
बिहार में सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) प्रतियोगिता परीक्षा पेपर लीक और नकल कांड को लेकर बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। आयोग ने परीक्षा में बायोमैट्रिक सेवा देने वाली एजेंसी M/s Sai Educare Pvt. Ltd. को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इसके साथ ही एजेंसी की बैंक गारंटी की राशि भी जब्त कर ली गई है। आयोग का कहना है कि जांच में एजेंसी की भूमिका संदिग्ध पाई गई और उसके खिलाफ मिले सबूतों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
दरअसल, बिहार के विभिन्न जिलों में 12 अप्रैल से 21 अप्रैल के बीच AEDO प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर गड़बड़ी और नकल कराने की कोशिश के मामले सामने आए थे। जांच में यह बात निकलकर सामने आई कि बायोमैट्रिक सत्यापन का काम संभाल रही एजेंसी M/s Sai Educare Pvt. Ltd. ने आयोग द्वारा तय सूची के कर्मचारियों की जगह अपने लोगों को ड्यूटी पर लगाया था। आरोप है कि इसी माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर और गड़बड़ी कराने की कोशिश की गई।
BPSC ने बताया कि एजेंसी से इस मामले में कई बार स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन उसका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। आयोग ने शिकायतों, FIR और जांच में मिले तकनीकी एवं दस्तावेजी सबूतों के आधार पर एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई का फैसला लिया। इसके बाद आयोग ने कंपनी को भविष्य की सभी परीक्षाओं और कार्यों से ब्लैकलिस्ट कर दिया।
इस मामले में बिहार पुलिस और जिला प्रशासन ने भी बड़ी कार्रवाई की है। अब तक 36 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं राज्य के छह जिलों में कुल आठ FIR दर्ज की गई हैं। जांच एजेंसियों को पता चला है कि इस पूरे रैकेट के तार मुंगेर से जुड़े हुए हैं। जांच के दौरान एक WhatsApp नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसके जरिए प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराने की साजिश रची जा रही थी। पुलिस के अनुसार “मास्टर” नाम का एक व्यक्ति इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था और वही पूरे गिरोह का मुख्य संचालक बताया जा रहा है।
BPSC ने अपने आधिकारिक नोटिफिकेशन में कहा है कि जिला प्रशासन की सतर्कता के कारण कई परीक्षा केंद्रों पर ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल करने की कोशिश को समय रहते पकड़ लिया गया। प्रशासन ने मौके पर कार्रवाई करते हुए कई संदिग्ध अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया। आयोग ने परीक्षा में गड़बड़ी और नकल की साजिश में शामिल पाए गए 32 अभ्यर्थियों को आगामी सभी परीक्षाओं से प्रतिबंधित कर दिया है। इन उम्मीदवारों पर भविष्य में आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में शामिल होने पर रोक लगा दी गई है।
इस बड़े घोटाले का असर लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ा है। AEDO परीक्षा के लिए करीब 11 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। लेकिन पेपर लीक और नकल के आरोपों के बाद BPSC ने 14 अप्रैल से 21 अप्रैल के बीच आयोजित सभी 9 पालियों की परीक्षा रद्द कर दी है। आयोग ने कहा है कि निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा कराना उसकी प्राथमिकता है, इसलिए किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अब लाखों अभ्यर्थियों को नई परीक्षा तिथि का इंतजार है। BPSC ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही परीक्षा की नई तारीखों की घोषणा की जाएगी। आयोग ने यह भी कहा है कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए तकनीकी निगरानी बढ़ाई जाएगी और परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी।
इस पूरे मामले ने बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों से अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ रही है। वहीं आयोग और प्रशासन अब इस तरह के रैकेट पर सख्ती से कार्रवाई करने के मूड में नजर आ रहे हैं।



