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दिल्लीफीचर्ड

Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने दी दिवाली पर ‘ग्रीन पटाखों’ की सशर्त अनुमति, ऑनलाइन बिक्री पर सख्त पाबंदी

The Hill India News
Last updated: October 15, 2025 1:32 pm
The Hill India News
Published: October 15, 2025
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नई दिल्लीः दिवाली से पहले राजधानी दिल्ली और एनसीआर के करोड़ों लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए कुछ सख्त शर्तों के साथ ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह छूट सीमित समय और नियंत्रित क्षेत्रों के लिए ही होगी, ताकि लोगों के उत्सव के साथ पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।

Contents
18 से 20 अक्टूबर तक ही बिकेंगे ग्रीन पटाखेपटाखे जलाने का समय भी तय — केवल 4 घंटे की अनुमतिपुलिस और प्रशासन मिलकर बनाएंगे पेट्रोलिंग टीमऑनलाइन पटाखों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध14 से 25 अक्टूबर तक मॉनिटरिंग, रिपोर्ट पेश करने के निर्देशदिल्ली-एनसीआर में पहले से ही हवा जहरीली“साफ हवा और परंपरा — दोनों का संतुलन जरूरी”अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद

18 से 20 अक्टूबर तक ही बिकेंगे ग्रीन पटाखे

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि ग्रीन पटाखों की बिक्री केवल 18 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक ही की जा सकेगी। ये पटाखे केवल उन्हीं स्थानों पर बेचे जाएंगे जिन्हें जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक संयुक्त रूप से चिन्हित करेंगे। इन स्थानों की जानकारी का व्यापक प्रचार किया जाएगा ताकि आम नागरिकों को पता रहे कि वे कहां से वैध ग्रीन पटाखे खरीद सकते हैं।

कोर्ट ने कहा कि यह फैसला संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। “दिवाली का उत्सव सबका अधिकार है, लेकिन स्वच्छ वायु का अधिकार उससे भी बड़ा है,” बेंच ने टिप्पणी की।


पटाखे जलाने का समय भी तय — केवल 4 घंटे की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे जलाने के लिए समय सीमा भी तय की है। आदेश के अनुसार दिवाली से एक दिन पहले और दिवाली के दिन ही पटाखे जलाने की अनुमति होगी।

  • सुबह 6 से 7 बजे तक
  • रात 8 से 10 बजे तक

इस दौरान सिर्फ वही पटाखे जलाए जा सकेंगे जिन पर क्यूआर कोड मौजूद होगा और जो NEERI (National Environmental Engineering Research Institute) द्वारा अनुमोदित होंगे।


पुलिस और प्रशासन मिलकर बनाएंगे पेट्रोलिंग टीम

कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के पुलिस आयुक्तों और जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे विशेष पेट्रोलिंग टीम गठित करें। इन टीमों में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी भी शामिल होंगे। इनका काम यह सुनिश्चित करना होगा कि—

  • सिर्फ क्यूआर कोड वाले ग्रीन पटाखे ही बेचे और जलाए जाएं,
  • निर्धारित समय से बाहर पटाखे न फोड़े जाएं,
  • और प्रतिबंधित रसायनों वाले पटाखों की बिक्री पूरी तरह रोकी जाए।

अगर कोई दुकानदार या कंपनी इन आदेशों का उल्लंघन करते पाए जाते हैं तो उनके लाइसेंस रद्द किए जाएंगे और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।


ऑनलाइन पटाखों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन (ई-कॉमर्स) वेबसाइटों पर पटाखों की बिक्री या खरीद पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश दिया है। बेंच ने कहा कि ऑनलाइन बिक्री से नियमों का उल्लंघन आसान हो जाता है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास विफल होते हैं।

इसके साथ ही कोर्ट ने बेरियम वाले पटाखे, लड़ी पटाखे, और NEERI द्वारा अप्रूव न किए गए किसी भी प्रकार के पटाखे को पूरी तरह प्रतिबंधित घोषित किया है।

कोर्ट ने सख्त चेतावनी दी —

“यदि आदेशों का पालन नहीं हुआ तो दोबारा संपूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाएगा। किसी भी स्थिति में जनता के स्वास्थ्य के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।”


14 से 25 अक्टूबर तक मॉनिटरिंग, रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (SPCB) को निर्देश दिया है कि वे 14 अक्टूबर से 25 अक्टूबर के बीच हवा, मिट्टी और पानी की गुणवत्ता का लगातार मॉनिटरिंग करें और इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें।

यह रिपोर्ट यह तय करेगी कि ग्रीन पटाखों के उपयोग के बावजूद वायु गुणवत्ता पर कितना प्रभाव पड़ा है और क्या भविष्य में इस तरह की अनुमति जारी रखी जा सकती है।


दिल्ली-एनसीआर में पहले से ही हवा जहरीली

दरअसल, दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों वायु गुणवत्ता लगातार बिगड़ती जा रही है। आनंद विहार में AQI 350 के पार पहुंच चुका है, जबकि नोएडा और गाजियाबाद जैसे इलाकों में भी स्थिति चिंताजनक है। इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट ने संतुलित रास्ता अपनाने का निर्णय लिया।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) पहले ही GRAP-I लागू कर चुका है, जिसमें पुरानी डीजल और पेट्रोल गाड़ियों को न चलाने की सिफारिश की गई है और सभी वाहनों के लिए PUC सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया गया है।


“साफ हवा और परंपरा — दोनों का संतुलन जरूरी”

बेंच ने कहा कि अदालत का उद्देश्य किसी की धार्मिक या सांस्कृतिक परंपराओं को रोकना नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार की रक्षा करना है।

“त्योहार मनाना जरूरी है, लेकिन यह सुनिश्चित करना उससे भी ज्यादा जरूरी है कि बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में दिक्कत न हो,” अदालत ने टिप्पणी की।

कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें इस दौरान जागरूकता अभियान चलाएं ताकि लोग यह समझ सकें कि ग्रीन पटाखे पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं और परंपरा का उल्लंघन किए बिना भी दिवाली मनाई जा सकती है।


अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश की प्रति दिल्ली-एनसीआर के सभी जिलों के कलेक्टरों और पुलिस प्रमुखों को भेजने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी, जब प्रदूषण बोर्डों की रिपोर्ट के आधार पर अगला कदम तय किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दिवाली और पर्यावरण दोनों के संतुलन का प्रयास है। जहां एक ओर यह निर्णय लोगों को सीमित दायरे में त्योहार मनाने की अनुमति देता है, वहीं दूसरी ओर यह सरकारों और जनता को पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभाने की याद भी दिलाता है। यह आदेश न केवल दिल्ली-एनसीआर बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश है कि “खुशियों के साथ स्वच्छता और स्वास्थ्य की भी रक्षा जरूरी है।”

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