदेश पहुंचाएंगे कि नशे से मुक्ति संभव है, बशर्ते समाज साथ खड़ा हो।”


ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण और स्कूलों में जागरूकता

बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि ब्लॉकवार शेड्यूल तैयार कर एएनएम, आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वयं सहायता समूहों को नशामुक्ति प्रशिक्षण दिया जाए।
इन प्रशिक्षणों का उद्देश्य समुदाय स्तर पर ऐसे व्यक्तियों की पहचान और सहायता करना होगा जो नशे की समस्या से जूझ रहे हैं।

साथ ही, जिले के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में स्कूल नशामुक्ति क्लब गठित किए जाएंगे, जहां बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित किया जाएगा। “नवचेतना” मॉडल के तहत जागरूकता कार्यक्रम, पोस्टर प्रतियोगिताएं, वीडियो सत्र और छात्र परामर्श शिविर आयोजित होंगे।

जिलाधिकारी ने कहा कि बचपन और किशोरावस्था में नशे की रोकथाम सबसे प्रभावी होती है, इसलिए शिक्षा विभाग के सहयोग से स्कूलों को अभियान का केंद्र बनाया जा रहा है।


एम्स ऋषिकेश का सहयोग बनेगा सफलता की कुंजी

इस पहल का एक महत्वपूर्ण आयाम एम्स ऋषिकेश का सहयोग है। एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों और परामर्शदाताओं की टीम इस केंद्र के साथ तकनीकी मार्गदर्शन और चिकित्सीय सहायता प्रदान करेगी।
एम्स में आरक्षित 10 बेड पर उन मरीजों का उपचार होगा जिन्हें अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता होगी।

समाज कल्याण विभाग और SPYM संस्था की टीम केंद्र स्तर पर निरंतर फॉलोअप, काउंसलिंग और रिकवरी सपोर्ट की जिम्मेदारी संभालेगी।


“नशामुक्त दून” — जनसहभागिता से प्रशासन की मुहिम

जिला प्रशासन ने नशा उन्मूलन को केवल सरकारी कार्यक्रम न बनाकर “जनआंदोलन” का रूप देने का निर्णय लिया है।
इस मुहिम के तहत स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं, धार्मिक संगठनों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों से भी जुड़ने की अपील की जाएगी। कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में “यूथ एगेंस्ट ड्रग्स” क्लब बनाए जाएंगे, जो छात्रों के बीच जागरूकता फैलाने में मदद करेंगे।

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने कहा कि यह मॉडल राज्य ही नहीं, बल्कि देश के अन्य जिलों के लिए भी एक व्यवहारिक उदाहरण बनेगा। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति के लिए सामाजिक पुनर्वास सबसे अहम है, क्योंकि “इलाज के बाद व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन की ओर लौटाना ही असली सफलता है।”


एकीकृत तंत्र के साथ नई सोच

देहरादून प्रशासन का “राजकीय मॉडल नशामुक्ति केंद्र” केवल एक संस्थागत परियोजना नहीं, बल्कि नशा मुक्ति के लिए नीति-आधारित बदलाव की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
इससे सरकारी और सामाजिक संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ेगा और नशे की समस्या से जूझ रहे व्यक्तियों को समयबद्ध सहायता मिल सकेगी।

जिलाधिकारी बंसल ने कहा,

“यह केंद्र प्रशासन की संवेदनशीलता और उत्तराखंड सरकार की दूरदृष्टि का परिणाम है। दून को नशामुक्त बनाने का सपना तभी साकार होगा जब समाज और शासन मिलकर कार्य करें।”


बैठक में प्रमुख अधिकारी उपस्थित

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, संस्था SPYM के निदेशक डॉ. राजेश कुमार, समन्वयक आयुषी चौधरी सहित जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।


यह केंद्र न केवल नशे से मुक्ति का माध्यम बनेगा, बल्कि पुनर्वास और पुनर्स्थापन के नए अध्याय की शुरुआत भी करेगा — जिससे “नशामुक्त उत्तराखंड” का सपना साकार हो सके।

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