
देहरादून, 28 नवंबर 2025। जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तारीकरण को लेकर शुक्रवार को ऋषिपर्णा सभागार में हुई उच्चस्तरीय बैठक में जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में किसी भी प्रकार की देरी, लापरवाही या बाधा स्वीकार्य नहीं होगी। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के लिए डीएम ने विभागीय अधिकारियों, एयरपोर्ट प्रबंधन और नगर निकायों को कड़े निर्देश जारी किए।
बैठक में मुख्य रूप से एयरफील्ड पर्यावरण प्रबंधन, पक्षियों/वन्यजीवों की आवाजाही, कचरा निस्तारण, डंपिंग यार्ड विस्थापन, सुरक्षा व्यवस्था और प्रभावित लोगों के मुआवजा वितरण जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
“एयरपोर्ट विस्तारीकरण में बाधा अनुमन्य नहीं” – जिलाधिकारी
जिलाधिकारी सविन बंसल ने बैठक की शुरुआत में ही कहा कि जौलीग्रांट एयरपोर्ट का विस्तारीकरण न केवल उत्तराखंड सरकार की प्राथमिकता है, बल्कि यह पूरा प्रोजेक्ट राज्य के आर्थिक विकास, पर्यटन विस्तार और रोजगार सृजन में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
डीएम ने कहा—
“एयरपोर्ट विस्तारीकरण केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि यह राज्य की आय बढ़ाने, स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने और उत्तराखंड की संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने का अवसर है। किसी भी स्तर पर विलंब बिल्कुल क्षम्य नहीं होगा।”
उन्होंने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से प्रभावित परिवारों को मुआवजा शीघ्र वितरित करने के निर्देश दिए और स्पष्ट किया कि एक भी फाइल लंबित नहीं रहनी चाहिए।
कचरा निस्तारण पर सख्ती: “ट्रामेल और पोकलैंड मशीनें तुरंत खरीदें”
बैठक में सबसे गंभीर मुद्दा रहा—एयरपोर्ट के निकट स्थित डंपिंग यार्ड में जमा कूड़े का पहाड़, जो बर्ड-हिट घटनाओं का बड़ा कारण बन सकता है।
डीएम ने डोईवाला नगर पालिका को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि:
- कूड़ा निस्तारण तेज करें
- ट्रामेल मशीन व पोकलैंड मशीन तुरंत खरीदी जाएं
- जब तक दोनों मशीनें क्रय न हों, पालिका का कोई भी अन्य प्रस्ताव स्वीकृत नहीं होगा
- डंपिंग यार्ड को पूरी तरह टिन शेड से कवर किया जाए
- मशीनों और मैनपावर दोनों की संख्या बढ़ाई जाए
उन्होंने कहा कि हवाई अड्डे के संचालन क्षेत्र में जमा कचरा पक्षियों को आकर्षित करता है, जिससे विमान की सुरक्षा सीधे प्रभावित होती है। इसलिए कचरे का नियमित निस्तारण सर्वोच्च प्राथमिकता है।
डंपिंग यार्ड स्थानांतरण: 7 दिन में नई जमीन चिन्हित करने का निर्देश
जौलीग्रांट एयरपोर्ट की 10 किमी परिधि में स्थित केशवपुरी डंपिंग यार्ड को लेकर डीएम ने विशेष चिंता व्यक्त की।
उन्होंने एसडीएम डोईवाला को निर्देश दिया:
- 7 दिनों के भीतर डंपिंग यार्ड के लिए नई भूमि का चयन किया जाए
- वर्तमान भूमि की भूमि श्रेणी का विवरण उपलब्ध कराया जाए
डीएम ने कहा कि एयरपोर्ट के इतना नजदीक डंपिंग यार्ड का रहना सुरक्षा मानकों के विपरीत है और यह तत्काल स्थानांतरण योग्य है।
सुरक्षा सर्वोपरि: “विमान, पैसेंजर और आमजन की सुरक्षा हमारा कर्तव्य”
बैठक के दौरान डीएम बंसल ने कहा कि एयरफील्ड की सुरक्षा के सभी मानकों को ध्यान में रखते हुए व्यापक रणनीति बनाई जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि:
- हवाई अड्डे के आसपास की दुकानों, मांस की दुकानों, होटल-रेस्तरां आदि की जांच की जाए
- इनसे उत्पन्न होने वाले कचरे का नियमित और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित हो
- एयरपोर्ट परिसर के अंदर और बाहर स्थित नालियों की क्षमता बढ़ाई जाए और नियमित सफाई सुनिश्चित हो
सिंचाई विभाग को भी नालों की सफाई और निर्माण में तेजी लाने को कहा गया।
एयरपोर्ट अधिकारियों ने उठाए महत्वपूर्ण मुद्दे
बैठक में एयरपोर्ट प्रबंधन ने कई महत्वपूर्ण चिंताएं डीएम के समक्ष रखीं:
- एयरपोर्ट के आसपास कचरे की डंपिंग
- अनधिकृत मांस की दुकानें, जहाँ पक्षियों का जमाव बढ़ता है
- निर्धारित ऊंचाई से अधिक पेड़ और इमारतें
- एयरफील्ड के भीतर और बाहर नालियों की क्षमता में अंतर
अधिकारियों ने कहा कि यदि ये समस्याएँ दूर नहीं की गईं, तो उड़ानों की सुरक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है।
विकास और रोजगार के नए आयाम
जिलाधिकारी ने कहा कि एयरपोर्ट विस्तारीकरण न सिर्फ राज्य की हवाई क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि:
- पर्यटन में भारी बढ़ोतरी
- स्थानीय युवाओं के लिए नई नौकरियों का सृजन
- लॉजिस्टिक्स और व्यापार गतिविधियों का विस्तार
- विश्व स्तर पर उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती
जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहले ही देश के व्यस्त हवाई अड्डों में शामिल हो चुका है, और विस्तारीकरण के बाद यह अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला प्रमुख एयर हब बनने की ओर अग्रसर होगा।
बैठक में कई विभागों के अधिकारी उपस्थित
बैठक में निम्न अधिकारी मौजूद रहे:
- अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा
- एसडीएम अपर्णा ढौडियाल
- विमानपत्तन निदेशक बी.सी.एच. नेगी
- उप महाप्रबंधक अमित जिंदल, अनिल कुमार मस्ताना
- प्रबंधक शुभम वत्स
- नगर पालिका डोईवाला के अधिशासी अधिकारी एल.एल. शाह
- निरीक्षण अधिकारी सचिन सिंह रावत, कुलदीप खत्री
- अन्य विभागीय अधिकारी
जौलीग्रांट एयरपोर्ट विस्तारीकरण परियोजना को लेकर जिलाधिकारी सविन बंसल का स्पष्ट संदेश है—प्रोजेक्ट में देरी या ढिलाई किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं।
राज्य की आर्थिक प्रगति, पर्यटन विकास और रोजगार को ध्यान में रखते हुए यह परियोजना न केवल प्रशासन के लिए, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
डीएम के सख्त निर्देशों और समयबद्ध कार्रवाई के साथ, यह उम्मीद है कि एयरपोर्ट विस्तारीकरण परियोजना जल्द ही गति पकड़ेगी और उत्तराखंड आने वाले वर्षों में हवाई यातायात और पर्यटन के एक नए युग में प्रवेश करेगा।



