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उत्तर प्रदेश: मिलावटी आइसक्रीम का बड़ा खुलासा, दूध और मेवा के नाम पर परोसी जा रही थी सेहत से खिलवाड़ करने वाली ठंडी मिठास

महराजगंज जिले में आइसक्रीम में बड़े स्तर पर मिलावट का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न केवल प्रशासन को सतर्क कर दिया है बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। जांच में यह पाया गया कि जिस आइसक्रीम को लोग स्वाद और ताजगी के लिए खा रहे थे, उसमें न तो पर्याप्त मात्रा में दूध मौजूद था और न ही अन्य जरूरी ठोस पदार्थ जैसे मेवा या चेरी। प्रयोगशाला रिपोर्ट में नमूने अधोमानक (फेल) पाए जाने के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया है।

यह मामला तब सामने आया जब लक्ष्मीपुर और नौतनवां क्षेत्र में संचालित एक आइसक्रीम निर्माण इकाई से नमूने लेकर उन्हें परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया। अपर जिलाधिकारी डॉ. प्रशांत कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि जांच रिपोर्ट बेहद चिंताजनक रही। रिपोर्ट के अनुसार, आइसक्रीम में दूध वसा की मात्रा मात्र 0.96 प्रतिशत पाई गई, जबकि नियमानुसार यह कम से कम 10 प्रतिशत होनी चाहिए। इतना ही नहीं, कुल ठोस पदार्थ की मात्रा भी सिर्फ 11.12 प्रतिशत पाई गई, जो निर्धारित 36 प्रतिशत मानक से काफी कम है।

इस गंभीर अनियमितता को देखते हुए संबंधित कारोबारी सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय पर 75,000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। प्रशासन ने इसे आमजन के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए सख्त कार्रवाई का संकेत दिया है। अपर जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को हर हाल में सजा दी जाएगी।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ नमूनों में प्राकृतिक दूध वसा की जगह घटिया और प्रतिबंधित फैट का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा आइसक्रीम को आकर्षक बनाने के लिए अत्यधिक कृत्रिम रंगों का उपयोग भी किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रसायनों का सेवन लंबे समय में गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह अधिक जोखिम भरा है।

इस खुलासे के बाद प्रशासन ने पूरे जिले में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। सिसवा, निचलौल, फरेंदा और नौतनवा जैसे प्रमुख बाजारों में औचक छापेमारी की तैयारी की जा रही है। खासकर उन थोक विक्रेताओं और स्थानीय निर्माताओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है, जो कम कीमत पर घटिया गुणवत्ता की आइसक्रीम बेच रहे हैं।

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से नमूने एकत्र कर उनकी जांच करें और किसी भी तरह की गड़बड़ी मिलने पर तुरंत कार्रवाई करें। साथ ही आम जनता से भी अपील की गई है कि वे सस्ते और संदिग्ध उत्पादों से बचें और केवल प्रमाणित ब्रांड या विश्वसनीय दुकानों से ही खाद्य सामग्री खरीदें।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर कितनी सतर्कता जरूरी है। थोड़े से लालच में कुछ कारोबारी लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं, जो बेहद गंभीर अपराध है। प्रशासन की सख्ती के बावजूद ऐसे मामलों का सामने आना यह दर्शाता है कि निगरानी और जागरूकता दोनों को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

आखिरकार, यह सिर्फ एक जिले का मामला नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। यदि समय रहते ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है। इसलिए जरूरी है कि प्रशासन, कारोबारी और आम नागरिक—तीनों अपनी जिम्मेदारी समझें और सुरक्षित व शुद्ध खाद्य पदार्थों को बढ़ावा दें।

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