चंडीगढ़: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चरणजीत सिंह चन्नी इन दिनों अपनी पढ़ाई को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC की महत्वपूर्ण बैठक में उनकी गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए थे। पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पार्टी की अहम बैठक से चन्नी की दूरी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। अब खुद चरणजीत सिंह चन्नी ने अपनी अनुपस्थिति की वजह बताते हुए पूरे मामले पर स्थिति साफ कर दी है।
चन्नी ने बताया कि वे किसी राजनीतिक मतभेद या पार्टी की गतिविधियों से दूरी के कारण कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में शामिल नहीं हुए थे। दरअसल, उसी समय उनकी पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विषय में एमए की परीक्षा थी, जिसके कारण वे बैठक में नहीं पहुंच सके। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने बैठक में शामिल न होने से पहले कांग्रेस हाईकमान को इसकी जानकारी दे दी थी और परीक्षा में शामिल होने के लिए पहले ही अनुमति ले ली थी।
मीडिया से बातचीत के दौरान चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठकें समय-समय पर होती रहती हैं और वे भविष्य में पार्टी की बैठकों में जरूर शामिल होंगे। लेकिन इस समय उनकी पढ़ाई और परीक्षा का ऐसा चरण चल रहा था, जहां परीक्षा छोड़ने का मतलब उनकी डिग्री पूरी होने में देरी होना था। उन्होंने कहा कि यदि वे इस परीक्षा में शामिल नहीं होते तो उन्हें अपनी पढ़ाई के लिए एक साल पीछे जाना पड़ सकता था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन के साथ-साथ शिक्षा का भी उनके जीवन में विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि वे अपनी पढ़ाई को गंभीरता से आगे बढ़ा रहे हैं और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए की डिग्री हासिल करने की दिशा में लगातार मेहनत कर रहे हैं। चन्नी के अनुसार, परीक्षा छोड़ देने से न केवल उनकी पढ़ाई प्रभावित होती, बल्कि जिस विषय पर वे आगे रिसर्च करना चाहते हैं, उसका काम भी टल सकता था।
चरणजीत सिंह चन्नी ने पंजाब यूनिवर्सिटी के साथ अपने लंबे जुड़ाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय से उनका पुराना रिश्ता रहा है और उन्हें इससे जुड़ाव पर गर्व महसूस होता है। उनके अनुसार, वे पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़े कई शैक्षणिक कार्यक्रमों का हिस्सा रहे हैं और अब भी अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए गंभीरता से प्रयास कर रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि एमए की पढ़ाई के दौरान वे अब तक करीब 20 परीक्षाएं दे चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले सेमेस्टर में उन्होंने 74 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। चन्नी का कहना है कि वे केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि आगे भी पढ़ाई और रिसर्च का काम जारी रखने की योजना बना रहे हैं।
उन्होंने बताया कि भविष्य में उनका रिसर्च कार्य पंजाब के विकास से जुड़े विषयों पर केंद्रित हो सकता है। एक पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में प्रशासन और पंजाब की सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को करीब से देखने के बाद वे इन विषयों को अकादमिक स्तर पर भी समझने और उन पर अध्ययन करने में रुचि रखते हैं।
चन्नी की CWC बैठक में गैरमौजूदगी को लेकर उठ रहे सवालों पर उनके इस जवाब के बाद स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। पंजाब की राजनीति में सक्रिय रहने और कांग्रेस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने अपनी परीक्षा को प्राथमिकता दी। उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व को पहले ही इसकी जानकारी दे दी गई थी, इसलिए उनकी अनुपस्थिति को किसी राजनीतिक मतभेद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
चरणजीत सिंह चन्नी का यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आमतौर पर बड़े राजनीतिक नेताओं को पार्टी बैठकों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में व्यस्त देखा जाता है। ऐसे में एक पूर्व मुख्यमंत्री का अपनी उच्च शिक्षा जारी रखना और परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठक से दूरी बनाना लोगों का ध्यान खींच रहा है।
अब चन्नी ने साफ कर दिया है कि उनकी गैरमौजूदगी का कारण केवल उनकी पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए की परीक्षा थी। उन्होंने कहा कि डिग्री पूरी करना और आगे रिसर्च करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है, जबकि पार्टी की बैठकों और राजनीतिक जिम्मेदारियों में उनकी भागीदारी आगे भी जारी रहेगी।
