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अलविदा 2025: भारतीय सिनेमा के एक ‘स्वर्ण युग’ का अंत; धर्मेंद्र और मनोज कुमार जैसे दिग्गजों ने दुनिया को कहा अलविदा

नई दिल्ली | 31 दिसंबर, 2025: भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक बेहद दुखद अध्याय के रूप में दर्ज किया जाएगा। इस साल रुपहले पर्दे ने उन सितारों को खो दिया जिन्होंने न केवल फिल्मों को जिया, बल्कि आजाद भारत के सरोकारों, देशभक्ति और भावनाओं को पर्दे पर नई परिभाषा दी। धर्मेंद्र, मनोज कुमार, असरानी, सतीश शाह और कामिनी कौशल जैसे महान कलाकारों का जाना एक युग का अंत है।

1. ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र: एक करिश्माई व्यक्तित्व का विदाई

भारतीय सिनेमा के ‘ऑरिजनल एक्शन हीरो’ और सबसे हैंडसम अभिनेताओं में शुमार धर्मेंद्र का जाना प्रशंसकों के लिए एक गहरा सदमा रहा। ‘शोले’ के ‘वीरू’ से लेकर ‘सत्यकाम’ के गंभीर अभिनेता तक, धर्मेंद्र ने हर पीढ़ी के दिलों पर राज किया। पंजाब की मिट्टी से निकलकर मायानगरी के शिखर तक पहुँचने वाले इस ‘ही-मैन’ ने 2025 में अपनी अंतिम सांस ली।

2. ‘भारत कुमार’ मनोज कुमार: देशभक्ति की बुलंद आवाज़

सिनेमा के माध्यम से राष्ट्रवाद की अलख जगाने वाले मनोज कुमार भी इस साल पंचतत्व में विलीन हो गए। ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’ और ‘क्रांति’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने भारतीय मूल्यों और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। उनके जाने से भारतीय सिनेमा ने अपना सबसे बड़ा ‘देशभक्त’ खो दिया है।

3. असरानी: हास्य का वो ‘अंग्रेजों के जमाने’ का सिपाही

अपनी खास आवाज और कॉमिक टाइमिंग से दशकों तक दर्शकों को गुदगुदाने वाले असरानी ने भी 2025 में दुनिया को अलविदा कह दिया। ‘शोले’ के जेलर का किरदार हो या ‘अभिमान’ का गंभीर अभिनय, उन्होंने साबित किया कि कलाकार की कद-काठी से बड़ा उसका हुनर होता है। उनके जाने से हास्य अभिनय का एक बड़ा कोना खाली हो गया है।

4. कामिनी कौशल: सादगी और शालीनता की मिसाल

हिंदी सिनेमा की सबसे पुरानी और दिग्गज अभिनेत्रियों में से एक कामिनी कौशल ने भी इसी साल अंतिम विदा ली। अपनी सहज मुस्कान और प्रभावशाली अभिनय से उन्होंने श्वेत-श्याम फिल्मों के दौर को समृद्ध किया था। वे भारतीय नारी के उस स्वरूप की प्रतीक थीं, जिसमें मर्यादा और प्रतिभा का अद्भुत संगम था।


2025: सिनेमाई क्षति का सारांश

कलाकार पहचान / विशेष योगदान
धर्मेंद्र ही-मैन, एक्शन और रोमांस के अनूठे संगम।
मनोज कुमार ‘भारत कुमार’, सिनेमा में देशभक्ति के जनक।
असरानी हास्य कला के महान हस्ताक्षर और चरित्र अभिनेता।
कामिनी कौशल भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग की शालीन अभिनेत्री।

उभरते भारत के ‘सिनेमाई सरोकार’

इन कलाकारों की फिल्में महज़ मनोरंजन नहीं थीं, बल्कि वे उभरते हुए भारत के संघर्षों, ग्रामीण परिवेश, पारिवारिक मूल्यों और राष्ट्रीय गौरव को दर्शाने वाले आईने थे। मनोज कुमार की मिट्टी की खुशबू हो या धर्मेंद्र का आम आदमी वाला गुस्सा, इन सितारों ने पर्दे पर वही दिखाया जो उस दौर का भारत महसूस कर रहा था।

साल 2025 की विदाई के साथ भारतीय सिनेमा का एक गौरवशाली अध्याय हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में सिमट गया है। ये सितारे भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्में और उनकी यादें आने वाली कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी रहेंगी।

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