रुद्रपुर: ऊधम सिंह नगर के मुख्यालय रुद्रपुर में किसानों का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। भारतीय किसान यूनियन टिकैत के बैनर तले सैकड़ों किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर के मुख्य गेट के बाहर धरने पर डटे हुए हैं। किसानों ने कलेक्ट्रेट गेट को ही अपना धरनास्थल बना लिया है और साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरना स्थल पर सुबह से लेकर देर शाम तक किसानों की आवाजाही बनी रही। किसान अपने साथ भोजन, पानी और अन्य जरूरी सामान लेकर पहुंचे। धरने के दौरान चाय-नाश्ता और भोजन की व्यवस्था भी किसानों ने अपने स्तर पर की। किसान नेताओं का कहना है कि आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण और गैर-राजनीतिक रखा जाएगा। इसी कारण किसी भी राजनीतिक दल को आंदोलन के मंच का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी गई।
कलेक्ट्रेट गेट पर चल रहे धरने को देखते हुए प्रशासन और पुलिस भी पूरी तरह सतर्क नजर आई। मुख्य गेट और आसपास के क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार धरना स्थल की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। एसडीएम सदर समेत अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। किसानों का कहना है कि प्रशासन की ओर से धरना स्थल पर पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है, जबकि टेंट, भोजन और अन्य आवश्यक इंतजाम किसान स्वयं कर रहे हैं।
आंदोलन के दूसरे दिन किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़, खटीमा विधायक भुवन कापड़ी और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल भी धरना स्थल पर पहुंचे। तीनों नेताओं ने किसानों से मुलाकात की और उनके आंदोलन तथा मांगों को समर्थन देने की बात कही। कुछ समय तक वे किसानों के बीच बैठे भी रहे। हालांकि, जब मंच साझा करने की बात सामने आई तो किसान नेताओं ने स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया।
किसानों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं है। यह आंदोलन केवल किसानों की समस्याओं और उनकी मांगों को लेकर किया जा रहा है। किसान नेताओं ने साफ कहा कि वे किसी भी पार्टी को अपने आंदोलन का राजनीतिक लाभ नहीं उठाने देंगे। मंच साझा करने की अनुमति नहीं मिलने के बाद तीनों नेता कुछ समय धरना स्थल पर रुकने के बाद वापस चले गए।
किसान नेता बाजवा ने कहा कि किसान अपने संघर्ष को पूरी तरह अपने दम पर आगे बढ़ाने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि किसान जब अपने खेतों में काम करने जाते हैं तो अपने खाने-पीने और जरूरी सामान की व्यवस्था स्वयं करते हैं। इसी तरह आंदोलन में भी किसानों ने अपनी जरूरतों की तैयारी पहले से कर रखी है। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी राजनीतिक सहारे की जरूरत नहीं है और वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होकर संघर्ष कर रहे हैं।
धरने पर बैठे किसानों ने सरकार और प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। किसानों की प्रमुख मांगों में कृषि कार्य के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्यूबवेलों के बिजली बिल माफ करना शामिल है। इसके साथ ही घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की मांग भी उठाई गई है। किसानों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और खेती की लागत के बीच बिजली का खर्च लगातार किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रहा है।
किसानों ने संपूर्ण कर्ज माफी की मांग भी प्रमुखता से उठाई है। उनका कहना है कि खेती की बढ़ती लागत, प्राकृतिक आपदाओं और फसलों के उचित दाम न मिलने के कारण बड़ी संख्या में किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में किसानों का कर्ज माफ कर उन्हें आर्थिक राहत दी जानी चाहिए।
आंदोलनकारी किसानों ने पहाड़ी जिलों में खेती करने वाले किसानों के लिए प्रतिमाह 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में खेती करना मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक कठिन है। वहां संसाधनों की कमी, जंगली जानवरों से फसलों को नुकसान और बाजार तक पहुंच जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए पहाड़ के किसानों के लिए विशेष आर्थिक सहायता की व्यवस्था की जानी चाहिए।
धरने में बाजपुर क्षेत्र के 20 गांवों की भूमि का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। किसानों ने इन गांवों की जमीन पर लगी रोक हटाने और किसानों को भूमि पर पूर्ण अधिकार देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि लंबे समय से भूमि संबंधी विवाद और प्रतिबंध के कारण संबंधित गांवों के लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को लेकर भी आंदोलनकारियों ने नाराजगी जताई। किसानों ने वर्ष 2007 के गन्ना भुगतान से जुड़े करीब एक करोड़ रुपये के बकाया और वर्ष 2011-12 के करीब 25 करोड़ रुपये के भुगतान को तत्काल जारी करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि वर्षों पुराने बकाये का भुगतान न होने से अनेक किसान आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
इसके अलावा प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाए जाने का भी किसानों ने विरोध किया है। किसानों की मांग है कि नए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और जिन स्थानों पर स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, उन्हें हटाया जाए। किसानों ने गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 700 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग भी रखी है। साथ ही किसानों की सभी श्रेणियों की भूमि पर उनके हक और कब्जे को पूरी तरह सुरक्षित करने की मांग की गई है।
कलेक्ट्रेट गेट पर दूसरे दिन भी जारी इस आंदोलन ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि धरना अब तक शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है, लेकिन किसानों का स्पष्ट कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जा सकता है। फिलहाल रुद्रपुर में किसान कलेक्ट्रेट गेट पर डटे हुए हैं और सभी की नजर अब सरकार तथा प्रशासन की ओर है कि किसानों की मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है।
