देश में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर 22%, 25% या 30% किए जाने की चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने संसद में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। सरकार ने कहा है कि फिलहाल पेट्रोल में 20 प्रतिशत (E20) से अधिक एथेनॉल मिलाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इस बयान के साथ ही सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में एथेनॉल मिश्रण की सीमा बढ़ाने पर विचार किया जाता है, तो वह केवल व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों से विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही संभव होगा।
राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि वर्तमान में देश में E20 ईंधन नीति प्रभावी है और इससे आगे बढ़ने को लेकर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने जैसे किसी भी कदम का सीधा संबंध वाहन इंजनों की क्षमता, ईंधन की गुणवत्ता, पर्यावरणीय प्रभाव और उपभोक्ताओं के हितों से जुड़ा होता है। इसलिए सरकार बिना पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण और तकनीकी तैयारी के ऐसा कोई निर्णय नहीं लेगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में एथेनॉल मिश्रण को 20 प्रतिशत से अधिक करने पर विचार किया जाता है, तो उससे पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों (OMCs), अनुसंधान संस्थानों और अन्य विशेषज्ञ एजेंसियों के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके अलावा वाहन इंजनों पर पड़ने वाले प्रभाव, उत्सर्जन स्तर, ईंधन दक्षता और सुरक्षा संबंधी पहलुओं का भी गहन अध्ययन किया जाएगा। यानी किसी भी नए निर्णय से पहले सभी तकनीकी और वैज्ञानिक मानकों का पालन किया जाएगा।
भारत में पेट्रोल के साथ एथेनॉल मिश्रण की यात्रा पिछले एक दशक में चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ी है। सरकार के अनुसार वर्ष 2013-14 में पेट्रोल में औसत एथेनॉल मिश्रण केवल लगभग 1.53 प्रतिशत था। इसके बाद लगातार प्रयासों के चलते यह आंकड़ा बढ़ता गया। 2021-22 में यह लगभग 10 प्रतिशत तक पहुंचा, जबकि 2023-24 में औसत मिश्रण 14.6 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद 2024-25 में यह बढ़कर लगभग 19.2 प्रतिशत हो गया और अंततः 2025-26 के दौरान भारत ने सफलतापूर्वक 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया।
सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम केवल ईंधन नीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी मुद्रा की बचत, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने से भी जुड़ा हुआ है। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है, जिससे देश का आयात बिल घटता है। साथ ही गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाले एथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों को भी अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है। इसके अलावा एथेनॉल मिश्रित ईंधन से कार्बन उत्सर्जन में कमी आने की संभावना भी रहती है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की दिशा में कोई भी अगला कदम केवल वैज्ञानिक तथ्यों और तकनीकी क्षमता के आधार पर ही उठाया जाएगा। मौजूदा समय में देशभर में उपलब्ध E20 ईंधन को ही मानक ईंधन के रूप में जारी रखा जाएगा और उपभोक्ताओं को किसी नए मिश्रण वाले पेट्रोल को लेकर भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है।
संसद में दिए गए इस स्पष्ट जवाब के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिलाने की कोई योजना लागू नहीं की जा रही है। भविष्य में यदि इस संबंध में कोई निर्णय लिया जाता है, तो सरकार पहले व्यापक परीक्षण, विशेषज्ञों की राय और उद्योग जगत से परामर्श के बाद ही आगे बढ़ेगी। ऐसे में फिलहाल देश में E20 ही पेट्रोल का अधिकतम स्वीकृत एथेनॉल मिश्रण बना रहेगा।
