दिल्लीफीचर्ड

दिल्ली सरकार ने शराब दुकानों के संचालन पर कसा शिकंजा, चारों नगर निगमों को जारी किया परामर्श

नरेला में फर्जीवाड़े के मामले के बाद विभाग सक्रिय, ग्राहकों की शिकायतों के त्वरित समाधान पर जोर

नई दिल्ली, 15 नवंबर: दिल्ली में शराब की दुकानों के संचालन को लेकर बढ़ती शिकायतों और हाल ही में उजागर हुए एक बड़े फर्जीवाड़े के बाद आबकारी विभाग हरकत में आ गया है। दिल्ली सरकार ने राजधानी के सभी चारों नगर निगमों—पूर्वी, उत्तरी, दक्षिणी और नयी दिल्ली नगर पालिका परिषद—को एक विस्तृत परामर्श (Advisory) जारी करते हुए शराब दुकानों की निगरानी, संचालन व्यवस्था और उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।

यह कार्रवाई तब हुई जब दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (DSIIDC) द्वारा संचालित नरेला स्थित एक शराब की दुकान में बड़े पैमाने पर सस्ती शराब और पानी को महंगी ब्रांड की बोतलों में भरकर ग्राहकों को ठगने का मामला सामने आया। मौके पर पकड़े गए कर्मचारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया और जांच जारी है।


नरेला का मामला: महंगी ब्रांड की बोतलों में सस्ती शराब और पानी

नरेला क्षेत्र में DSIIDC के अधीन एक शराब दुकान पर चल रहे इस फर्जीवाड़े ने पूरे आबकारी विभाग को हिलाकर रख दिया। सूत्रों के अनुसार, दुकान के कर्मचारियों ने ग्राहकों के बीच लोकप्रिय महंगी शराब ब्रांडों की खाली बोतलें इकट्ठा कर रखी थीं। अंदरूनी हिस्से में एक कमरे में सस्ती शराब और पानी मिलाकर दोबारा बोतलें तैयार की जा रही थीं, जिन्हें असली के दाम पर ग्राहकों को बेचा जा रहा था।

आबकारी अधिकारियों का कहना है कि यह गतिविधि न केवल उपभोक्ता अधिकारों का खुला उल्लंघन है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती है, क्योंकि मिलावटी शराब से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं।

जांच दल के एक अधिकारी ने बताया—

“यह पहली बार है जब किसी सरकारी निगम की दुकान में इतनी बड़ी मात्रा में मिलावटी शराब तैयार होते पकड़ी गई है। यह संगठित स्तर पर चलने वाली गतिविधि प्रतीत होती है।”

मामले के सामने आते ही स्थानीय उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिला। कई लोगों ने शिकायत की कि उन्हें पहले भी बोतलों की गुणवत्ता, सील और स्वाद को लेकर संदेह हुआ था, लेकिन वे पुष्टि नहीं कर पाए।


सरकार का सख्त रुख: ‘उचित संचालन और पारदर्शिता’ पर जोर

नरेला के मामले के बाद दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि शराब दुकानों में किसी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी के तहत आबकारी विभाग ने सभी नगर निगमों को भेजे गए परामर्श में कई सख्त निर्देश शामिल किए हैं।

इनमें प्रमुख हैं—

1. दुकानों की नियमित निगरानी (Routine Inspection)

  • प्रत्येक लाइसेंस प्राप्त शराब दुकान की साप्ताहिक जांच
  • स्टॉक रजिस्टर, इनवॉयस और सप्लाई चेन की क्रॉस-वेरिफिकेशन
  • CCTV फुटेज की अचानक जांच

2. उपभोक्ता शिकायतों का त्वरित निवारण

परामर्श में ग्राहकों से प्राप्त शिकायतों के 24 घंटे के भीतर निपटान पर जोर दिया गया है।
इसके लिए:

  • एक विशेष हेल्पलाइन नंबर
  • ईमेल समर्थन
  • जिला-स्तरीय मॉनिटरिंग सेल

स्थापित किए जा रहे हैं।

3. नकली या टूटे सील वाली बोतलों पर तुरंत कार्रवाई

यदि किसी दुकान में—

  • टूटी हुई सील,
  • संदिग्ध बोतल,
  • गलत MRP,
  • या दूसरे राज्य से अवैध शराब मिलने की सूचना मिली,
    तो स्टोर को तत्काल निलंबित करने का निर्देश है।

4. DSIIDC और निगमों के बीच संयुक्त अभियान

हाल की घटना के बाद सरकार दोनों एजेंसियों—DSIIDC और नगर निगमों—के बीच संयुक्त विशेष जांच टीम (Joint Task Force) गठित करने पर भी विचार कर रही है।


व्यापारियों में चिंता, लेकिन उपभोक्ताओं ने स्वागत किया

दिल्ली के शराब विक्रेताओं के संगठन का कहना है कि वे पारदर्शिता के समर्थन में हैं, लेकिन अत्यधिक सख्ती से कामकाज प्रभावित हो सकता है।

एक दुकान मालिक ने कहा—

“हम चाहते हैं कि फर्जीवाड़ा पूरी तरह खत्म हो। लेकिन निरीक्षण के नाम पर अति-सतर्कता से व्यापार ठप होता है। नियम हों, लेकिन व्यावहारिक हों।”

वहीं, उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार के कदम का स्वागत किया है।

दिल्ली के एक उपभोक्ता अधिकार समूह ने बयान जारी कर कहा—

“नरेला की घटना इस बात का प्रमाण है कि सख्त नीतियों और निरंतर निगरानी की जरूरत है। शराब दुकानों में इस तरह की धोखाधड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सीधा असर डालती है। सरकार ने सही कदम उठाया है।”


शराब नीति पर पहले से विवाद, अब नई चुनौती

दिल्ली की शराब नीति पिछले दो वर्षों से राजनीतिक और कानूनी विवादों के केंद्र में रही है। पुराने आबकारी नियमों की बहाली के बाद कई सरकारी एजेंसियों को शराब दुकानों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिनमें DSIIDC का नाम प्रमुख है।

नरेला का प्रकरण इस नए ढांचे की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है क्योंकि—

  • सरकारी दुकानों में भी फर्जीवाड़ा हो रहा है
  • सप्लाई चेन और इन्वेंट्री प्रबंधन कमजोर हैं
  • कर्मचारियों की निगरानी का अभाव है

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द सुधार नहीं किए गए, तो शराब नीति पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो सकते हैं।


आगे क्या? बड़े पैमाने पर ऑडिट की तैयारी

सरकार अब राजधानी की सभी शराब दुकानों में बड़े पैमाने पर ऑडिट और फील्ड इंस्पेक्शन चलाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक—

  • हर दुकान के स्टॉक की पिछले छह महीनों की जांच होगी
  • सप्लायरों से लेकर बिक्री तक की ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित की जाएगी
  • नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई तेज की जाएगी

इसके अलावा, कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच और प्रशिक्षण प्रणाली को भी सुधारने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

नरेला की घटना ने दिल्ली की शराब दुकानों में पारदर्शिता, गुणवत्ता नियंत्रण और उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने जो परामर्श जारी किया है, वह स्थिति को संभालने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन वास्तविक सुधार तभी संभव है जब—

  • निगरानी तंत्र मजबूत हो,
  • दुकानों की जवाबदेही तय हो,
  • और उपभोक्ता शिकायतें तुरंत निपटाई जाएँ।

राजधानी में शराब की खुदरा बिक्री से हर साल बड़ा राजस्व मिलता है। ऐसे में उपभोक्ता सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना न सिर्फ शासन की आवश्यकता है, बल्कि उसकी जिम्मेदारी भी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button