
हरिद्वार: उत्तराखंड में बिजली की बढ़ती कीमतों और ‘स्मार्ट मीटर’ योजना को लेकर सियासत गरमा गई है। शनिवार को धर्मनगरी हरिद्वार में कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक विशाल पैदल यात्रा निकाली। हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा के नूरपुर पंजनहेड़ी से शुरू हुई यह यात्रा जगजीतपुर स्थित यूपीसीएल (UPCL) के एसडीओ कार्यालय तक पहुँची, जहाँ कांग्रेसी दिग्गजों ने बिजली के भारी-भरकम बिलों और सरचार्ज के मुद्दे पर ‘डबल इंजन’ सरकार को आड़े हाथों लिया।
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, और स्थानीय विधायक अनुपमा रावत सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने शिरकत की। कांग्रेस नेताओं ने साफ कर दिया कि यदि सरकार ने बिजली की दरों और स्मार्ट मीटर पर अपना रुख नहीं बदला, तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में उग्र रूप धारण करेगा।
26 दिन में बिल और भारी सरचार्ज: जनता त्रस्त
यूपीसीएल कार्यालय के बाहर जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता आज बिजली के बिलों से सहमी हुई है।
हरीश रावत के संबोधन के मुख्य बिंदु:
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अनियमित बिलिंग: पहले बिजली का बिल दो महीने में एक बार आता था, जिससे उपभोक्ताओं पर बोझ कम पड़ता था। लेकिन अब भाजपा सरकार में महज 26 दिनों में बिल भेजा जा रहा है।
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अघोषित कटौती: एक तरफ बिजली के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य के कई हिस्सों में अघोषित बिजली कटौती से लोग परेशान हैं।
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स्मार्ट मीटर का विरोध: रावत ने स्पष्ट किया कि जनता को स्मार्ट मीटर की आवश्यकता नहीं है। यह केवल निजी कंपनियों को फायदा पहुँचाने और जनता की जेब काटने का जरिया है।
“अगर भाजपा सरकार इन मांगों को नहीं मानती है, तो मैं वादा करता हूँ कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आने पर इन स्मार्ट मीटरों को हटा दिया जाएगा और बिजली के बेतहाशा सरचार्ज पर तत्काल रोक लगाई जाएगी।” – हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री
‘बिजली पैदा करने वाला राज्य और खुद अंधेरे में’
हरिद्वार ग्रामीण की विधायक अनुपमा रावत ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए इसे ‘जनता विरोधी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड एक ऊर्जा प्रदेश (Energy State) है, जो अपनी नदियों से बिजली पैदा करता है।

विधायक अनुपमा रावत के गंभीर आरोप:
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महंगी दरें: उत्तराखंड दूसरे राज्यों को कम दरों पर बिजली बेच रहा है, जबकि अपने ही नागरिकों को महंगी बिजली खरीदने पर मजबूर कर रहा है।
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दोहरी मार: जब से प्रदेश में डबल इंजन की सरकार आई है, तब से बिजली की दरों में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है।
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भ्रम की राजनीति: स्मार्ट मीटर के नाम पर पारदर्शी व्यवस्था का ढोंग किया जा रहा है, जबकि असलियत में उपभोक्ताओं के बिल पहले से कहीं ज्यादा आ रहे हैं।
कांग्रेस की तीन सूत्रीय माँगें
पैदल यात्रा के समापन पर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में सरकार के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी गई हैं:
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सरचार्ज माफी: बिजली बिलों पर लगाए जा रहे अतिरिक्त सरचार्ज को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए।
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बिल हाफ: दिल्ली की तर्ज पर या जनहित को देखते हुए बिजली के बिलों को आधा (50%) किया जाए।
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स्मार्ट मीटर बंदी: पूरे प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना को तुरंत बंद किया जाए।
रणनीतिक घेराबंदी: 2027 की तैयारी?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली जैसे बुनियादी मुद्दे को उठाकर कांग्रेस ने सीधे तौर पर आम आदमी से जुड़ने की कोशिश की है। हरिद्वार में निकाली गई यह पैदल यात्रा न केवल स्थानीय समस्याओं का प्रतिबिंब है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए जमीन तैयार करने का एक प्रयास भी है। गणेश गोदियाल और हरीश रावत की जुगलबंदी ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है।
यूपीसीएल के एसडीओ कार्यालय पर प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाए और चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्यवाही नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे।

सरकार के पाले में गेंद
कांग्रेस के इस बड़े प्रदर्शन ने शासन और प्रशासन को सोचने पर मजबूर कर दिया है। जहाँ एक तरफ सरकार स्मार्ट मीटर को आधुनिकता और बिजली चोरी रोकने का उपाय बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे ‘आर्थिक बोझ’ बताकर एक बड़ा मुद्दा बना दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या धामी सरकार विपक्ष के इस दबाव में आकर बिजली दरों या स्मार्ट मीटर नीति पर कोई राहत देती है या नहीं।



