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सोना 2 लाख और चांदी 3 लाख के करीब! क्या एक साल में निवेशकों की चमक जाएगी किस्मत?

वैश्विक बाजारों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और डॉलर की कमजोरी के बीच सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। यही वजह है कि अब निवेशकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में सोना और चांदी नए ऐतिहासिक स्तर छू सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान बैंक ऑफ अमेरिका ने अनुमान जताया है कि अगले एक साल में सोना करीब 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है, जबकि चांदी 2.84 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को पार कर सकती है। इस भविष्यवाणी ने सर्राफा बाजार से लेकर आम निवेशकों तक सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

शनिवार को ज्वेलरी मार्केट में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1,50,150 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। वहीं 22 कैरेट सोना 1,37,560 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोना 1,12,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बिकता नजर आया। घरेलू कमोडिटी बाजार MCX में भी तेजी का माहौल देखने को मिला। 5 जून डिलीवरी वाला सोना हल्की बढ़त के साथ 1,51,363 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी 2,47,500 रुपये प्रति किलो के स्तर पर क्लोज हुई।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में सोने और चांदी की कीमतों को सबसे ज्यादा समर्थन मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव से मिल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के संकेत दिए हैं। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है और निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर भाग रहे हैं। परंपरागत रूप से सोना और चांदी संकट के समय सबसे सुरक्षित निवेश माने जाते हैं, इसलिए इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को सोना 4,600 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करता दिखा। पिछले कारोबारी सत्र में इसमें करीब 2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी ने भी बुलियन मार्केट को मजबूती दी है। जापानी येन में हस्तक्षेप की आशंकाओं के चलते डॉलर दबाव में आया, जिससे सोने और चांदी की कीमतों को समर्थन मिला। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी लगातार अपने स्वर्ण भंडार में इजाफा कर रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि बड़े संस्थागत निवेशकों का भरोसा अब भी सोने पर बना हुआ है।

चांदी की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके भाव 74 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गए। हालांकि सप्ताहिक आधार पर इसमें हल्की गिरावट जरूर देखी गई, लेकिन लंबी अवधि के लिए विशेषज्ञ अब भी बेहद बुलिश नजर आ रहे हैं। चांदी की औद्योगिक मांग लगातार बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर पैनल और हाई-टेक इंडस्ट्री में चांदी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। यही वजह है कि आने वाले समय में इसकी कीमतों में बड़ी तेजी की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि पिछले एक हफ्ते के दौरान सोने और चांदी दोनों में गिरावट देखने को मिली है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के अनुसार 24 कैरेट सोना इस सप्ताह 1,216 रुपये सस्ता होकर 1,50,263 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले इसका भाव 1,51,479 रुपये था। 22 कैरेट सोना भी करीब 1,100 रुपये कमजोर हुआ है। वहीं 18 कैरेट सोने में भी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान 29 अप्रैल को सोना सबसे निचले स्तर 1,47,973 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था।

चांदी में भी इसी तरह कमजोरी देखने को मिली। एक सप्ताह में चांदी करीब 3,500 रुपये सस्ती होकर 2,40,331 रुपये प्रति किलो पर आ गई। 29 अप्रैल को इसका न्यूनतम स्तर 2,36,300 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया था। हालांकि विशेषज्ञ इसे केवल अल्पकालिक मुनाफावसूली मान रहे हैं और लंबी अवधि में तेजी का ट्रेंड बरकरार बता रहे हैं।

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त टिप्पणियों ने भी बाजार पर असर डाला है। फेड ने संकेत दिए हैं कि महंगाई अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आई है और ब्याज दरों में कटौती जल्द होने की संभावना कम है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने की कीमतों पर दबाव बनाती हैं, क्योंकि इससे डॉलर मजबूत होता है। लेकिन मौजूदा वैश्विक संकटों और भू-राजनीतिक जोखिमों ने इस दबाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है, कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता जारी रहती है, तो सोना और चांदी दोनों रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकते हैं। बैंक ऑफ अमेरिका का अनुमान है कि सोना अगले एक साल में 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है, जो भारतीय बाजार में करीब 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बराबर होगा। वहीं चांदी 85 डॉलर प्रति औंस से ऊपर निकलकर भारत में लगभग 2.84 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है।

हालांकि निवेशकों को सावधानी बरतने की भी जरूरत है। कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव बेहद तेज होता है और छोटी अवधि में बड़ी गिरावट भी देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेश हमेशा सोच-समझकर और वित्तीय सलाहकार की राय लेकर ही करना चाहिए। सोना और चांदी लंबे समय के निवेश के लिए बेहतर विकल्प माने जाते हैं, लेकिन केवल तेजी की उम्मीद में बिना रणनीति निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।

फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका की ब्याज दर नीति, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और मिडल ईस्ट के हालात पर बनी हुई है। यदि ये सभी कारक मौजूदा दिशा में आगे बढ़ते रहे, तो आने वाला साल सोने और चांदी के निवेशकों के लिए बेहद चमकदार साबित हो सकता है।

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