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The Hill India > Blog > दिल्ली > दिल्ली में ‘प्रदूषण इमरजेंसी’: नितिन गडकरी ने स्वीकारी ट्रांसपोर्ट सेक्टर की 40% हिस्सेदारी, बोले- “2 दिन रुकता हूँ तो गला खराब हो जाता है”
दिल्लीफीचर्ड

दिल्ली में ‘प्रदूषण इमरजेंसी’: नितिन गडकरी ने स्वीकारी ट्रांसपोर्ट सेक्टर की 40% हिस्सेदारी, बोले- “2 दिन रुकता हूँ तो गला खराब हो जाता है”

The Hill India News
Last updated: December 24, 2025 3:01 am
The Hill India News
Published: December 24, 2025
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नई दिल्ली | 24 दिसंबर, 2025

Contents
“दिल्ली में रुकना अब स्वास्थ्य के लिए चुनौती”: गडकरीजीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) पर कड़ा प्रहारदिल्ली की हवा का मौजूदा हाल: AQI 413 के पारप्रदूषण के अन्य कारक और सरकारी उपायनिष्कर्ष

देश की राजधानी दिल्ली इस समय एक गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल (Health Emergency) के मुहाने पर खड़ी है। प्रदूषण का स्तर जानलेवा श्रेणी में पहुँच चुका है, जिससे आम जनता के साथ-साथ सत्ता के गलियारों में भी चिंता गहरा गई है। इस बीच, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली के वायु प्रदूषण को लेकर एक बड़ा और ईमानदार बयान दिया है।

“दिल्ली में रुकना अब स्वास्थ्य के लिए चुनौती”: गडकरी

एक कार्यक्रम के दौरान दिल्ली की जहरीली हवा पर बात करते हुए नितिन गडकरी ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा:

“आज दिल्ली प्रदूषण से बुरी तरह त्रस्त है। स्थिति यह है कि जब मैं खुद दिल्ली में दो दिन रुकता हूँ, तो मुझे गले में इंफेक्शन हो जाता है। एक सड़क परिवहन मंत्री होने के नाते, मैं यह जिम्मेदारी स्वीकार करता हूँ कि दिल्ली के कुल प्रदूषण में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी हमारे ट्रांसपोर्ट सेक्टर की है।”

गडकरी का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पहली बार है जब किसी वरिष्ठ मंत्री ने प्रदूषण में अपने विभाग से जुड़ी जिम्मेदारी को इतनी स्पष्टता से स्वीकार किया है।


जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) पर कड़ा प्रहार

नितिन गडकरी ने प्रदूषण के मूल कारण के रूप में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर इसके दोहरे प्रभाव को रेखांकित किया:

  • आर्थिक बोझ: गडकरी ने बताया कि भारत हर साल लगभग ₹22 लाख करोड़ जीवाश्म ईंधन के आयात पर खर्च करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस निर्भरता को कम करना हमारी प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?

  • कड़ी टिप्पणी: उन्होंने तीखे लहजे में पूछा, “जीवाश्म ईंधन का उपयोग जारी रखना और प्रदूषण बढ़ाना किस तरह की राष्ट्रभक्ति है? ये ईंधन सीमित हैं और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँचा रहे हैं।”

  • विकल्प की वकालत: मंत्री ने एक बार फिर इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली गाड़ियों पर जोर दिया, जो शून्य प्रदूषण (Zero Emission) सुनिश्चित करती हैं।


दिल्ली की हवा का मौजूदा हाल: AQI 413 के पार

दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति वर्तमान में अत्यंत ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में बनी हुई है। मंगलवार सुबह सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार:

  • एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI): सुबह 8 बजे औसत AQI 413 दर्ज किया गया।

  • विजिबिलिटी: धुंध और स्मॉग के कारण सड़कों पर दृश्यता काफी कम हो गई है, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है।

  • स्वास्थ्य प्रभाव: डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इस स्तर की हवा में सांस लेना दिन में 20-25 सिगरेट पीने के बराबर है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में सांस की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।

प्रदूषण के अन्य कारक और सरकारी उपाय

यद्यपि गडकरी ने परिवहन क्षेत्र की 40% हिस्सेदारी की बात की है, विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण कार्य, धूल, पराली जलाना और औद्योगिक उत्सर्जन भी इस संकट में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में दिल्ली-NCR में GRAP (Graded Response Action Plan) के कड़े चरण लागू हैं, जिसके तहत निर्माण कार्यों पर रोक और भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाए गए हैं।

निष्कर्ष

नितिन गडकरी का यह बयान परिवहन नीति में क्रांतिकारी बदलाव की आवश्यकता की ओर इशारा करता है। जब तक भारत जीवाश्म ईंधन से हटकर हरित ऊर्जा (Green Energy) की ओर तेजी से कदम नहीं बढ़ाएगा, तब तक दिल्ली जैसे महानगरों के लिए ‘स्वच्छ हवा’ एक सपना ही बनी रहेगी। गडकरी की यह बेबाक स्वीकारोक्ति शायद अन्य विभागों और सरकारों को भी आत्मनिरीक्षण के लिए प्रेरित करे।

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