
कोलकाता/नई दिल्ली | पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार रात उस वक्त एक नया मोड़ आ गया जब विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने एक बड़ा खुलासा किया। अधिकारी ने पुष्टि की कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की पीड़िता (महिला डॉक्टर) के माता-पिता ने आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के बीच इस घटनाक्रम ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी भाजपा के बीच एक नए राजनीतिक युद्ध को जन्म दे दिया है।
पानीहाटी सीट और उम्मीदवारी पर सस्पेंस
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा अब तक उम्मीदवारों की दो सूचियां जारी कर चुकी है, लेकिन उत्तर 24 परगना जिले की हाई-प्रोफाइल ‘पानीहाटी’ विधानसभा सीट पर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आरजी कर पीड़िता के माता-पिता भाजपा परिवार का हिस्सा तो बन गए हैं, लेकिन चुनाव लड़ने का फैसला पूरी तरह से दिल्ली स्थित केंद्रीय नेतृत्व के अधीन है।
सुवेंदु अधिकारी ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा, “पीड़ित परिवार के किसी सदस्य को पानीहाटी से चुनावी मैदान में उतारा जाएगा या नहीं, इसका निर्णय हमारी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा। राज्य समिति ने अपनी विस्तृत राय और जमीनी फीडबैक केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया है। चूंकि यह एक संवेदनशील मामला है, इसलिए मैं अभी इसका खुलासा नहीं कर सकता। अंतिम निर्णय की घोषणा पार्टी आलाकमान ही करेगा।”
9 अगस्त 2024: वह काली रात जिसने देश को हिला दिया
गौरतलब है कि 9 अगस्त 2024 की सुबह कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल से एक प्रशिक्षु महिला डॉक्टर का क्षत-विक्षत शव बरामद किया गया था। इस घटना ने न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। शुरुआती जांच कोलकाता पुलिस ने की थी, जिसने पूर्व नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को गिरफ्तार किया था।
न्याय की मांग को लेकर हुए देशव्यापी प्रदर्शनों और कलकत्ता उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई थी। सीबीआई ने भी अपनी चार्जशीट में संजय रॉय को ही मुख्य आरोपी माना था।
कानूनी लड़ाई और न्याय की पुकार
इस मामले में कोलकाता की एक निचली अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए संजय रॉय को दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, सीबीआई और पीड़ित परिवार इस सजा से संतुष्ट नहीं थे। सीबीआई ने इस आदेश को कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी है और दोषी के लिए मृत्युदंड (Fanging) की मांग की है।
पीड़िता के माता-पिता का भाजपा में शामिल होना उनके ‘न्याय के संघर्ष’ का एक नया अध्याय माना जा रहा है। परिवार का आरोप रहा है कि राज्य प्रशासन और पुलिस ने शुरुआत में मामले को दबाने की कोशिश की थी। अब भाजपा के मंच से वे इस आवाज को और बुलंद करने की कोशिश कर रहे हैं।
ममता सरकार के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा पानीहाटी सीट से पीड़ित परिवार के किसी सदस्य को उम्मीदवार बनाती है, तो यह चुनाव ‘ममता बनर्जी बनाम न्याय’ की लड़ाई में तब्दील हो सकता है। पानीहाटी पीड़िता का गृह क्षेत्र भी है, जिससे वहां की जनता में भावनात्मक लगाव काफी अधिक है।
सुवेंदु अधिकारी और भाजपा इस मुद्दे को महिला सुरक्षा और राज्य की कानून-व्यवस्था के बड़े प्रतीक के रूप में पेश कर रहे हैं। पार्टी का मानना है कि आरजी कर पीड़िता के माता-पिता भाजपा के साथ आने से उन हजारों प्रदर्शनकारियों और डॉक्टरों को एक राजनीतिक दिशा मिलेगी, जो महीनों से सड़कों पर ‘वी वांट जस्टिस’ के नारे लगा रहे थे।
दिल्ली के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल, गेंद भाजपा के केंद्रीय चुनाव बोर्ड के पाले में है। क्या भाजपा इस भावनात्मक मुद्दे को चुनावी बैलेट पेपर पर उतारने का साहस दिखाएगी? या फिर पीड़ित परिवार केवल प्रचार तक ही सीमित रहेगा? इन सवालों के जवाब आने वाली तीसरी सूची में मिल सकते हैं। लेकिन एक बात साफ है—आरजी कर कांड की गूंज इस विधानसभा चुनाव में सबसे प्रमुख रहने वाली है।



