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हरिद्वार: पूर्व विधायक चैंपियन के बेटे दिव्य प्रताप सिंह की दो रिवॉल्वर और एक बंदूक के लाइसेंस रद्द

जिलाधिकारी ने तत्काल शस्त्र जब्त करने के दिए निर्देश

देहरादून/हरिद्वार: हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बेटे दिव्य प्रताप सिंह के नाम दर्ज दो रिवॉल्वर और एक बंदूक के हथियार लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। प्रशासन की यह बड़ी कार्रवाई हाल ही में दर्ज हुए मारपीट और धमकी के मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।


राजपुर थाने में दर्ज हुआ था गंभीर मामला

17 जुलाई को पूर्व मुख्य सचिव एस. रामस्वामी के पुत्र आर. यशोर्धन द्वारा देहरादून के राजपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि:

  • दिव्य प्रताप सिंह और उनके गनर राजेश सिंह ने
    चलती कार से यशोर्धन को बाहर घसीटकर गिराया,
  • उनके साथ मारपीट की,
  • और एक अन्य व्यक्ति को पिस्तौल दिखाकर धमकाया

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि पीड़ित की शर्ट पर लगे राष्ट्रीय ध्वज के प्रतीक का अपमान भी हुआ।

घटना के बाद मामले को गंभीर मानते हुए देहरादून एसएसपी अजय सिंह ने गनर राजेश सिंह को निलंबित कर दिया था, तथा घटना में प्रयुक्त बोलेरो वाहन को जब्त कर लिया गया। इसके पश्चात दिव्य प्रताप सिंह के हथियार लाइसेंस रद्द करने की अनुशंसा हरिद्वार जिलाधिकारी को भेजी गई थी।


जांच रिपोर्ट में आए तथ्य, लाइसेंस रद्द करने का निर्णय

जांच रिपोर्ट में आए निष्कर्षों को आधार बनाते हुए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कानून-व्यवस्था के हित में दिव्य प्रताप सिंह के तीनों हथियारों के लाइसेंस निरस्त करने का आदेश जारी किया है। प्रशासन ने माना कि हथियारों का दुरुपयोग सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है।


शस्त्रों को तत्काल पुलिस अभिरक्षा में लेने के निर्देश

लाइसेंस रद्द होने के बाद जिलाधिकारी ने देहरादून और हरिद्वार के एसएसपी को निर्देश दिए हैं कि:

  • निरस्त किए गए हथियारों को तुरंत पुलिस अभिरक्षा में लिया जाए,
  • तथा शस्त्रों को जमा कराने की कानूनी प्रक्रिया तुरंत लागू की जाए।

इस फैसले के बाद पुलिस अब दिव्य प्रताप सिंह के पास मौजूद सभी हथियारों की जब्ती की कार्यवाही करेगी।


पहले भी विवादों में रहा है परिवार

कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और उनके परिवार से जुड़े विवाद पहले भी सुर्खियों में रह चुके हैं। ताज़ा मामला एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है और हथियार लाइसेंस की जिम्मेदारी एवं जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण बहस छेड़ता है।

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