वाराणसी में यूपी STF का बड़ा एक्शन: 1 लाख का इनामी सुपारी किलर बनारसी यादव एनकाउंटर में ढेर, 60 करोड़ की जमीन के लिए ली थी सुपारी

वाराणसी: उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ जारी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत यूपी एसटीएफ (UP STF) को एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। वाराणसी के बहुचर्चित कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम हत्याकांड के मुख्य शूटर और एक लाख रुपये के इनामी बदमाश बनारसी यादव को एसटीएफ ने मंगलवार रात एक भीषण मुठभेड़ में मार गिराया। चौबेपुर थाना क्षेत्र के बारियासनपुर रिंग रोड पर हुई इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली है। मौके से दो घातक पिस्टल और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।
166 दिनों का इंतजार और रिंग रोड पर अंत
गाजीपुर के करंडा थाना क्षेत्र के गौरहट का निवासी बनारसी यादव पिछले 166 दिनों से पुलिस और एसटीएफ के लिए सिरदर्द बना हुआ था। 21 अगस्त को सारनाथ के सिंहपुर में बाइक सवार तीन शूटरों ने दिनदहाड़े महेंद्र गौतम की हत्या कर दी थी, जिसमें बनारसी मुख्य भूमिका में था। तब से वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था।
मंगलवार रात एसटीएफ की वाराणसी इकाई को सटीक सूचना मिली कि बनारसी यादव गाजीपुर-वाराणसी हाईवे के रास्ते शहर छोड़कर भागने की फिराक में है। एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने घेराबंदी शुरू की। बारियासनपुर रिंग रोड के पास खुद को घिरा देख शातिर अपराधी ने पुलिस टीम पर फायरिंग झोंक दी। आत्मरक्षार्थ की गई जवाबी फायरिंग में बनारसी को गोलियां लगीं और वह वहीं गिर पड़ा। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
60 करोड़ की जमीन और खूनी सुपारी का खेल
महेंद्र गौतम की हत्या कोई सामान्य रंजिश नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के भूमि विवाद का नतीजा थी। जांच में सामने आया कि गाजीपुर निवासी जोगेंद्र यादव उर्फ ‘फैटू’ ने 60 करोड़ रुपये मूल्य की 29 बिस्वा जमीन पर कब्जे और विवाद के चलते महेंद्र गौतम को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी।
इस खूनी खेल के लिए बनारसी यादव, अरविंद यादव उर्फ फौजी और विशाल नामक तीन शूटरों को सुपारी दी गई थी। प्रत्येक शूटर को दो-दो लाख रुपये और अत्याधुनिक असलहे मुहैया कराए गए थे। वाराणसी एनकाउंटर में मारे गए बनारसी के पास से जो पिस्टल मिली है, उसका कनेक्शन भी मुंगेर से जुड़ा बताया जा रहा है।
अपराध का लंबा इतिहास: 24 से ज्यादा मुकदमे दर्ज
बनारसी यादव उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र का एक कुख्यात नाम बन चुका था। उस पर वाराणसी, गाजीपुर और सोनभद्र सहित कई जिलों में हत्या, लूट, रंगदारी और जानलेवा हमले के 24 से ज्यादा आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। महेंद्र गौतम हत्याकांड के बाद उस पर इनाम की राशि बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई थी।
हत्याकांड के अब तक के घटनाक्रम:
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21 अगस्त: महेंद्र गौतम की सरेराह गोली मारकर हत्या।
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4 जनवरी: मुख्य शूटर अरविंद यादव उर्फ फौजी मुठभेड़ में गिरफ्तार।
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अब: मुख्य सरगना बनारसी यादव एनकाउंटर में ढेर।
मुंगेर से आए थे असलहे, साजिश में शामिल सभी चेहरे बेनकाब
एसटीएफ की तफ्तीश में यह भी साफ हो गया है कि हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार बिहार के मुंगेर निवासी मोहम्मद मुकीम ने उपलब्ध कराए थे। इस हत्याकांड में शामिल लगभग सभी प्रमुख मोहरे अब कानून के शिकंजे में हैं। जोगेंद्र यादव उर्फ फैटू, संपूर्णानंद शुक्ला उर्फ चंदन, श्याम राजभर और असलहा तस्कर मोहम्मद मुकीम फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे हैं।
यूपी एसटीएफ की बढ़ती धमक
वाराणसी की इस मुठभेड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यूपी एसटीएफ अपराधियों की कुंडली खंगालने और उन्हें अंजाम तक पहुँचाने में कितनी मुस्तैद है। स्थानीय लोगों ने इस एनकाउंटर के बाद पुलिस प्रशासन की सराहना की है, विशेषकर उन व्यापारियों और कॉलोनाइजरों ने जो पिछले काफी समय से इस गिरोह के खौफ में थे।
बनारसी यादव का अंत पूर्वांचल के अन्य अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है। यूपी एसटीएफ मुठभेड़ की इस घटना ने साफ कर दिया है कि जरायम की दुनिया में ‘सुपारी’ लेकर किसी की जान लेने वालों का ठिकाना अंततः कानून का शिकंजा या फिर श्मशान ही होता है। प्रशासन अब इस गिरोह के अन्य नेटवर्क और संपत्तियों की जांच में जुट गया है।



