By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: FCRA संशोधन बिल पर अमेरिका के सवालों को भारत का करारा जवाब, राजदूत क्वात्रा ने गिनाईं 5 बड़ी ‘गलतफहमियां’; बोले- कानून किसी धर्म को नहीं बनाता निशाना
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > FCRA संशोधन बिल पर अमेरिका के सवालों को भारत का करारा जवाब, राजदूत क्वात्रा ने गिनाईं 5 बड़ी ‘गलतफहमियां’; बोले- कानून किसी धर्म को नहीं बनाता निशाना
देशफीचर्ड

FCRA संशोधन बिल पर अमेरिका के सवालों को भारत का करारा जवाब, राजदूत क्वात्रा ने गिनाईं 5 बड़ी ‘गलतफहमियां’; बोले- कानून किसी धर्म को नहीं बनाता निशाना

The Hill India News
Last updated: August 10, 2026 6:23 am
The Hill India News
Published: August 10, 2026
Share
SHARE

विदेशी चंदे पर नियंत्रण को भारत ने बताया राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता का मामला, विनय मोहन क्वात्रा ने कहा- FCRA सभी संस्थाओं पर समान रूप से लागू; NGO, धार्मिक संस्थाओं और सिविल सोसाइटी को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर रखा भारत का पक्ष

नई दिल्ली: विदेशों से भारत आने वाले चंदे और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करने वाले Foreign Contribution (Regulation) Act यानी FCRA में प्रस्तावित बदलावों को लेकर देश और विदेश में बहस तेज हो गई है। FCRA संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर अमेरिका में उठाए जा रहे सवालों और कुछ आरोपों के बीच भारत ने अब अपना पक्ष मजबूती से रखा है। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट की एक श्रृंखला के जरिए बिल को लेकर सामने आ रही पांच प्रमुख ‘गलतफहमियों’ का जवाब दिया है।

Contents
विदेशी चंदे पर नियंत्रण को भारत ने बताया राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता का मामला, विनय मोहन क्वात्रा ने कहा- FCRA सभी संस्थाओं पर समान रूप से लागू; NGO, धार्मिक संस्थाओं और सिविल सोसाइटी को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर रखा भारत का पक्षपहली गलतफहमी: क्या सिविल सोसाइटी को विदेशी मदद मिलना बंद हो जाएगा?दूसरी गलतफहमी: क्या FCRA ने NGO और चैरिटी संस्थाओं को नुकसान पहुंचाया?तीसरी गलतफहमी: क्या NGO और धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति जब्त हो जाएगी?पूजा स्थलों को लेकर क्या कहा गया?चौथी गलतफहमी: क्या किसी खास धर्म को बनाया जा रहा है निशाना?पांचवीं गलतफहमी: क्या भारत ही ऐसा कानून बनाने वाला अकेला देश है?राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम सिविल सोसाइटी की स्वतंत्रता—क्यों अहम है बहस?भारत ने दिया साफ संदेश

क्वात्रा ने अपने जवाब में साफ किया कि विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों का उद्देश्य किसी धर्म, समुदाय, संस्था या विचारधारा को निशाना बनाना नहीं है। भारत का कहना है कि विदेशी धन के भारत में प्रवेश और उसके इस्तेमाल को पारदर्शी बनाए रखना तथा यह सुनिश्चित करना कि विदेशी धन का उपयोग सार्वजनिक या राजनीतिक गतिविधियों में किस तरह हो रहा है, राष्ट्रीय सुरक्षा और वित्तीय निगरानी से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।

इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि क्या प्रस्तावित कानून से NGO, धार्मिक संस्थाओं, चैरिटी संगठनों और पूजा स्थलों की संपत्तियों पर असर पड़ सकता है? क्या विदेशी सहायता प्राप्त करने वाली सिविल सोसाइटी संस्थाओं के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी? क्या किसी खास धर्म या समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है? भारत ने इन सभी सवालों का जवाब देते हुए कहा है कि बिल को लेकर कई दावे वास्तविक प्रावधानों से अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।

पहली गलतफहमी: क्या सिविल सोसाइटी को विदेशी मदद मिलना बंद हो जाएगा?

FCRA संशोधन बिल को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठाया जा रहा है कि क्या इसके बाद भारत में सिविल सोसाइटी संगठनों, NGO और अन्य संस्थाओं के लिए विदेशों से आर्थिक सहायता प्राप्त करना मुश्किल या असंभव हो जाएगा।

भारत की ओर से इस दावे को खारिज किया गया है। राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि FCRA का उद्देश्य विदेशी फंडिंग को पूरी तरह रोकना नहीं, बल्कि उसके प्रवेश और इस्तेमाल को नियंत्रित करना है। भारत का तर्क है कि दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों में भी विदेशी फंडिंग को लेकर नियम और निगरानी की व्यवस्था मौजूद है।

भारत में विदेशी योगदान को नियंत्रित करने के लिए पहला FCRA कानून वर्ष 1976 में लागू हुआ था। बाद में वर्ष 2010 में इसे एक नए कानून के रूप में बदला गया। इसके बाद भी समय-समय पर इसमें संशोधन किए जाते रहे। 2016, 2018 और 2020 में भी कानून में बदलाव हुए।

भारत का कहना है कि 2026 का प्रस्तावित संशोधन भी इसी प्रक्रिया की अगली कड़ी है, जिसका उद्देश्य विदेशी योगदान से जुड़े नियमों में ज्यादा स्पष्टता, पारदर्शिता और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था लाना है।

क्वात्रा के अनुसार, यह कहना सही नहीं है कि FCRA कानून का पालन करने वाली सिविल सोसाइटी संस्थाओं को विदेशी मदद लेने से रोकता है। बड़ी संख्या में संस्थाएं आज भी FCRA के तहत पंजीकृत हैं और स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा राहत, अनुसंधान तथा मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में विदेशी योगदान का इस्तेमाल कर रही हैं।

दूसरी गलतफहमी: क्या FCRA ने NGO और चैरिटी संस्थाओं को नुकसान पहुंचाया?

दूसरा बड़ा सवाल NGO और चैरिटी संस्थाओं को लेकर उठाया गया है। आरोप यह है कि FCRA के नियमों के कारण ऐसे संगठनों को आर्थिक नुकसान हुआ है और प्रस्तावित संशोधन उनके लिए और मुश्किलें पैदा कर सकता है।

भारत ने इन दावों का जवाब देते हुए विदेशी योगदान के आंकड़ों का हवाला दिया है। क्वात्रा के मुताबिक, FCRA के तहत पंजीकृत संस्थाओं को मिलने वाला विदेशी योगदान 2010-11 में लगभग 1.2 अरब डॉलर था, जो 2024-25 में बढ़कर करीब 2.67 अरब डॉलर हो गया।

भारत में NGO की संख्या भी बहुत बड़ी है। हालांकि, सभी NGO विदेशी फंडिंग नहीं लेते। क्वात्रा के अनुसार, देश में 30 लाख से ज्यादा NGO हैं, जबकि करीब 14,450 संस्थाओं के पास FCRA रजिस्ट्रेशन है। इसका अर्थ यह है कि देश में काम करने वाले NGO का बड़ा हिस्सा FCRA के दायरे में नहीं आता, क्योंकि उन्हें विदेशी योगदान लेने की अनुमति की आवश्यकता ही नहीं है।

भारत का तर्क है कि FCRA के तहत विदेशी चंदा लेने की इच्छा रखने वाली संस्था को कुछ निर्धारित नियमों का पालन करना होता है। इनमें पंजीकरण, निर्धारित प्रक्रिया के तहत विदेशी योगदान प्राप्त करना और उस धन के इस्तेमाल का हिसाब देना शामिल है।

यानी सरकार की ओर से यह संदेश दिया जा रहा है कि विदेशी फंडिंग पर निगरानी और विदेशी फंडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध—दो अलग-अलग बातें हैं।

तीसरी गलतफहमी: क्या NGO और धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति जब्त हो जाएगी?

FCRA संशोधन बिल को लेकर सबसे संवेदनशील सवाल संपत्तियों से जुड़ा है। आलोचकों की ओर से आशंका जताई जा रही है कि यदि किसी NGO या धार्मिक संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द हुआ तो विदेशी चंदे से बनाई गई उसकी संपत्ति पर सरकार का नियंत्रण हो सकता है।

इस पर भारत ने कहा है कि विदेशी योगदान से जुड़ी संपत्तियों को लेकर प्रावधान पूरी तरह नया नहीं है। क्वात्रा के मुताबिक, यदि किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है या संस्था खुद अपना पंजीकरण छोड़ देती है, तो विदेशी योगदान से जुड़ी धनराशि और उससे बनाई गई संपत्तियां पहले से निर्धारित सरकारी व्यवस्था के अधीन आती हैं।

प्रस्तावित 2026 बिल में ऐसी संपत्तियों की सुरक्षा, प्रबंधन और निगरानी के लिए एक अलग अथॉरिटी की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है।

भारत की ओर से यह भी कहा गया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि किसी संस्था की संपत्ति हमेशा के लिए उससे छीन ली जाएगी। यदि संबंधित संस्था भविष्य में अपना FCRA रजिस्ट्रेशन दोबारा हासिल कर लेती है, तो प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संपत्ति और इस्तेमाल न किया गया विदेशी धन वापस दिए जाने का प्रावधान बताया गया है।

पूजा स्थलों को लेकर क्या कहा गया?

धार्मिक संस्थाओं और पूजा स्थलों को लेकर उठ रही आशंकाओं पर भी भारत ने अपना पक्ष रखा है। क्वात्रा के मुताबिक, यदि किसी ऐसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द होता है, जिसने विदेशी योगदान से किसी पूजा स्थल की संपत्ति तैयार की है, तो उस संपत्ति को उसी धर्म से जुड़ी किसी अन्य FCRA-पंजीकृत संस्था को दिए जाने की व्यवस्था होगी।

इसका उद्देश्य यह बताया गया है कि पूजा स्थल का धार्मिक उपयोग बाधित न हो और संपत्ति का इस्तेमाल उसके मूल धार्मिक उद्देश्य के अनुरूप जारी रह सके।

यही बिंदु इस पूरे विवाद में खास महत्व रखता है, क्योंकि आलोचनाओं में यह सवाल उठाया जा रहा था कि FCRA के जरिए धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति पर व्यापक सरकारी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। भारत का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य संपत्तियों की सुरक्षा और प्रबंधन है, न कि किसी धर्म की धार्मिक गतिविधियों को रोकना।

चौथी गलतफहमी: क्या किसी खास धर्म को बनाया जा रहा है निशाना?

FCRA बिल को लेकर सबसे गंभीर राजनीतिक और सामाजिक आरोपों में से एक यह है कि इसका इस्तेमाल किसी खास धर्म या समुदाय से जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ किया जा सकता है।

राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने इस आरोप को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने कहा कि कानून का आधार धर्म या समुदाय नहीं है। उनके मुताबिक, FCRA सभी पात्र संस्थाओं पर समान रूप से लागू होता है और इसका उद्देश्य विदेशी योगदान को नियंत्रित करना है।

भारत की ओर से स्पष्ट किया गया है कि कानून किसी संस्था की धार्मिक पहचान के आधार पर अलग नियम लागू नहीं करता। यदि किसी संस्था को विदेशी योगदान प्राप्त होता है तो उसके लिए निर्धारित नियमों का पालन करना आवश्यक होगा।

इसका अर्थ यह है कि सरकार के अनुसार FCRA का फोकस संस्था का धर्म नहीं, बल्कि विदेशी धन का स्रोत, उसका उपयोग और उससे जुड़ी जवाबदेही है।

पांचवीं गलतफहमी: क्या भारत ही ऐसा कानून बनाने वाला अकेला देश है?

भारत ने उस दावे को भी खारिज किया है कि विदेशी फंडिंग और विदेशी प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए इस तरह के कानून बनाने वाला भारत दुनिया का अकेला देश है।

क्वात्रा ने अपने पक्ष में अमेरिका के Foreign Agents Registration Act (FARA), 1938 का उदाहरण दिया। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका के Foreign Account Tax Compliance Act (FATCA), 2010 का भी उल्लेख किया।

भारत ने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने 2018 में विदेशी प्रभाव और संबंधित गतिविधियों से जुड़े कानून बनाए, जबकि कनाडा ने 2024 में इस दिशा में कानून बनाया। ब्रिटेन में भी विदेशी प्रभाव और फंडिंग से संबंधित व्यवस्था को लेकर कदम उठाए गए हैं। यूरोपीय संघ में भी इस विषय पर नियमों को लेकर चर्चा होती रही है।

भारत का तर्क है कि जब दुनिया के कई देश विदेशी फंडिंग, विदेशी प्रभाव और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े नियम बना रहे हैं, तो भारत का अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप विदेशी योगदान को नियंत्रित करना असामान्य नहीं माना जाना चाहिए।

क्या है FCRA संशोधन बिल 2026 का प्रस्ताव?

Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। प्रस्तावित कानून में विदेशी योगदान से मिलने वाले धन और उससे जुड़ी संपत्तियों के कब्जे, निगरानी, प्रबंधन, इस्तेमाल तथा निपटारे से संबंधित व्यवस्था को मजबूत करने का प्रस्ताव है।

सबसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों में से एक विदेशी फंड और उससे जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए अलग अथॉरिटी तैयार करने का ढांचा है। इसके तहत कुछ परिस्थितियों में विदेशी धन और संपत्तियों को अस्थायी या स्थायी रूप से संबंधित अथॉरिटी के अधीन रखने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

इस प्रावधान को लेकर ही NGO और धार्मिक संस्थाओं के बीच सबसे ज्यादा चिंता देखी जा रही है। वहीं सरकार का पक्ष है कि ऐसी व्यवस्था का मकसद विदेशी योगदान से जुड़ी संपत्तियों को सुरक्षित रखना और यह सुनिश्चित करना है कि उनका इस्तेमाल कानून और निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हो।

राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम सिविल सोसाइटी की स्वतंत्रता—क्यों अहम है बहस?

FCRA पर जारी बहस सिर्फ विदेशी चंदे तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में दो महत्वपूर्ण मुद्दे हैं—राष्ट्रीय सुरक्षा और सिविल सोसाइटी की स्वतंत्रता।

एक तरफ सरकार का तर्क है कि विदेशी धन का इस्तेमाल भारत में राजनीतिक, सार्वजनिक या अन्य संवेदनशील गतिविधियों को प्रभावित करने के लिए न हो, इसके लिए मजबूत निगरानी जरूरी है। विदेशी फंडिंग की पारदर्शिता और उसके अंतिम इस्तेमाल की जानकारी सरकार के लिए महत्वपूर्ण है।

दूसरी तरफ NGO और सिविल सोसाइटी से जुड़े संगठनों की चिंता यह रहती है कि अत्यधिक कड़े नियमों के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य, मानवाधिकार, राहत और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्य प्रभावित न हों।

यही वजह है कि FCRA संशोधन बिल को लेकर भारत में भी चर्चा महत्वपूर्ण है और अमेरिका समेत विदेशों में भी इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

भारत ने दिया साफ संदेश

राजदूत विनय मोहन क्वात्रा के जवाबों से भारत का रुख काफी स्पष्ट नजर आता है। भारत यह संदेश देना चाहता है कि FCRA का उद्देश्य विदेशी फंडिंग को पूरी तरह बंद करना नहीं, बल्कि उसे पारदर्शी और नियंत्रित बनाना है।

भारत का यह भी कहना है कि प्रस्तावित संशोधन किसी विशेष धर्म, समुदाय या संस्था को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है। कानून का आधार विदेशी योगदान और उससे जुड़ी संपत्तियों का नियमन है।

हालांकि, बिल के वास्तविक प्रभाव का आकलन उसके अंतिम कानूनी प्रावधानों, नियमों और उनके क्रियान्वयन के तरीके से ही किया जा सकेगा। खासतौर पर NGO, धार्मिक संस्थाओं और विदेशी सहायता पर निर्भर संगठनों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई व्यवस्था में उनकी जवाबदेही और अधिकारों का संतुलन किस तरह तय किया जाता है।

कुल मिलाकर, FCRA संशोधन बिल 2026 अब केवल भारत का घरेलू विधायी मुद्दा नहीं रह गया है। विदेशी फंडिंग, NGO की स्वतंत्रता, धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति, राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी प्रभाव जैसे कई संवेदनशील विषय इस बहस से जुड़ गए हैं। भारत ने अमेरिका की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब में पांच प्रमुख दावों को ‘गलतफहमी’ बताते हुए अपना पक्ष सामने रखा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि संसद में इस बिल पर आगे क्या चर्चा होती है और अंतिम कानून में कौन-कौन से प्रावधान शामिल किए जाते हैं।

You Might Also Like

Sanchar Saathi App: नए मोबाइल फोन में क्यों अनिवार्य होगा ‘संचार साथी ऐप’? : सरकार ने जारी किए ये निर्देश
रेप के आरोपी महंत शिवमूर्ति को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण पर बड़ी बहस: वाहनों की भूमिका अहम, सीएक्यूएम ने सुप्रीम कोर्ट से अपने आदेश की समीक्षा की मांग की
प्रोजेक्ट ‘उत्कर्ष’ : देहरादून में सरकारी स्कूलों को मिला नया स्वरूप, डीएम सविन बंसल की पहल से शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव
उत्तराखण्ड : हरिद्वार में विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई एक महिला पटवारी के सहायक को घूस लेते गिरफ्तार किया
TAGGED:FCRA 2026Foreign FundingIndianational securityNGOsUSVinay Mohan Kwatra
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्ड

Gold-Silver Price Today: बाजार में फिर मचा तहलका! ₹1.52 लाख के पार पहुंचा सोना, चांदी में ₹2,000 से ज्यादा का उछाल; जानें आज का भाव और आगे कहां तक जा सकती हैं कीमतें

The Hill India News
The Hill India News
August 10, 2026
“अब तो मुझे नरेंदर नाम से ही नफरत हो गई है…” पाकिस्तानी बॉक्सर का मजेदार किस्सा सुनकर ठहाकों से गूंज उठा PM मोदी का आवास
एआर रहमान के बेटे एआर अमीन की कार का एक्सीडेंट, पोर्श की रैपिडो टैक्सी से हुई टक्कर; अस्पताल से डिस्चार्ज, जानें अब कैसी है हालत
“5 लाख ले लो, बस मेरे भाई को बचा लो…” गंगा में समाए छोटे भाई को बचाने के लिए बड़े भाई की बेबस पुकार, देवप्रयाग में हादसे से मचा हड़कंप
अतीक अहमद के बेटे उमर अहमद के काफिले पर FIR से मचा हड़कंप! नवाबगंज टोल पर 25-30 गाड़ियां बिना टोल दिए निकलीं, कर्मचारियों से अभद्रता और धमकी का आरोप
FCRA संशोधन बिल पर अमेरिका के सवालों को भारत का करारा जवाब, राजदूत क्वात्रा ने गिनाईं 5 बड़ी ‘गलतफहमियां’; बोले- कानून किसी धर्म को नहीं बनाता निशाना
रांची में छात्रों का शक्ति प्रदर्शन! हाथों में पोस्टर, सड़कों पर हजारों का हुजूम, विधानसभा घेराव को निकले युवा; चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा
गंगाजल लेकर 26 KM की कांवड़ यात्रा पर निकलीं खेल मंत्री रेखा आर्या, 2036 ओलंपिक और भारत को खेल महाशक्ति बनाने का लिया संकल्प
डेटिंग ऐप पर दोस्ती, फिर ब्लैकमेलिंग का खेल! शादी के सपने दिखाकर करोड़ों की वसूली का आरोप, 5 लोग पहुंचे जेल
कश्मीर में आतंक की ‘ऑनलाइन फैक्ट्री’ पर बड़ा प्रहार! 5 जिलों में सुबह-सुबह ताबड़तोड़ छापेमारी, 5000 लोगों से पूछताछ के बाद सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा एक्शन
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?