
हल्द्वानी (नैनीताल): उत्तराखंड की देवभूमि की संस्कृति, लोक परंपराओं और महिलाओं पर कथित तौर पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी को आखिरकार राहत मिल गई है। शुक्रवार (13 जनवरी) को हल्द्वानी के अपर मुख्य सिविल जज (द्वितीय) की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ज्योति अधिकारी की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है।
8 जनवरी से सलाखों के पीछे थीं ज्योति
विदित हो कि बीते 8 जनवरी को मुखानी थाना पुलिस ने ज्योति अधिकारी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था, जहाँ से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में अस्थायी जेल भेज दिया गया था। पिछले 5 दिनों से जेल की सलाखों के पीछे रहीं ज्योति के अधिवक्ता जितेंद्र सिंह बिष्ट ने जमानत याचिका दाखिल की थी। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अपना रुख स्पष्ट किया, जिसके बाद कोर्ट ने जमानत पर मुहर लगा दी। अधिवक्ता जितेंद्र सिंह बिष्ट के अनुसार, “कोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली है और अब बेल बॉन्ड भरने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।”
दराती लहराने और विवादित बोल ने बढ़ाई मुश्किलें
ज्योति अधिकारी के खिलाफ मुख्य विवाद तब शुरू हुआ जब वह अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में सीबीआई जांच और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हो रहे आंदोलनों में शामिल हुईं। इस दौरान ज्योति के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिन्होंने पूरे प्रदेश में आक्रोश पैदा कर दिया।
आरोप है कि एक वीडियो में ज्योति अधिकारी सार्वजनिक रूप से ‘दराती’ (एक स्थानीय धारदार हथियार) लहराती नजर आईं। इसके साथ ही, उन पर आरोप लगा कि उन्होंने उत्तराखंड की महिलाओं की जीवनशैली और यहाँ के पूजनीय देवी-देवताओं के खिलाफ अमर्यादित और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। कुमाऊंनी संस्कृति के प्रति इस तरह के रवैये के कारण स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी गई।
जूही चुफाल की तहरीर पर हुई थी कार्रवाई
इस पूरे प्रकरण में कानूनी कार्रवाई तब शुरू हुई जब हल्द्वानी निवासी जूही चुफाल ने ज्योति अधिकारी के कृत्यों पर कड़ा ऐतराज जताया। जूही ने मुखानी थाने में तहरीर सौंपते हुए आरोप लगाया कि ज्योति ने न केवल सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश की, बल्कि उत्तराखंड की मातृशक्ति का भी अपमान किया है।
तहरीर के आधार पर पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर ज्योति को नोटिस जारी किया था। हालांकि, गिरफ्तारी से पहले ज्योति अधिकारी सोशल मीडिया पर काफी आक्रामक रुख अपनाती नजर आई थीं और कोर्ट जाने की बातें कह रही थीं। अंततः, पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।
देवभूमि में संस्कृति और अभिव्यक्ति की मर्यादा पर बहस
ज्योति अधिकारी का मामला अब उत्तराखंड में सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम सांस्कृतिक मर्यादा की एक बड़ी बहस में तब्दील हो गया है। उत्तराखंड, जिसे अपनी शालीनता और धार्मिक आस्था के लिए जाना जाता है, वहाँ इस तरह की टिप्पणियों ने डिजिटल स्पेस में ‘कंटेंट’ की सीमा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का क्या कहना है? कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स अक्सर ‘व्यूज’ और ‘फॉलोअर्स’ के चक्कर में ऐसी सीमाओं को लांघ जाते हैं जो कानून की नजर में अपराध की श्रेणी में आती हैं। ज्योति अधिकारी के मामले में दराती लहराना और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना उनके लिए सबसे कमजोर कड़ी साबित हुआ।
क्या हैं जमानत की शर्तें?
हालांकि कोर्ट ने ज्योति को जमानत दे दी है, लेकिन यह सशर्त जमानत है। इसका अर्थ है कि वह भविष्य में ऐसी किसी गतिविधि में लिप्त नहीं होंगी जिससे समाज में विद्वेष फैले। साथ ही, उन्हें जांच प्रक्रिया में सहयोग करना होगा।
आगे क्या होगा? जमानत मिलने के बाद ज्योति अधिकारी को जेल से रिहा कर दिया जाएगा, लेकिन उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। पुलिस अब चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी करेगी, जहाँ उन्हें कोर्ट में खुद को निर्दोष साबित करना होगा।
सोशल मीडिया की दुनिया में चमकने वाली ज्योति अधिकारी के लिए पिछले कुछ दिन काफी चुनौतीपूर्ण रहे हैं। जहाँ एक ओर उन्हें न्यायिक राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर उनके खिलाफ सार्वजनिक आक्रोश अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। देवभूमि की जनता इस मामले को अपनी अस्मिता से जोड़कर देख रही है, ऐसे में आने वाले समय में यह मामला और भी महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है।



