
कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल): उत्तराखंड के कोटद्वार में पिछले कुछ दिनों से जारी ‘बाबा दुकान’ विवाद ने अब कानूनी और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। क्षेत्र में व्याप्त तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पौड़ी पुलिस ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। इसी कड़ी में पुलिस ने शुक्रवार, 6 फरवरी को सोशल मीडिया पर कथित रूप से भड़काऊ बयान जारी करने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के प्रयास के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
पकड़े गए व्यक्ति की पहचान यति परमानंद सरस्वती उर्फ दीपक बजरंगी के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि आरोपी द्वारा साझा किए गए वीडियो से शहर की शांति व्यवस्था भंग होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया था।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित (वायरल) हुआ। इस वीडियो में कोटद्वार निवासी दीपक बजरंगी कथित रूप से आपत्तिजनक और भड़काऊ बयान देते हुए दिखाई दे रहे थे। वीडियो के वायरल होते ही स्थानीय स्तर पर रोष और तनाव की स्थिति बनने लगी।
चूंकि कोटद्वार बाबा दुकान विवाद को लेकर क्षेत्र में पहले से ही संवेदनशीलता बनी हुई है, ऐसे में इस प्रकार के बयानों ने आग में घी डालने का काम किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग तुरंत हरकत में आया और वीडियो की सत्यता की जांच शुरू कर दी गई।
पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति और गिरफ्तारी
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक प्रदीप नेगी ने बताया कि पुलिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 24 घंटे निगरानी रख रही है। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो का तत्काल संज्ञान लिया गया। हमारी टीम ने देर रात कार्रवाई करते हुए आरोपी यति परमानंद सरस्वती उर्फ दीपक बजरंगी को हिरासत में लिया।”
आरोपी के खिलाफ शांति भंग करने, भड़काऊ भाषण देने और सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने से जुड़ी विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में किसी भी प्रकार की अफवाह या भड़काऊ सामग्री बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन ऐसे मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रहा है।
सोशल मीडिया पर ‘डिजिटल’ पहरा
पौड़ी गढ़वाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोटद्वार की संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर), और व्हाट्सएप ग्रुप्स की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। पुलिस की एक विशेष टीम केवल साइबर गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए तैनात की गई है।
पुलिस महानिरीक्षक और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार, किसी भी अपुष्ट जानकारी या भ्रामक सूचना को साझा करने वाले एडमिन और यूज़र्स के खिलाफ सीधी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। दीपक बजरंगी की गिरफ्तारी इसी ‘डिजिटल पहरे’ का परिणाम मानी जा रही है।
शांति और सौहार्द की अपील
गिरफ्तारी के बाद पौड़ी पुलिस ने आम जनता से विशेष अपील जारी की है। पुलिस ने कहा है कि कोटद्वार शहर में शांति और आपसी भाईचारा बनाए रखने में नागरिक सहयोग करें।
पुलिस की अपील के मुख्य बिंदु:
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किसी भी अपुष्ट या भ्रामक जानकारी (Fake News) को फॉरवर्ड न करें।
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सोशल मीडिया पर ऐसी कोई भी टिप्पणी न करें जिससे किसी समुदाय की भावनाएं आहत हों।
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यदि कोई भड़काऊ सामग्री दिखाई दे, तो उसे साझा करने के बजाय तुरंत पुलिस को सूचित करें।
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शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
विवाद की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
कोटद्वार का यह विवाद पिछले कुछ समय से स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। ‘बाबा दुकान’ विवाद की वजह से शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। ऐसे में कट्टरपंथी बयानों या भड़काऊ पोस्ट्स से माहौल के हिंसक होने की आशंका बनी रहती है।
प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी है और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर शांति बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं। पुलिस का मानना है कि दीपक बजरंगी की गिरफ्तारी से उन तत्वों को कड़ा संदेश जाएगा जो सोशल मीडिया का उपयोग माहौल खराब करने के लिए करते हैं।
लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, लेकिन जब यह स्वतंत्रता सार्वजनिक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बन जाए, तो कानून का हस्तक्षेप अनिवार्य हो जाता है। कोटद्वार बाबा दुकान विवाद के मद्देनजर पौड़ी पुलिस की यह कार्रवाई सराहनीय है। राज्य में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस की सक्रियता और सोशल मीडिया पर उनकी पैनी नजर यह सुनिश्चित कर रही है कि देवभूमि की मर्यादा और सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ न हो सके।



