
देहरादून। उत्तराखंड के गौरवशाली इतिहास में आज एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। राज्य स्थापना के ‘रजत जयंती वर्ष’ के पावन अवसर पर उत्तराखंड पुलिस को विशिष्ट सेवाओं के लिए देश के सर्वोच्च सम्मान ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ (President’s Police Colour) से अलंकृत किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि को केवल एक विभाग का सम्मान नहीं, बल्कि राज्य के प्रत्येक नागरिक के लिए गौरव का क्षण बताया है।
बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री आवास में पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर इस ऐतिहासिक उपलब्धि की विस्तृत जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर पूरे पुलिस बल को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उत्तराखंड पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा, अदम्य साहस और निस्वार्थ सेवा भावना की राष्ट्रीय स्तर पर मिली सबसे बड़ी पहचान है।
क्या है ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ और क्यों है यह खास?
‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ किसी भी पुलिस बल के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान माना जाता है। यह सम्मान केवल उन राज्यों या संगठनों को दिया जाता है जिनका पिछले कई दशकों का ट्रैक रिकॉर्ड कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और जनसेवा में उत्कृष्ट रहा हो। अब उत्तराखंड पुलिस का अपना एक विशिष्ट ध्वज होगा और सभी पुलिस कर्मियों की वर्दी पर इस सम्मान का प्रतीक (Insignia) अंकित होगा, जो उनकी अस्मिता और वीरता का स्थायी प्रमाण बनेगा।
मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय केंद्र सरकार के मार्गदर्शन को देते हुए कहा, “मैं माननीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ। उनके नेतृत्व में उत्तराखंड पुलिस ने तकनीकी नवाचार और स्मार्ट पुलिसिंग के मानकों को छुआ है। यह पुरस्कार एक कठोर और बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया का परिणाम है, जिसमें हमारी पुलिस हर मोर्चे पर खरी उतरी है।”
केदारनाथ आपदा से महाकुंभ तक: समर्पण की मिसाल
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस बल की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। सीमित संसाधनों और दुर्गम क्षेत्रों के बावजूद पुलिस ने जिस तरह से अपनी सेवाएं दी हैं, वह अनुकरणीय है।
उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया:
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आपदा प्रबंधन: वर्ष 2013 की भीषण केदारनाथ आपदा के दौरान उत्तराखंड पुलिस ने देवदूत बनकर हजारों लोगों की जान बचाई। ‘ऑपरेशन रिलीफ’ से लेकर पुनर्निर्माण तक पुलिस की भूमिका मानवीय संवेदनाओं से भरी रही।
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भीड़ प्रबंधन: हरिद्वार महाकुंभ, वार्षिक चारधाम यात्रा और कांवड़ मेला जैसे आयोजनों में करोड़ों की भीड़ को नियंत्रित करना और यातायात व्यवस्था को सुचारू रखना उत्तराखंड पुलिस की पेशेवर दक्षता का जीवंत उदाहरण है।
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स्मार्ट पुलिसिंग: साइबर अपराध नियंत्रण और महिला सुरक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड पुलिस ने तकनीकी सशक्तिकरण के माध्यम से एक ऐसा ‘बेंचमार्क’ सेट किया है, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है।
रजत जयंती वर्ष का सबसे बड़ा उपहार
यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि उत्तराखंड इस वर्ष अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। सीएम धामी ने कहा कि यह सम्मान बीते ढाई दशकों की विकास यात्रा और समर्पण का निचोड़ है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार पुलिस बल के आधुनिकीकरण और पुलिस परिवारों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में उत्तराखंड पुलिस राष्ट्रपति पुलिस कलर की गरिमा को बनाए रखते हुए ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ का एक वैश्विक मॉडल बनकर उभरेगी।
डीजीपी दीपम सेठ: “यह प्रत्येक जवान के त्याग का परिणाम है”
पुलिस महानिदेशक श्री दीपम सेठ ने इस ऐतिहासिक क्षण पर कहा कि यह सम्मान पुलिस बल के प्रत्येक अधिकारी और जवान की मेहनत का फल है। उन्होंने कहा, “यह हमारे लिए केवल एक पदक नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। राष्ट्रपति पुलिस कलर हमें भविष्य में उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करने के लिए प्रेरित करेगा। यह सम्मान उन पुलिस परिवारों को समर्पित है जो हमारे जवानों के त्याग में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं।”
भविष्य की राह: मित्रता, सेवा और सुरक्षा
उत्तराखंड पुलिस अब देश के उन चुनिंदा पुलिस बलों की श्रेणी में शामिल हो गई है, जिनके पास अपना ‘कलर’ है। इससे न केवल बल का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी साख मजबूत होगी। पर्यटन प्रधान राज्य होने के नाते, ‘टूरिस्ट पुलिस’ और सामुदायिक पुलिसिंग के क्षेत्र में भी नए प्रयोग किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि “मित्रता, सेवा और सुरक्षा” केवल एक नारा नहीं, बल्कि उत्तराखंड पुलिस की कार्यशैली का आधार है। राष्ट्रपति पुलिस कलर मिलने के बाद अब पुलिस बल और भी अधिक दृढ़ संकल्प के साथ राज्य की सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा के लिए समर्पित रहेगा।



