
नई दिल्ली: गुरुवार, 2 अप्रैल को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों को चौंका दिया। आमतौर पर वैश्विक तनाव के समय ‘सेफ-हेवन’ माने जाने वाले कीमती धातु इस बार उम्मीद के उलट दिशा में चले गए। जहां चांदी के दामों में करीब 14,000 रुपये तक की बड़ी गिरावट देखने को मिली, वहीं सोना भी 2,000 रुपये से ज्यादा सस्ता हो गया।
इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार माने जा रहे हैं, जिनमें सबसे प्रमुख अमेरिका-ईरान तनाव और उस पर Donald Trump का बयान बताया जा रहा है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर सोना-चांदी में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई और आगे क्या हो सकता है।
MCX पर सोना-चांदी का हाल
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गुरुवार सुबह 11 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार:
सोना (Gold):
जून वायदा सोना करीब 2.31% यानी 3,563 रुपये गिरकर 1,50,145 रुपये के इंट्राडे लो तक पहुंच गया। दिन के दौरान इसका उच्चतम स्तर 1,52,490 रुपये रहा।
चांदी (Silver):
मई वायदा चांदी में और भी तेज गिरावट देखने को मिली। इसमें 5.59% यानी करीब 13,613 रुपये की गिरावट आई और यह 2,29,888 रुपये तक लुढ़क गई। दिन में इसका हाई 2,42,800 रुपये रहा।
यह गिरावट बताती है कि बाजार में अचानक बिकवाली का दबाव बना और निवेशकों ने तेजी से अपनी पोजीशन काटी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट
केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं में गिरावट देखी गई:
- स्पॉट गोल्ड 2.26% गिरकर 4,650.30 डॉलर तक पहुंच गया
- स्पॉट सिल्वर 4.7% टूटकर 71.50 डॉलर पर आ गया
- COMEX गोल्ड 4,813 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा था
- COMEX सिल्वर में भी करीब 6% की गिरावट दर्ज की गई
इससे साफ है कि गिरावट एक ग्लोबल ट्रेंड का हिस्सा है, न कि सिर्फ घरेलू बाजार का असर।
गिरावट की सबसे बड़ी वजह: ट्रंप का बयान
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अचानक गिरावट की सबसे बड़ी वजह Donald Trump का हालिया बयान है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष अब खत्म होने के करीब है। इस बयान ने बाजार में यह संकेत दिया कि वैश्विक तनाव कम हो सकता है।
हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका अगले 2-3 हफ्तों में ईरान पर “बेहद जोरदार” हमला कर सकता है।
इसके बावजूद निवेशकों ने फिलहाल इस बयान को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया, जिससे ‘सेफ-हेवन’ डिमांड कमजोर पड़ गई और सोना-चांदी बिकने लगे।
सेफ-हेवन डिमांड क्यों घटी?
आमतौर पर जब दुनिया में युद्ध या तनाव बढ़ता है, तो निवेशक सोना-चांदी की ओर भागते हैं क्योंकि ये सुरक्षित निवेश माने जाते हैं।
लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग रही:
- निवेशकों को लगा कि तनाव जल्द खत्म हो सकता है
- इसलिए उन्होंने मुनाफावसूली शुरू कर दी
- पहले से ऊंचे स्तर पर पहुंचे दामों पर बिकवाली तेज हुई
- टेक्निकल कारणों से भी ‘लॉन्ग अनवाइंडिंग’ देखने को मिली
चांदी में ‘शॉर्ट बिल्डअप’ और सोने में ‘लॉन्ग अनवाइंडिंग’ ने गिरावट को और तेज कर दिया।
रुपये और RBI का भी असर
भारतीय बाजार में एक और महत्वपूर्ण फैक्टर रहा—रुपये की मजबूती।
- डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती आई
- माना जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप से गिरावट रुकी
- मजबूत रुपया सोने-चांदी के आयात को सस्ता बनाता है
- इससे घरेलू कीमतों पर दबाव आता है
यानी वैश्विक कीमतों के साथ-साथ करेंसी फैक्टर ने भी गिरावट को बढ़ाया।
कच्चे तेल में उल्टा ट्रेंड
जहां सोना-चांदी गिरे, वहीं कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया:
- ब्रेंट क्रूड 5.24% बढ़कर 106.47 डॉलर प्रति बैरल
- WTI क्रूड 4.5% बढ़कर 104.64 डॉलर प्रति बैरल
इसका कारण मध्य पूर्व में सप्लाई को लेकर चिंता और ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ से जुड़ा जोखिम माना जा रहा है।
यानी बाजार में एक ही समय पर अलग-अलग एसेट क्लास अलग दिशा में चल रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
यह गिरावट निवेशकों के लिए एक बड़ा संकेत है कि:
- बाजार बेहद अस्थिर है
वैश्विक घटनाएं अचानक रुख बदल सकती हैं - सेफ-हेवन भी हमेशा सुरक्षित नहीं
सोना-चांदी भी तेजी से गिर सकते हैं - ट्रेडिंग में जोखिम बढ़ा
शॉर्ट और लॉन्ग पोजीशन तेजी से बदल रही हैं - लॉन्ग टर्म बनाम शॉर्ट टर्म सोचें
छोटी अवधि में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहेगा
आगे क्या रहेगा रुख?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोना और चांदी दोनों पर दबाव बना रह सकता है, लेकिन:
- अगर अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ता है → कीमतें उछल सकती हैं
- डॉलर मजबूत होता है → सोने पर दबाव रहेगा
- केंद्रीय बैंकों की खरीद जारी रहती है → लंबी अवधि में सपोर्ट मिलेगा
क्या अभी निवेश करना सही है?
अगर आप निवेश की सोच रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखें:
- एकमुश्त निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे खरीदारी करें
- गिरावट को अवसर के रूप में देखें, लेकिन जल्दबाजी न करें
- हमेशा वित्तीय सलाहकार से सलाह लेकर ही निवेश करें
- शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग में सावधानी बरतें



