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J&K: नौगाम ब्लास्ट पर गृह मंत्रालय का विस्तृत बयान: ‘घटना आकस्मिक, अटकलों से बचें’

संवेदनशील विस्फोटक सामग्री की जांच के दौरान हुआ हादसा, 9 लोगों की मौत; मृतकों की पहचान में कठिनाई

नई दिल्ली / श्रीनगर, 15 नवंबर। कश्मीर के नौगाम पुलिस स्टेशन में गुरुवार देर रात हुए शक्तिशाली विस्फोट को लेकर गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि यह घटना पूरी तरह एक्सीडेंटल थी और इसे किसी भी तरह की साजिश या आतंकवादी गतिविधि से जोड़कर अटकलें लगाना गलत होगा। मंत्रालय ने जानकारी साझा करते हुए अपील की कि इस संवेदनशील मामले में तथ्यों के आधार पर ही बात कही जाए।

गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रशांत लोखंडे ने खुद इस घटना पर हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में बयान जारी किया—जो अपने आप में संकेत देता है कि केंद्र सरकार इस मामले को कितनी गंभीरता और संवेदनशीलता से देख रही है।


क्या हुआ था नौगाम में?

सरकारी बयान के अनुसार गुरुवार रात करीब 11:20 बजे नौगाम पुलिस स्टेशन के बाहर अचानक बड़ा धमाका हुआ। यह विस्फोट उस विस्फोटक सामग्री में हुआ जिसे पुलिस ने पिछले दिनों एक एफआईआर की जांच के दौरान बरामद किया था।

नौगाम पुलिस ने कुछ दिन पहले क्षेत्र में लगाए गए आपत्तिजनक पोस्टरों से संबंधित मामला दर्ज किया था। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने एक संदिग्ध ठिकाने से बड़ा विस्फोटक जखीरा बरामद किया। बरामद सामग्री अत्यंत संवेदनशील थी, इसलिए उसे थाने के बाहर सुरक्षित स्थान पर रखा गया था और उसे आगे की जांच के लिए फोरेंसिक टीमों को भेजा जाना था।

गृह मंत्रालय के अनुसार विस्फोटक को ‘उच्चतम सतर्कता’ के साथ सुरक्षित रखा गया था। इसके बावजूद अज्ञात कारणों से अचानक आकस्मिक विस्फोट हो गया। इस हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। कई वाहन भी आग की चपेट में आ गए।


“अटकलबाज़ी से बचा जाए”—गृह मंत्रालय

संयुक्त सचिव लोखंडे ने बयान में कहा:

“यह घटना पूरी तरह आकस्मिक थी। इसकी प्रकृति को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाह या अटकल फैलाने से बचा जाना चाहिए। पुलिस और फोरेंसिक टीम इस हादसे की पूरी जांच कर रही है।”

उन्होंने यह भी कहा कि हादसे की संवेदनशीलता और प्रथम दृष्टया जानकारी को देखते हुए यह जरूरी था कि सरकार खुद स्पष्ट तथ्य सामने रखे, ताकि किसी प्रकार की गलत जानकारी या भ्रम की स्थिति न बने।


शोध, जांच और सुरक्षा: उच्च स्तरीय सतर्कता पर जोर

विस्फोट में जिस मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखी थी, उससे हादसा बेहद गंभीर हो गया। पुलिस का कहना है कि सामग्री अत्यधिक पुरानी और अस्थिर थी, जो आकस्मिक विस्फोट का एक बड़ा कारण हो सकता है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि बरामद विस्फोटकों की प्रकृति और संवेदनशीलता को देखते हुए यह एक ऐसी स्थिति थी, जिसमें मामूली चिंगारी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी।


शवों की पहचान में कठिनाई, मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका

स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि धमाका इतना शक्तिशाली था कि कई शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए। उनकी पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

कुछ शवों की शिनाख्त के लिए DNA परीक्षण की जरूरत पड़ सकती है।

अधिकारियों ने संकेत दिया कि घायलों में कुछ की हालत गंभीर है, इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है।


दर्जी की भी मौत—धमाके के तुरंत पहले बना रहा था कवर

धमाके का एक अत्यंत दुखद पहलू यह भी सामने आया है कि विस्फोट में एक स्थानीय दर्जी की भी जान चली गई, जिसे पुलिस ने विस्फोटक सामग्री को ढकने के लिए सुरक्षात्मक कवर तैयार करने का काम दिया था।

थाने के बाहर बनाए जा रहे इसी कवर के दौरान अचानक विस्फोट हो गया।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि यह दर्जी बेहद सामान्य परिवार से था और उसे इस बात का अंदाज़ा भी नहीं था कि जिस वस्तु के लिए वह कवर बना रहा है, वह इतनी खतरनाक है।


घटना के बाद हाई अलर्ट, सभी थानों में SOP की समीक्षा

कश्मीर पुलिस ने हादसे के बाद सभी जिलों को विस्फोटक सामग्री की हैंडलिंग से जुड़े स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) की तत्काल समीक्षा का निर्देश दिया है।
मुख्य बिंदु:

  • बरामद विस्फोटक को भीड़-भाड़ से दूर सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए
  • ऐसे मामलों में फोरेंसिक टीमों को तुरंत बुलाया जाए
  • थानों के बाहर संवेदनशील सामग्री की सुरक्षा और निगरानी बढ़ाई जाए
  • स्थानीय कर्मचारियों को विस्फोटक की पहचान और जोखिम के बारे में प्रशिक्षण दिया जाए

राजनीतिक प्रतिक्रिया—“तथ्यों का इंतजार ज़रूरी”

घटना के बाद कुछ हलकों से तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन गृह मंत्रालय के आधिकारिक बयान के बाद राजनीतिक दलों ने भी तथ्यों के आधार पर चर्चा की अपील की है।

केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि:

“यह समय एकजुट होकर पीड़ित परिवारों को समर्थन देने और जांच को पूरा होने देने का है।”


स्थानीय लोगों में शोक, घटना ने बढ़ाया तनाव

नौगाम क्षेत्र में घटना के बाद माहौल भारी है। कई परिवारों के सदस्य लापता थे, जिन्हें बाद में अस्पतालों और शवगृहों में ढूंढने में काफी समय लगा।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि:

  • धमाके की आवाज़ कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी
  • कई घरों की खिड़कियों के शीशे टूट गए
  • लोग देर रात घरों से बाहर निकल आए

हालांकि प्रशासन ने जल्द ही स्थिति को नियंत्रित कर लिया और अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की।


अगले कदम: विस्तृत जांच और सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव

गृह मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि घटना की उच्च स्तरीय जांच की जाएगी और यह देखा जाएगा कि सावधानियों के बावजूद विस्फोट कैसे हुआ।

जांच में निम्न पहलुओं की समीक्षा होगी:

  • बरामद विस्फोटक की गुणवत्ता और प्रकृति
  • स्टोरेज एवं सुरक्षा व्यवस्थाएं
  • क्या सुरक्षा नियमों में कहीं चूक हुई
  • क्या विस्फोटक सामग्री को समय से पहले नष्ट किया जा सकता था

जांच रिपोर्ट के आधार पर देशभर में पुलिस थानों और जांच एजेंसियों के लिए नए दिशानिर्देश भी जारी किए जा सकते हैं।

नौगाम पुलिस स्टेशन में हुआ यह विस्फोट सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा तंत्र के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है। गृह मंत्रालय के आधिकारिक बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि घटना आकस्मिक थी और इससे जुड़े हर पहलू की गहराई से जांच की जाएगी।

केंद्र ने साफ कहा है कि किसी भी तरह की अटकलें या अफवाहें फैलाना न सिर्फ गलत है, बल्कि स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना सकता है। फिलहाल, पूरा देश नौगाम के उन परिवारों के साथ खड़ा है जिन्होंने अपने प्रियजनों को इस हादसे में खोया।

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