सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। इसका असर घरेलू शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया, जहां बाजार खुलते ही बड़े पैमाने पर बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 भी 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। युद्ध जैसे हालात बनने की आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसका सीधा असर उन देशों पर पड़ रहा है जो तेल आयात पर निर्भर हैं। भारत भी अपनी तेल आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि घरेलू अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स 77,600 के आसपास के स्तर तक फिसल गया, जबकि निफ्टी 24,190 के करीब कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती घंटों में ही निवेशकों ने बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और रियल एस्टेट सेक्टर के शेयरों में बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली और बिकवाली की। इससे बाजार का माहौल पूरी तरह नकारात्मक हो गया।
सबसे अधिक दबाव निजी बैंकिंग शेयरों पर देखने को मिला। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और श्रीराम फाइनेंस जैसे प्रमुख शेयर शुरुआती कारोबार में लाल निशान में रहे। इनमें सबसे अधिक गिरावट एचडीएफसी बैंक के शेयर में देखने को मिली, जो लगभग चार प्रतिशत तक टूट गया। बैंक के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों में ऋण वृद्धि और परिसंपत्ति गुणवत्ता अपेक्षाकृत बेहतर रहने के बावजूद उसके मार्जिन में आई गिरावट से निवेशक संतुष्ट नहीं दिखे। कई ब्रोकरेज संस्थानों और बाजार विश्लेषकों ने भी मार्जिन पर चिंता जताई, जिसके कारण शेयर पर दबाव और बढ़ गया।
रियल एस्टेट सेक्टर में भी कमजोरी का असर साफ दिखाई दिया। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। ऊंची ब्याज दरों और निवेशकों की सतर्कता के कारण इस सेक्टर में खरीदारी कमजोर रही। हालांकि, बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच कुछ सेक्टर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते नजर आए। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में लगभग एक प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई। इसके अलावा फार्मा, हेल्थकेयर, मेटल तथा ऑयल एंड गैस सेक्टर में भी सीमित बढ़त देखने को मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक इस समय सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुक रहे हैं। ऐसे समय में दवा, स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा जैसे सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर माने जाते हैं, इसलिए इनमें खरीदारी बनी हुई है।
शेयर बाजार में आई इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट का बढ़ता तनाव माना जा रहा है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों और जवाबी कार्रवाई की खबरों ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर कर दिया है। तेहरान की ओर से दिए गए बयानों के बाद यह आशंका और बढ़ गई है कि क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रह सकता है। यदि तेल आपूर्ति मार्गों पर किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न होता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
इसी आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग तीन प्रतिशत बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी भारत जैसे आयातक देशों के लिए महंगाई, चालू खाते के घाटे और रुपये पर अतिरिक्त दबाव का कारण बन सकती है। यही वजह है कि विदेशी निवेशकों के साथ-साथ घरेलू निवेशक भी फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।
वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी का माहौल देखने को मिला। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी चार प्रतिशत से अधिक टूट गए। हालांकि चीन और हांगकांग के कुछ प्रमुख सूचकांकों में सीमित बढ़त देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर एशियाई बाजारों में निवेशकों का रुझान सतर्क बना रहा। वैश्विक अनिश्चितता का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है। कॉरपोरेट आय, बैंकिंग व्यवस्था और घरेलू निवेश की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर है। इसलिए यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में सुधार होता है तो बाजार दोबारा तेजी की ओर लौट सकता है।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। यदि यह स्तर बरकरार रहता है तो बाजार में निचले स्तरों से खरीदारी देखने को मिल सकती है। वहीं 24,500 का स्तर निकट अवधि में मजबूत रेजिस्टेंस के रूप में काम कर सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे घबराकर बिकवाली करने के बजाय मजबूत कंपनियों के शेयरों पर नजर बनाए रखें और चरणबद्ध तरीके से निवेश की रणनीति अपनाएं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करेंगे। यदि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ऐसी गिरावटें बेहतर गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश का अवसर भी साबित हो सकती हैं।
