
देहरादून: उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा इस वर्ष 19 अप्रैल से विधिवत रूप से शुरू होने जा रही है। पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, इस बार यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। अब तक 10 लाख से अधिक लोग यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं, जो इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ सकती है।
मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार का लक्ष्य हर एक श्रद्धालु को सुरक्षित और सुगम दर्शन कराना है। उन्होंने कहा कि इस बार किसी भी प्रकार की “कैपिंग” यानी संख्या सीमा तय नहीं की गई है। सरकार का प्रयास रहेगा कि जो भी श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए उत्तराखंड पहुंचे, उन्हें बिना किसी बाधा के दर्शन कराए जाएं।
चारधाम यात्रा की शुरुआत गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ होगी। इसके बाद केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के कपाट भी निर्धारित तिथियों पर खोले जाएंगे। हर वर्ष की तरह इस बार भी यात्रा राज्य के लिए धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सरकार ने यात्रा की तैयारियों को लेकर व्यापक स्तर पर काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सड़कों के सुदृढ़ीकरण, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यात्रा मार्गों पर पेयजल, शौचालय, चिकित्सा सुविधाएं और आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
पिछले वर्ष आई आपदा के कारण यात्रा लगभग डेढ़ महीने तक प्रभावित रही थी, बावजूद इसके 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने चारधाम के दर्शन किए थे। इस अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार सरकार और अधिक सतर्कता बरत रही है। प्राकृतिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन को समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
इसके साथ ही, गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) के गेस्ट हाउसों में पहले से ही 5 करोड़ रुपये से अधिक की बुकिंग हो चुकी है, जो इस बात का प्रमाण है कि श्रद्धालु बड़ी संख्या में यात्रा की योजना बना रहे हैं। होटल, धर्मशालाएं और अन्य आवासीय सुविधाएं भी तेजी से बुक हो रही हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि यात्रा शुरू होने से पहले वह स्वयं तैयारियों की समीक्षा बैठक करेंगे और संभवतः धामों का दौरा भी करेंगे। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं का स्वागत करना और उन्हें बेहतर सुविधाएं देना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
कुल मिलाकर, चारधाम यात्रा 2026 को लेकर प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है और श्रद्धालुओं में भी भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। यदि व्यवस्थाएं इसी प्रकार सुदृढ़ रहती हैं, तो इस वर्ष यात्रा नए रिकॉर्ड बना सकती है और उत्तराखंड की आर्थिकी को भी मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



